नीरज सिसौदिया, बरेली जब इबादत का महीना दिलों को नरम करता है, जब रोज़ों की पाकीज़गी इंसान को इंसान के और करीब लाती है और जब समाज को सबसे ज़्यादा मोहब्बत की ज़रूरत होती है—ऐसे वक्त में अगर कोई आगे बढ़कर दिलों को जोड़ने का काम करे, तो वह सिर्फ एक आयोजन नहीं करता, बल्कि […]

