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प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य नरेश नाथ ने की भविष्यवाणी, पाकिस्तान के लिए आने वाला समय ठीक नहीं…

नीरज सिसौदिया, जालंधर  जी हां, ये सच है कि आने वाला समय पाकिस्तान के लिए ठीक नहीं है। ये हम नहीं बल्कि पाकिस्तान के ग्रह-चाल बता रहे हैं। पाकिस्तान का आने वाला समय विनाशकारी होगा। यह भविष्यवाणी प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य नरेशनाथ ने की है। बता दें कि इससे पहले भी नरेशनाथ द्वारा की गईं कई भविष्य […]

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सियासत का महासंग्राम : इधर प्रियंका का कद बढ़ा, उधर वाड्रा पर ईडी का शिकंजा कसा, “बीजेपी या कांग्रेस” फायदा किसका? 

नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली  वर्ष 2019 का चुनावी महासंग्राम बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है| सत्ता की जंग में महारथी पूरा जोर लगा रहे हैं| खेल सारा चेहरे और मोहरेे का है| 5 साल पहले नरेंद्र मोदी के चेहरे ने भाजपा को सत्ता के शीर्ष पर बैठाया था तो वहीं 5 साल बाद […]

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जानिये श्राद्ध क्या है और इनका महत्व क्या है…

नरेश नाथ (ज्योतिषाचार्य) श्राद्ध का महत्व जाने से पहले यह जानना आवश्यक है की हम यह क्यों कर रहे हैं शरीर में जब तक आत्मा है वह जीवित है जब वह आत्मा शरीर से निकल कर परमात्मा की ओर ना जा कर पितृ लोक में वास करती है तो अपने किए हुए अक्षम पापों के […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं – 11

गिले अपनी मजबूरियों से  जिंदगी भी क्या अजब सवाल पूछती है क्यों दुःख और निराशा एक साथ देती है कुछ जी नहीं पा रहे हैं इनके बोझ तले कुछ ढूंढ रहे अपनी रिहाई के नए रास्ते पर चल सब रहे कुछ मन कुछ बेमन से कुछ अपनी पहचान से कुछ गुमनाम से कितनो को हैं […]

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…जब संत कबीर ने इस्लाम अपनाने से कर दिया था इनकार

सुखदेव ‘राही’ जब कबीर ने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया तो सिकंदर लोदी के आदेश से जंजीरो में जकड़कर कबीर को मगहर लाया गया। वहां लाते ही जब शहंशाह के हुक्म के अनुसार कबीर को मस्त हाथी के पैरों तले रौंदा जाने लगा, तब लोई पछाड़ खाकर पति के पैरों पर गिर पड़ी। […]

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उपवास का मुख्य संदेश मानवता के नाम है

रमज़ानुल मुबारक हमदर्दी, गमख़ारी, दया, मदद और अयानत का खास महीना है, रमज़ानुल मुबारक का यह ख़ास महीना विदा और जुदा होते हुए रोज़ेदार को यह बता रहा है कि मेरे जाने के बाद समाज के इस विभाग को जिंदा और जारी रखना जिससे आप और आपके समाज को फायदा हासिल हो और आपका समाज […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं – 7

जीवन का आधार हैं पेड़… जीवन के आधार हैं वृक्ष, जीवन के ये अमृत हैं फिर भी मानव ने देखो इनमें विष बोया है स्वार्थ मनुष्य का हर पल उसके आगे आया है अपने ही हाथों से उसने अपना गाला दबाया है काट काट कर उसने वृक्षों को अपना लाभ कमाया है पर अपनी ही […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं – 6

एहसास… थाम कर बादलों का काफिला मन हुआ छुप जाऊं मैं उनके तले देख लूंगा ओट से उस चांद को मखमली सी चांदनी बिखेरते कहते हो तुम लुकाछिपी क्या खेल है ? शोभता है क्या तुम्हें ये खेलना मिलो जीवन के यथार्थ से समझो क्या है जगत की वेदना सुनो ! बात तुमने है कही […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं-5

नारी सबसे महान तड़पती है आसमान में उड़ने की ख़्वाहिश में, रोको न इसको तुम, हवस की फरमाइश में। चाहती है हंसना, सांस लेना आजादी की आबो-हवा में, जकड़ो न इसे तुम, स्वार्थ की फरमाइश में। चाहती है डूबना, प्रकृति की अतुल्यता में, खींचो न इसे तुम, गर्त की गहराई में। चाहती है चलना, राहों […]

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प्रज्ञा यादव की कविताएं – 4

दिल पे मुश्किल है दिल की कहानी लिखना, जैसे बहते हुए पानी में पानी लिखना. बहुत आसां है किसी के दिल पे दस्तकें देना, जैसे अपने आईने में अक्स को पाना. ऐ आसमां समझाओ इन चांद तारों को, तुम रोक लो वापस इन बेलगाम हवाओं को, ये दुनिया ये लोग एक गहरा समंदर है, जितना […]