विचार

प्रेम विवाह का ही पूर्वरूप था गान्धर्व विवाह

डॉ. कामिनी वर्मा सृष्टि के नैरंतर्य एवं मानव जीवन की चित्तवृत्तियों के शमनार्थ भारतीय समाज में गृहस्थाश्रम का विधान किया गया है।महाभारत में उल्लिखित है, *यह आश्रम बड़ा दुष्कर और श्रेष्ठतम है क्योंकि गृहस्थ से बड़ा त्यागी कोई नही है।* इसी आश्रम पर ब्रम्हचर्य और वानप्रस्थ आश्रम आश्रित होता है।तथा पितृ ऋण से उऋण होने […]

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मुझे रखकर छांव में, खुद तपते रहे धूप में, मैंने देखा एक फरिश्ता, अपने पिता के रूप में’

डॉ. कामिनी वर्मा मुझे रखकर छांव में, खुद तपते रहे धूप में, मैंने देखा एक फरिश्ता , अपने पिता के रूप में’ पिता शब्द जेहन में आते ही उस सुरक्षात्मक घेरे की सुखद अनुभूति होती है जिसकी परिधि में आकर संतान हर प्रकार की कठिनाईयों व झंझावातों से मुक्ति प्राप्त करती है । संतान का […]

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डॉ कामिनी वर्मा को ‘दुर्गा शक्ति’ सम्मान

नीरज पांडेय, नई दिल्ली नारी सशक्तिकरण हेतु सतत कार्यरत ज्ञानपुर उत्तरप्रदेश काशी नरेश राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय को एक राष्ट्रीय कराटे संस्था द्वारा *दुर्गा शक्ति* सम्मान से सम्मानित किया गया । कर्म पूरा स्थित *शाओ कानो मार्शल – आर्ट क्लब दिल्ली* के प्रशिक्षण केंद्र पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय संस्था *मातसूबे आशी रयू कराटे – […]

दिल्ली

डॉ. कामिनी वर्मा सहित देश के विख्यात साहित्यकारों व शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित

नीरज पांडेय, नई दिल्ली  भारत उत्थान न्यास के तत्वाधान में *भारत के उत्थान में शिक्षा और साहित्य की भूमिका* विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन नई दिल्ली आईटीओ स्थित हिंदी भवन सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शशि पाण्डेय के मधुर कण्ठ से सरस्वती वन्दना का सस्वर वाचन से हुआ। कार्यक्रम में देश […]

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माँ की दुआओं में ही दुनिया की सारी दौलत

भदोही से डॉ. कामिनी वर्मा ईश्वर हर किसी के पास नहीं पहुँच पाया होगा, शायद इसीलिए अपनी प्रतिकृति माँ के रूप में पृथ्वी पर भेज दी। माँ संतान के लिए ईश्वर का अद्वितीय उपहार है। माँ की दुआओं में दुनिया की सारी दौलत है , माँ भाव है, दुलार है , ममता का लहराता सागर […]

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डॉ. अम्बेडकर सदैव नारी उत्थान के लिए प्रयासरत रहे, पढ़ें भदोही से डॉ कामिनी वर्मा का विशेष लेेेख… 

समाज से अन्याय और असमानता समाप्त करने के लिए सतत संघर्षरत डॉ भीम राव अम्बेडकर का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है ।स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के अभाव मे आदर्शसमाज स्थापित नही हो सकता।पितृ सत्ता प्रधान भारतीय समाज मे नारी की स्थिति या तो देवी की रही है या दानवी की । […]