नीरज सिसौदिया, बरेली
महंगाई के मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच के जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आवाज उठाई है। चीनी की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत दिलाने के लिए उन्होंने सरकार से राशन की दुकानों के माध्यम से हर माह पांच किलो मुफ्त चीनी उपलब्ध कराने की मांग की है। राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापार मंच के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी की गैरमौजूदगी के कारण एसीएम फर्स्ट निरंजन उपाध्याय को सौंपा। व्यापार मंच ने मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जनहित में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

राजेश अग्रवाल को बरेली कैंट विधानसभा सीट से आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदारों में माना जा रहा है। ऐसे में महंगाई जैसे सीधे आम जनता से जुड़े मुद्दे को लेकर उनकी सक्रियता राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। व्यापार संगठन के पदाधिकारी के रूप में उन्होंने सरकार से गरीब परिवारों के लिए राहत की ठोस व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि चीनी हर परिवार की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है। इसके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। खासतौर पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए लगातार बढ़ती महंगाई के बीच चीनी की कीमत में इजाफा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पैदा कर रहा है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार को महंगाई से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए राशन की दुकानों के माध्यम से हर माह पांच किलो मुफ्त चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे जरूरतमंद परिवारों के घरेलू खर्च का बोझ कम होगा और उन्हें सीधे राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पहले ही रसोई गैस, अनाज, पेट्रोल और डीजल समेत रोजमर्रा की कई आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान है। आय की तुलना में खर्च बढ़ने से परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में चीनी जैसी आवश्यक वस्तु की कीमत बढ़ना आम उपभोक्ता की परेशानी को और बढ़ा रहा है। व्यापारियों ने सरकार से चीनी की कीमतों को लेकर प्रभावी कदम उठाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार को बाजार की स्थिति की लगातार निगरानी करनी चाहिए।
गन्ना किसान और उपभोक्ता दोनों के हित की बात
ज्ञापन में व्यापारियों ने गन्ना किसानों की आय और बाजार में चीनी की कीमत के बीच संतुलन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि एक ओर गन्ना किसानों को उनकी उपज से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि दूसरी ओर उपभोक्ताओं को बाजार में महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले और उपभोक्ता पर भी अनावश्यक बोझ न पड़े।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। किसानों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाकर ही चीनी की कीमत से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
एथेनॉल उत्पादन पर भी उठाए सवाल
व्यापार मंच ने चीनी उत्पादन से जुड़े एथेनॉल के मुद्दे को भी ज्ञापन में उठाया। पदाधिकारियों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन पर अधिक जोर दिए जाने से चीनी की उपलब्धता और उसकी कीमत प्रभावित हो सकती है। सरकार को एथेनॉल उत्पादन की जरूरत और घरेलू बाजार में चीनी की मांग के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
व्यापारियों ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर वाहन स्वामियों की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से जुड़े उपभोक्ताओं के सवालों और व्यावहारिक समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
राजेश अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो व्यापार मंच जनहित में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए आवाज उठाना है।
ज्ञापन देने वालों में जिला महामंत्री फुरकान शम्सी, जिला कोषाध्यक्ष प्रथमेश गुप्ता, महानगर अध्यक्ष सय्यद गोहर अली, महानगर महामंत्री सतीश भसीन और महानगर कोषाध्यक्ष हरिओम अग्रवाल समेत व्यापार मंच के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।




