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शुभ नवरात्रि महिमा अपार

माँ जयकार शक्ति ओ भक्ति जागे बेड़ा हो पार पापनाशिनी दुर्गा चंडी रूपा तू सिंह वाहिनी तेरा श्रृंगार भक्ति भरे अपार करे उद्धार माँ तेरा नाम बिगड़े काम बने न हो नाकाम माँ आशीर्वाद जब प्राप्त हो जाये मिटे विवाद भक्ति ओ आस्था मिले गुम वो रास्ता हो माँ से वास्ता जौ का कसोरा पूजन […]

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नवरात्र वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में

मीना यादव  नवरात्र यानी नौ विशेष रात्रियाँ। इस समय शक्ति के नौ रूपों की उपासना का श्रेष्ठ काल माना जाता है। रात्रि शब्द सिद्धि का प्रतीक है। प्रत्येक संवत्सर (वर्ष) में चार नवरात्र होते हैं। जिनमें विद्वानों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों में आराधना का विधान बताया है। विक्रम सम्वत् के पहले दिन अर्थात् […]

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12 अप्रैल को है सोमवती अमावस्या, तिथि, शुभ मुहूर्त और अमावस्या का महत्व बता रहे हैं पण्डित हेमन्त शांंडिल्य

सनातन धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या का बेहद खास महत्व माना जाता है, बता दें कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या आती है और अगर यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ जाय तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है पं. संजीव कृष्ण शास्त्री के अनुसार चैत्र महीने में सोमवती अमावस्या […]

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चलो एक पौधा प्रेम का, मिलकर लगाया जाये…

चलो एक पौधा प्रेम का, मिलकर लगाया जाये। महोब्बत ही खुदा यह ,संबको बताया जाये।। नफरत करने वाले ,कभी भी पनपते नहीं। इस बात को अब, संबको दिखाया जाये।। मायूसी और उदासी से ,निकलें लोग जरा। हौसलों का नगमा ,संबको सुनाया जाये।। मिलकर जीने में ही है ,कौम की भलाई। इस बात को बहुत दूर, […]

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साहित्य की बात : पिता थे विधायक पर बेटे को सियासत नहीं थी स्वीकार, बन गए साहित्यकार, कुछ ऐसी ही शख्सियत हैं बरेली के रजत कुमार

सियासत अगर विरासत में मिले तो सफलता की गारंटी दोगुनी हो जाती है. खास तौर पर तब जबकि पिता खुद विधायक या सांसद रहे हों मगर एक शख्सियत ऐसी भी है जिसके पिता विधायक थे लेकिन उस शख्स ने राजनीति की जगह कलम को चुना. पिता की विरासत को संभालने की बजाय उसने ताउम्र साहित्य […]

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नेता का यही गुण है…

*।।रचना शीर्षक।।* कभी शोला कभी शबनम नेता का यही गुण है। सुबह प्रसाद रात में रम नेता का यही गुण है।। कथनी करनी के अंतर का उदाहरण है नेता। पैसे की बरसात झमाझम नेता का यही गुण है।। कभी नरम और कभी गरम नेता का यही गुण है। कब क्यों कैसे आँखें नम नेता का […]

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त्योहार केवल पर्व ही नहीं संबधों की प्रगाढ़ता के सुअवसर हैं

होली ,दीवाली, दशहरा व अन्य केवल रंगों के खेलने व आतिशबाजी के त्यौहार ही नहीं है,अपितु दिलों का रंगना,मिलना इसमें परमआवश्यक है।रंगों के बहने के साथ ही मन का मैल बहना भी बहुत आवश्यक है ,तभी होली की सार्थकता है और दीपावली पर जाकर मिलना ,उनके हाथ से मीठा खाना, साथ हंसना बोलना ही पर्व […]

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अब कुएं के मेंढकों में भी बढ़ी उत्तेजना

अब कुएँ के मेंढकों में भी बढ़ी उत्तेजना सभी तुकबंदी करेंगे बन गयी यह योजना। एक को दादा बनाया जो कि कवियों से जला और फिर तो तिकड़मों का चला ऐसा सिलसिला माफिया का साथ पाकर उन्होंने सबको छला हुई कवि की पलक गीली उठे आँसू छलछला नहीं कोई साथ देगा, भाव यह मन में […]

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इक़ जमाना बीत गया भीगे बरसात में…

सोते नहीं छत पे पहले जैसे रात में। लगाते नहीं गले हर मुलाकात में।। बदल गया चलन अब जमाने का। देखते हैं कीमत हर भेंट सौगात में।। चकाचौंध रोशन बन गई दुनिया। अब यकीं घट गया जज्बात में।। बडे बूढ़ों के आशीर्वाद में रहा नहीं यकीं। बौखला जाते हैं बुजुर्गों की लात में।। दुनिया की […]

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शख़्सियत निशान छोड़ती है…

शख़्सियत निशान छोड़ती है। तहज़ीब खुद से बोलती है।। एक ही जुबाँ पर जहर शक्कर। कहते हैं झूठी जुबां झोलती है।। जिसको कद्र नहीं नफ़ासत की। अंगूठी हीरे की भी यूँ रोलती है।। अजब गजब सा आ गया जमाना। सच्चाई झूठ के आगे डोलती है।। *हंस* इक़ राज़ की बात बताऊँ मैं। जिन्दगी रोज़ नया […]