विचार

डालें अच्छे बीज कि कर्म की फसल संबको काटनी पड़ती है

कर्म की फसल सबको ही काटनी पड़ती है। अपने रास्ते की झाड़ी खुद ही छाँटनी पड़ती है।। और कोई नहीं बांटता हमारी करनी का कुफल। नफ़रत की धूल खुद ही हमें फाँकनी पड़ती है।। दुःख संघर्ष हार बाद भी जन्म विश्वास का होता है। जो कष्टऔर धैर्य से घबरा गया वो निराश होता है।। हार […]

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अपने किरदार को जियें बहुत ही शिद्दत से जिंदगी में…

आओ करें दुनिया में कुछ काम हम ऐसा। दुनिया चाहे बनना फिर हम ही जैसा।। किरदार को जियें जिंदगी में ऐसी शिद्दत से। जाने से पहले बनाये अपना नाम कुछ हम वैसा।। विश्वास झलके हमारे हर किरदार में। कुछ कर गुजरने का यकीन हो चाल ढाल में।। जान लो हमारे शरीर का हर अंग बोलता […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं – 6

एहसास… थाम कर बादलों का काफिला मन हुआ छुप जाऊं मैं उनके तले देख लूंगा ओट से उस चांद को मखमली सी चांदनी बिखेरते कहते हो तुम लुकाछिपी क्या खेल है ? शोभता है क्या तुम्हें ये खेलना मिलो जीवन के यथार्थ से समझो क्या है जगत की वेदना सुनो ! बात तुमने है कही […]