गीत – मात्रा विधान 16/16 हुआ यह कैसा बंटाधार बचा ना रिश्तों में आधार धन – दौलत ने रिश्ते तोड़े यों अपने अपनापन छोड़े हुआ है दिल भी अब व्यापार बचा ना रिश्तों में आधार हुआ यह कैसा बंटाधार ईर्ष्या की जड़ गहरी बोई रिश्तों ने मर्यादा खोई सूखी प्रेम की बंदनवार बचा ना रिश्तों […]





