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व्यंग्य : हार के आगे प्यार है…

सुधीर राघव बीवी को प्यार से डर लगता है, झगड़े से नहीं! अगर आप चाहते हैं कि आपकी बीवी आपसे डरे तो ताबड़तोड़ प्यार करते रहो! गलती से भी झगड़े का ट्रेक पकड़ा तो आपका बैंड बजना तय है. वह पृथ्वीराज नहीं है कि इक्कीस बार जीतने के बाद बाइसवीं बार हार जाए. बाइसवीं बार […]

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व्यंग्य : अबकी बार, नदिया पार

सुधीर राघव नेता नाव में है. और नाव पानी में. नेता अकेला नहीं है. उसने पूरी पार्टी को नाव में भर लिया है. नेता लालची है. इसलिए उसने दूसरी पार्टियों के लोगों को भी अपनी नाव में लाद लिया है. ज्यादातर को तो बाकायदा गुंडे भेजकर उठवाया है और तब अपनी नाव में लादा है. […]

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क्योंकि भैंस भी कभी गाय थी…

सुधीर राघव बहुत से लोगों को लगता है कि भैंस भी कभी गाय रही होगी! उसकी कमर भी बाइस- चौबीस रही होगी! उसका रंग भी साफ रहा होगा! भैंसों की भी कभी जॉलाइन दिखती होगी! मगर ऐसा नहीं है. भैंस भी कभी गाय थी, यह भ्रम बस उनको होता है, जिन्होंने चार्ल्स डार्विन के क्रम […]

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व्यंग्य : सच की मर्दाना कमजोरी

सुधीर राघव झूठ की महिमा न्यारी है. झूठ से दुनिया चल रही है. विद्वानों ने जगत को मिथ्या कहा है. उपनिषद कहते हैं कि असत्य पांच भौतिक तत्वों से बना है, जबकि जगत का सत्य नेति नेति अर्थात न इति न इति मायने कुछ भी नहीं है। जगत झूठा और नेति नेति ही परम सत्य […]

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व्यंग्य : नफ़रत के बीज और वोटों की बारिश

सुधीर राघव अंग्रेजी में जिसे यूनियन बोलते हैं, हिंदी में उसे संघ कहते हैं. इस तरह हर यूनियनिस्ट संघी है. संघी या यूनियनिस्ट होना बुरी बात नहीं है. बुरा तब लगता है जब मछली तेजराम खाए और कांटा संघी के फंस जाए. मछली का सारा स्वाद और प्रोटीन तेजराम को मिले और दर्द से बिलबिलाना […]

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व्यंग्य : पत्नी पीड़ित और पराई

सुधीर राघव बीवी पर व्यंग्य करना दुनिया का सबसे आसान काम है. पत्नी का उपहास उड़ाकर न जाने कितने कलमघिस्सू व्यंग्यकार हो गए और न जाने कितने हास्य रस के मंच शिरोमणि कवि! खूंखार बीवी के चुटकुले सुनाकर महफ़िल लूटने वालों की भी कोई कमी नहीं है. मगर क्या आपने कभी किसी पुरुष को दूसरे […]

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व्यंग्य : पहन ले चड्डी, छोड़ दे हल

सुधीर राघव पंडित तोताराम मंडी की ओर जा रहे थे. शहर-कस्बों में तो रोज मंडी लगती है. गांवों में लोग साप्ताहिक और पाक्षिक मंडी जाते हैं. पंडित तोताराम जिस मंडी में जा रहे थे, वह तो पूरे पांच साल बाद लगी थी. इसलिए इस मंडी को लेकर उत्साह बहुत ज्यादा था. पंडिताइन के लाख मना […]

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व्यंग्य : गोभी और गधे का प्रेम…

विद्वानों ने कहा है, एक बरस के मौसम चार! जो इनसे भी बड़े विद्वान हैं, वे पांचवां मौसम प्यार को मानते हैं. प्रेम करने वाले प्रेमी प्रेमिका कहलाते हैं. उनके किस्से मशहूर होते हैं. प्रेम हमेशा प्रेमी-प्रेमिका में ही माना जाता है, मियां-बीवी का प्यार मान्यता प्राप्त प्रेम नहीं है. पति-पत्नी का प्रेम बाकी समाज […]

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चंदन, वंदन और लंपटनंदन

सुधीर राघव मोहल्ले भर की महिलाओं में लंपट चंद मशहूर थे. पूरा नाम था उनका, लंपट चंद चुटियाधारी. मोहल्ला लेवल की राजनीति करते थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बात. ट्रम्प से उनका तू वाला रिश्ता था और बाइडेन से मैं वाला. यह उनका कहना था. सुनक और अलथानी उनके हम निवाला थे. जिनपिंग को झुलाने, […]

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जय जय -जय जय होली है…

मत करना अफसोस जरा भी, ले ली थोड़ी गोली है । बड़े प्रेम से मिलकर बोलो, जय जय -जय जय होली है ।। एक बरस में एक बार ही छेड़छाड़ होती जमकर । जीजा – साली , देवर – भाभो, की बातें होती दर दर ।। कर ना पाया छेड़छाड़ जो, उसकी खाली झोली है […]