यूपी

बरेली कैंट विधानसभा सीट : ‘ग्राउंड कनेक्शन’ से विधानसभा को कनेक्ट कर रहे राजेश अग्रवाल, जमीन पर काम से लेकर हिन्दुत्व की सियासत के लिए भी बन रहे बड़ी चुनौती, मंदिर से मोहल्ले तक गूंज रहा नाम, पढ़ें कैसे भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे सपा नेता राजेश अग्रवाल?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन बरेली की सबसे प्रतिष्ठित और राजनैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण कैंट विधानसभा सीट पर दावेदारों ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदारों में शामिल राजेश अग्रवाल पिछले कुछ महीनों से जिस तरह लगातार जनता के बीच सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, उसे उनकी ‘ग्राउंड कनेक्ट’ रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उनकी कोशिश केवल विरोधी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जनसमस्याओं के समाधान, सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और क्षेत्र के हर वर्ग के बीच लगातार मौजूद रहने की है। सबसे बड़ी बात भाजपा की हिन्दुत्व की सियासत को वह खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
बरेली कैंट जैसी शहरी सीट पर चुनाव केवल बड़े राजनीतिक मुद्दों से नहीं जीते जाते। यहां पानी, सड़क, सीवर, ट्रैफिक और नागरिक सुविधाएं मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि राजेश अग्रवाल अपनी राजनीति का केंद्र इन्हीं स्थानीय मुद्दों को बना रहे हैं।

सोशल मीडिया से मिली शिकायत, अगले दिन हुआ समाधान

हाल ही में कैंट क्षेत्र के एक प्रमुख मंदिर के पास करीब एक साल से पेयजल की मुख्य पाइपलाइन फटी हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। इसके बाद क्षेत्र के निवासी ने यह मामला राजेश अग्रवाल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उठाया। राजेश अग्रवाल ने संबंधित विभाग से संपर्क कर अगले ही दिन पाइपलाइन की मरम्मत कराने का दावा किया। इस घटनाक्रम को उन्होंने केवल उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि यह संदेश देने के लिए भी सामने रखा कि यदि जनता सीधे उनसे जुड़ती है तो वह समस्या के समाधान के लिए तत्काल प्रयास करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी राजनीति में ऐसी छोटी लेकिन सीधे जनता से जुड़ी पहल किसी भी नेता की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सिर्फ शिकायत नहीं, समाधान की भी बात

राजेश अग्रवाल की राजनीति का दूसरा पहलू यह है कि वे केवल सरकार की आलोचना तक सीमित नहीं रहते। उन्होंने हाल ही में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आधे शहर का पानी सुभाषनगर से आता है और इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए जनता और प्रशासन दोनों को कुछ कठिन निर्णय लेने होंगे। इस तरह के बयान यह संकेत देते हैं कि वह स्वयं को केवल विरोध करने वाले नेता के बजाय समाधान प्रस्तुत करने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

 

धार्मिक आयोजनों के जरिए सामाजिक पहुंच

बरेली कैंट विधानसभा सीट पर हिंदू मतदाता बड़ी संख्या में हैं और पूरे प्रदेश में भाजपा की चुनावी जंग हिन्दुत्व की सियासत को केंद्र में रखकर ही लड़ी जाती है। ऐसे में राजेश अग्रवाल की धार्मिक आयोजनों में बढ़ती सक्रियता भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में उन्होंने कालीबाड़ी से रवाना हुई 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत किया। फूल-मालाओं और ढोल-ताशों के बीच यात्रियों को शुभकामनाएं देकर उन्होंने धार्मिक आयोजनों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अहमियत लगातार बढ़ी है। ऐसे माहौल में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं की रणनीति भी बदली हुई दिखाई दे रही है। राजेश अग्रवाल की सक्रियता इसी बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। माना जा रहा है कि राजेश अग्रवाल की यह सक्रियता हिन्दुत्व के रथ को बरेली कैंट विधानसभा की सीमाएं पार नहीं करने देगी।

सिर्फ विरोध नहीं, समाधान की राजनीति का संदेश
राजेश अग्रवाल लगातार यह भी कह रहे हैं कि शहर में जलभराव की समस्या में स्थायी सुधार के लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि स्थानीय जनता को भी कुछ कठिन निर्णय लेने होंगे। उन्होंने सुभाषनगर पुलिया में जलभराव की स्थित का उल्लेख करते हुए कहा कि आधे शहर का पानी सुभाष नगर में आता है और यदि दीर्घकालिक समाधान चाहिए तो व्यापक योजना के साथ जनता का सहयोग भी जरूरी होगा। जब तक जनता काम करने वाले नेताओं को छोड़कर राजनीतिक दलों के नाम पर, हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर वोट करेगी तब तक इस तरह की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला। यह बयान केवल शिकायत करने वाली राजनीति से अलग दिखाई देता है। इससे वह स्वयं को ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं जो समस्या के साथ उसका व्यावहारिक समाधान भी सुझाता है।

हर वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजेश अग्रवाल किसी एक समुदाय या मुद्दे तक सीमित रहने के बजाय हर वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नागरिक समस्याओं के समाधान से लेकर धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से सीधे संवाद तक, उनकी राजनीति बहुआयामी नजर आ रही है। उनकी यह सक्रियता उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब समाजवादी पार्टी बरेली जैसे शहरी क्षेत्रों में अपने जनाधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है।

कैंट सीट पर टिकट की दौड़ भी तेज
बरेली कैंट विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। ऐसे में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा चेहरा खड़ा करना है जो संगठन के साथ-साथ जनता के बीच भी मजबूत पकड़ रखता हो। राजेश अग्रवाल पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में पार्षद, बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य तथा चौपला-बदायूं रोड रेल अंडरपास संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में सक्रिय हैं। पिछले कुछ समय में उनकी बढ़ी हुई जनसक्रियता को पार्टी के भीतर भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
समाजवादी पार्टी ने अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि जिन नेताओं की जनता के बीच सक्रियता लगातार दिखाई दे रही है, उन्हें टिकट वितरण में बढ़त मिल सकती है।
राजेश अग्रवाल की मौजूदा रणनीति भी इसी दिशा में नजर आती है। मोहल्लों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान, धार्मिक आयोजनों में मौजूदगी, सोशल मीडिया के जरिए सीधे संवाद और हर वर्ग के बीच पहुंच—इन सबके जरिए वह खुद को बरेली कैंट में एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी राजनीति केवल चुनावी मौसम तक सीमित नहीं बल्कि पूरे समय जनता के बीच मौजूद रहने वाली है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले बरेली कैंट की राजनीति में राजेश अग्रवाल के ‘ग्राउंड कनेक्ट’ की चर्चा लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *