तलाश… जाने लोग यहां क्या-क्या तलाश करते हैं पतझड़ों में हम सावन की राह तक़ते हैं अनसुनी चीखों का शोर है यहां हर तरफ़ खामोश स्वरों से नगमे सुनने की बात करते हैं जाने लोग यहां क्या-क्या तलाश करते हैं … बंट गयी है ज़िंदगी यहां कई टुकड़ों में टूटते सपनों में, अनचाहे से रिश्तों […]
विचार
चूड़ा-दही से लेकर छोले-भटूरे तक का उपवास
आनंद सिंह तब हम बच्चे थे। पढ़ते थे। हमारे शहर झुमरीतिलैया में दो नामी स्कूल हुए। एक-सैनिक स्कूल, तिलैयाडैम और दूसरा संत जोसेफ स्कूल, झुमरीतिलैया। बाबूजी अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष थे। कई स्कूलों के मानद सभापति। हमारा ननिहाल वैशाली जिले में है। वहां के लोग अपने मेहमान, अर्थात हमारे बाबूजी का बड़ा मान रखते थे। वैशाली […]










