नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अब महज 6 माह का समय है, लेकिन समाजवादी पार्टी में कई विधानसभा सीटों पर टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान अभी से खुलकर सामने आने लगी है। बरेली जिले की सुरक्षित फरीदपुर विधानसभा सीट पर भी यही तस्वीर देखने को मिली, जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक संगठनात्मक मजबूती की बजाय गुटबाजी की वजह से चर्चा में आ गई। बैठक के दौरान पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह के करीबी नेताओं की टिप्पणियों पर टिकट की दावेदार शालिनी सिंह और एक अन्य दावेदार हरीश लाखा खुलकर नाराज हो गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और माहौल इतना गर्म हो गया कि मामला हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई। स्थिति को संभालने के लिए जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल आगामी 15 जुलाई को फरीदपुर स्थित एक रिसॉर्ट में प्रस्तावित पार्टी कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। उनके स्वागत और कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को बैठक बुलाई गई थी। बैठक में जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव, विधानसभा क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और टिकट के दावेदार मौजूद थे। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही कई नेताओं के बीच यह चर्चा थी कि कार्यक्रम की तैयारियों से अधिक फोकस आगामी विधानसभा चुनाव और टिकट की दावेदारी पर रहेगा। बैठक के घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को सही साबित कर दिया।
बैठक की सबसे बड़ी चर्चा पांच बार फरीदपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर के परिवार के टिकट के दो दावेदारों की अनुपस्थिति रही। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उनके परिवार से टिकट के दो प्रमुख दावेदार माने जा रहे चंद्रसेन सागर, जो स्वर्गीय सियाराम सागर के छोटे भाई हैं, तथा उनकी पुत्रवधू कल्पना सागर बैठक में शामिल नहीं हुए। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। जब इस संबंध में चंद्रसेन सागर से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें बैठक की कोई सूचना ही नहीं दी गई। उनके मुताबिक न तो जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की ओर से कोई सूचना दी गई और न ही बैठक के आयोजक, जो निवर्तमान विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष बलराम सिंह यादव बताए जा रहे हैं, उनकी ओर से कोई सूचना दी गई। इसलिए बैठक में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। बता दें कि बलराम सिंह यादव पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह के करीबी बताए जाते हैं और चंद्रसेन सागर विजयपाल सिंह के राजनीतिक विरोधी हैं। कल्पना सागर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
सूत्रों का कहना है कि बैठक में पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह के समर्थक और करीबी नेता खालिद राणा ने अपने संबोधन के दौरान बिना किसी का नाम लिए ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरे माहौल को बदल दिया। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी जीत सकती थी, लेकिन कुछ ऐसे लोग, जो पहले सपा से टिकट मांग रहे थे, टिकट न मिलने पर बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ गए। इससे पार्टी का वोट बंट गया और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि अब वही लोग एक बार फिर समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे हैं। बैठक में मौजूद अधिकांश नेताओं ने इस टिप्पणी को सीधे तौर पर शालिनी सिंह की ओर इशारा माना। दरअसल, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में शालिनी सिंह समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदार थीं। हालांकि पार्टी ने विजयपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद शालिनी सिंह ने बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया और बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। चुनाव में उन्हें 14 हजार से अधिक वोट मिले थे। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी विजयपाल सिंह को लगभग तीन हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। यदि विपक्षी वोटों का बंटवारा नहीं होता तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था। इसी पृष्ठभूमि में खालिद राणा की टिप्पणी को देखा जा रहा है।
बैठक के दौरान मामला यहीं नहीं रुका। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता कप्तान सिंह यादव ने भी संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है। बड़े कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने वाले कार्यकर्ताओं को मंच पर जगह तक नहीं मिलती, जबकि दूसरे दलों से आए नेताओं को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यहां तक कहा कि कई बार मूल कार्यकर्ताओं को बैठने के लिए स्वयं कुर्सियां खींचकर लानी पड़ती हैं। यद्यपि कप्तान सिंह यादव ने भी किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन बैठक में मौजूद नेताओं का मानना था कि उनका इशारा भी शालिनी सिंह की ओर था, जो कुछ समय पहले ही बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुई हैं और हाल के कार्यक्रमों में उन्हें प्रमुखता से मंच पर स्थान भी मिला है।
इन टिप्पणियों के बाद जब शालिनी सिंह को अपनी बात रखने का अवसर मिला तो उन्होंने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने सीधे खालिद राणा और कप्तान सिंह यादव का नाम लेते हुए कहा कि दोनों नेताओं को इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दल बदलना ही मुद्दा है तो केवल उन्हें ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। उनके अनुसार विजयपाल सिंह भी पहले बहुजन समाज पार्टी दूसरे दल से समाजवादी पार्टी में आए थे। इसलिए किसी एक व्यक्ति पर इस तरह का हमला उचित नहीं है।
शालिनी सिंह की इस प्रतिक्रिया के बाद बैठक का माहौल और अधिक गर्म हो गया। खालिद राणा और कप्तान सिंह यादव अपनी सीटों से खड़े हो गए और उन्होंने भी जवाब देना शुरू कर दिया। इसी दौरान फरीदपुर सीट से टिकट के एक अन्य दावेदार हरीश लाखा भी शालिनी सिंह के समर्थन में सामने आ गए। उन्होंने भी राणा और कप्तान सिंह की बातों का विरोध किया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि मामला हाथापाई तक पहुंच सकता है।
स्थिति को बिगड़ता देख जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सभी नेताओं को शांत रहने के लिए कहा और स्पष्ट निर्देश दिया कि अब कोई भी नेता इस विषय पर आगे कुछ नहीं बोलेगा। उन्होंने कहा कि पहले महानगर अध्यक्ष अपनी बात रखेंगे और उसके बाद वह स्वयं बैठक को संबोधित करेंगे। जिला अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह माहौल शांत हुआ और बैठक आगे बढ़ सकी।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे फरीदपुर विधानसभा सीट पर टिकट की बढ़ती दावेदारी और संगठन के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता भी दिखाई दे रही है। एक ओर पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह का अपना समर्थक वर्ग है तो दूसरी ओर नए और पुराने दावेदार अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम की तैयारी के लिए बुलाई गई बैठक भी शक्ति प्रदर्शन का मंच बनती नजर आई।
सूत्रों का कहना है कि फरीदपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर कई नेता सक्रिय रूप से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में हर बैठक और हर कार्यक्रम को संभावित उम्मीदवार अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर मान रहे हैं। यही कारण है कि छोटी-छोटी टिप्पणियां भी बड़े विवाद का रूप ले रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जिला संगठन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के भीतर चर्चा इस बात की भी है कि यदि स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर के परिवार से जुड़े प्रमुख दावेदार चंद्रसेन सागर को वास्तव में बैठक की सूचना नहीं दी गई तो यह संगठनात्मक समन्वय की कमी को दर्शाता है। वहीं यदि उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, तो इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में जिला संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि फरीदपुर विधानसभा सीट पर टिकट की दौड़ तेज हो चुकी है और पार्टी के भीतर गुटीय राजनीति खुलकर सामने आने लगी है। शनिवार की बैठक में हुई नोकझोंक ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी दिनों में टिकट की दावेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान और तेज हो सकती है। ऐसे समय में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल का प्रस्तावित दौरा संगठन के लिए एकजुटता का संदेश देने का अवसर होगा या फिर गुटबाजी की चर्चाओं को और हवा देगा, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




