यूपी

‘जो हो विकास की दरकार, तो अबकी लाएं अखिलेश सरकार’, पीडीए जनसंवाद कार्यक्रम से राजेश अग्रवाल ने दिए बड़े संकेत, कैंट विधानसभा के अति पिछड़े इलाके में किया शक्ति प्रदर्शन, अपने दम पर जुटाई सैकड़ों की भीड़, पढ़ें क्या-क्या रहा खास?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भले अभी दूर हों, लेकिन बरेली की कैंट विधानसभा में समाजवादी पार्टी के संभावित दावेदारों ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। गुरुवार को कैंट विधानसभा के अति पिछड़े क्षेत्र बंशी नगला में आयोजित समाजवादी पार्टी की पीडीए पंचायत केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसे आने वाले चुनावों की तैयारी और टिकट की दौड़ में अपनी दावेदारी मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे पूर्व शहर विधानसभा प्रत्याशी और कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल ने भाजपा सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और विकास का रास्ता समाजवादी पार्टी ही दिखा सकती है। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने नारा दिया, “जो हो विकास की दरकार, तो अबकी लाएं अखिलेश सरकार।”


हालांकि, राजनीतिक दृष्टि से इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत केवल सरकार पर हमला नहीं, बल्कि राजेश अग्रवाल की लगातार बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता और व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी रही।
जिस इलाके में यह पीडीए पंचायत आयोजित की गई, वह कैंट विधानसभा का अति पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। यहां पिछड़ा, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की उल्लेखनीय आबादी है। समाजवादी पार्टी का पीडीए अभियान भी इन्हीं वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने पर केंद्रित है।
ऐसे में वंशी नगला जैसे क्षेत्र में पंचायत आयोजित करना केवल एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और पीडीए पंचायतें उसी रणनीति की अहम कड़ी हैं।

भाजपा सरकार पर तीखा हमला

अपने संबोधन में राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, किसान परेशान हैं और कानून व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान में विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर वर्ग अब बदलाव चाहता है और समाजवादी पार्टी जनता की उम्मीदों का केंद्र बन रही है।
उन्होंने समाजवादी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े काम हुए थे तथा किसानों और युवाओं के लिए कई योजनाएं लागू की गई थीं।

पीडीए अभियान को बताया सामाजिक न्याय का आंदोलन

राजेश अग्रवाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए अभियान केवल चुनावी अभियान नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और संविधान की मूल भावना को मजबूत करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि पार्टी पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों की आवाज बनकर काम कर रही है तथा जनता के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ने के लिए तैयार है।

संगठन के अन्य नेताओं ने भी साधा भाजपा पर निशाना

कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर उपाध्यक्ष दिनेश यादव ने की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुन रही है और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर कर रही है।


बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सोनकर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ही पीडीए समाज को सम्मानजनक भागीदारी दिलाने और संविधान तथा आरक्षण की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और बूथ-बूथ तक पहुंचने का आह्वान किया।
महानगर महासचिव पंडित दीपक शर्मा ने कहा कि पीडीए पंचायतों के माध्यम से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और जनता को पार्टी की नीतियों से जोड़ा जा रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का संकल्प लिया। राजेश अग्रवाल ने भी कहा कि क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर वह किसी भी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे।

राजेश अग्रवाल की सबसे बड़ी ताकत- अपने दम पर कार्यक्रम

वंशी नगला की पीडीए पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश राजेश अग्रवाल की संगठनात्मक क्षमता रही। हाल के महीनों में उन्होंने कैंट विधानसभा क्षेत्र में लगातार कई जनसंपर्क कार्यक्रम, पीडीए पंचायतें और जनसभाएं आयोजित की हैं।
इन कार्यक्रमों की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इनमें भीड़ जुटाने के लिए किसी बड़े प्रदेश स्तरीय नेता, पूर्व मुख्यमंत्री या राष्ट्रीय पदाधिकारी की मौजूदगी पर निर्भरता दिखाई नहीं दी। अधिकांश कार्यक्रमों में सबसे बड़ा चेहरा स्वयं राजेश अग्रवाल ही रहे।


राजनीतिक हलकों में इसे उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ और संगठन पर मजबूत नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में अपना स्वतंत्र नेटवर्क विकसित किया है।

दावेदारों की भीड़ में अलग बन रही पहचान

कैंट विधानसभा से समाजवादी पार्टी के टिकट के लिए कई नेता सक्रिय हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ भी मानी जाती है। लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राजेश अग्रवाल की कार्यशैली उन्हें अन्य दावेदारों से अलग करती है।
उनकी राजनीति बड़े नेताओं की सभाओं के सहारे नहीं बल्कि लगातार क्षेत्र में मौजूद रहने, छोटे-छोटे कार्यक्रम करने, स्थानीय मुद्दे उठाने और संगठन को सक्रिय रखने पर आधारित दिखाई देती है।


यही कारण है कि उनके कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और वह संगठन के भीतर अपनी दावेदारी को मजबूत करने में सफल नजर आ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण के दौरान संगठनात्मक सक्रियता, जनसंपर्क, क्षेत्र में स्वीकार्यता और कार्यकर्ताओं पर पकड़ जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता रहा है।
ऐसे में लगातार पीडीए पंचायतों का आयोजन, अति पिछड़े इलाकों तक पहुंच, स्थानीय मुद्दों पर मुखरता और अपने दम पर भीड़ जुटाने की क्षमता राजेश अग्रवाल के पक्ष में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा सकती है।
हालांकि टिकट का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से राजेश अग्रवाल पिछले कुछ महीनों से लगातार कैंट विधानसभा में सक्रिय हैं, उससे उन्होंने अपनी दावेदारी को पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत बनाया है।

बूथ से लेकर विधानसभा तक की तैयारी

कार्यक्रम में महानगर उपाध्यक्ष दिनेश यादव, सिंपल कनौजिया, गोविन्द सैनी, पूर्व जिला सचिव मुकेश पांडे, महानगर सचिव हैप्पी यादव, सौरभ यादव, तोष पाल कुर्मी, नीरज सैनी, धर्मेंद्र कश्यप, ओम प्रकाश कश्यप, महेंद्र विक्रम, कुलदीप राणा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राजनीतिक दृष्टि से यह पीडीए पंचायत केवल एक स्थानीय बैठक नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत पार्टी 2027 के चुनाव से काफी पहले बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। वहीं, राजेश अग्रवाल के लिए यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि वह केवल टिकट के दावेदार नहीं, बल्कि अपने दम पर राजनीतिक माहौल बनाने की क्षमता रखने वाले नेता के रूप में भी खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *