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मैं एक कलम का सिपाही हूँ…

मैं एक कलम का सिपाही हूँ।। मैं राजनीति का मंच हूँ। मैं लिये व्यंग का तंज हूँ। मैं विरोधी पर पंच हूँ।। मैं एक कलम का सिपाही हूँ।। मैं भूख का निवाला हूँ। मैं मंदिर ओ शिवाला हूँ। मैं देश का रखवाला हूँ।। मैं एक कलम का सिपाही हूँ।। मैं सबकी सुनता कहता हूँ। नहीं […]

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कामयाबी का अपना एक अलग गणित होता है…

गिर कर चट्टानों से पानी और तेज होता है। वही जीतता जो उम्मीदों से लबरेज होता है।। गुजर कर संघर्षों से व्यक्ति और है मजबूत बनता। भागता और तेज जब नीचे कांटों का सेज होता है।। दीपक के तले सदा अंधेरा ही रहता है। पर खुद जलकर उससे रोशन सबेरा बहता है।। मुश्किलों में ही […]

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केवल कर्मप्रधान ही जीवन है..

जीवन खेल जीवन चुनौती है कठिन रेल जीवन गर्व जीवन संघर्ष है न कर दर्प जिंदगी एक अनुभव अनेक नया हरेक न हो पहेली जीवन बने ऐसे बने सहेली ये सुख भी है जीवन धूप छाँव ये दुःख भी है जीवन कर्म निरंतर चले ये जीवन श्रम हार न हार कोशिश जारी रहे जीत स्वीकार […]

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आज भी रावण जिंदा है…

दस शीश हैं आज तो रावण के सौ भी शीश हैं हर स्थान में रावण मैजूद है पास मकां में आज रावण गुरु ज्ञानी नहीं है बस हरण न मानवता आज के रावण में है दानवता प्रलय कारी भेड़ खाल भेड़िया है अत्याचारी है गली गली कानून व्यवस्था तो है सड़ी गली जिम्मेदारी भी सबको […]

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आज माफिया की चलती है

पता नहीं है कौन कहाँ पर, हाय मवाली अब कहलाए आज माफिया की चलती है, जो सज्जन का दिल दहलाए। हुई व्यवस्था ध्वस्त यहाँ पर, सत्ता का मुँह भला क्यों सिला बनकर क्यों मौसेरा भाई, चोर- चोर से खूब अब मिला फँसा मुचलका पाबंदी में, सद्भावों को जो सहलाए आज माफिया की चलती है, जो […]

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तन मन का स्वास्थ्य

घर का खाना सेहत का खजाना क्यों है अंजाना नमक चीनी कम हों ये खाने में यही हकीमी दूध व दही स्वास्थ्य की खाता बही खूब है सही रोजाना सेब दूर ये रखे तेरे डॉक्टर देव ये हरी मिर्च सेहत का खजाना दूर हो मर्ज पेट हो साफ शहद नींबू पियें रोग हों हाफ दूध […]

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क्या फायदा है बेकार जिंदगी का…

जारी रखो हमेशा सुधार जिंदगी का। क्या फायदा है बेकार जिंदगी का।। जो तप कर बनता है कुंदन जिंदगी में। वही कहलाता है सुनार जिंदगी का।। तुम बढ़ कर गले लगाओ जिंदगी को। मत करते रहो इंतिज़ार जिन्दगी का।। जो खुद लिखते हैं लकीरें किस्मत की। कहलाता असल कलमकार ज़िंदगी का।। जिसनेआर्शीवाद लिया हमेशा माँ […]

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बढ़ रहा तापमान, हो रहा पर्यावरण का नुकसान

नदी ताल में कम हो रहा जल और हम पानी यूँ ही बहा रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहे और समुन्द्र तल यूँ ही बढ़ते ही जा रहे हैं।। काट कर सारे वन कंक्रीट के कई जंगल बसा दिये विकास ने। अनायस ही विनाश की ओर कदम दुनिया के चले ही जा रहे हैं ।। पॉलीथिन […]

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साहित्य की बात : 30 जून जयन्ती पर विशेष : घुमक्कड़ साहित्यकार वैद्यनाथ मिश्र उर्फ ‘नागार्जुन’

वैद्यनाथ मिश्र उर्फ नागार्जुन की गणना देश के अग्रणी साहित्यकारों में होती है। उन्होंने साहित्य की हर विधा में अपनी लेखनी चलाई। वह एक ख्यातिलब्ध कवि, सिद्धहस्त कथाशिल्पी और प्रसिद्ध उपन्यासकार थे। उनका मूल नाम तो वैद्यनाथ मिश्र था, परन्तु उन्होंने हिन्दी में ‘नागार्जुन’ और मैथिली में ‘यात्री’ उपनाम से रचनाएं लिखीं। उन्होंने संस्कृत एवं […]

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28 जून जयन्ती पर विशेष : मातृ भूमि की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व दान कर देने वाले इतिहास पुरुष भामाशाह

भामाशाह मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के सच्चे मित्र और विश्वस्त सलाहकार थे । बे अपनी मातृभूमि से बेहद प्रेम करते थे । महाराणा प्रताप के जीवन में ऐसा कठिन दौर भी आया जब मेबाड़ की रक्षा के लिए उन्हें जंगलों मे भटकना पडा ।ऐसे में भामाशाह ने एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया । बे […]