नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बरेली दौरा सियासी नजरिए से खासा अहम माना जा रहा है। इमरान मसूद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चादर लेकर बरेली पहुंचे और दरगाह आला हजरत पर नवाब मुजाहिद हसन खां के साथ चादर पेश की। धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ इस दौरे में बरेली की सियासत को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई।

इमरान मसूद दरगाह आला हजरत पर चादर पेश करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बरेली कैंट विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट के प्रमुख दावेदार माने जा रहे नवाब मुजाहिद हसन खां के आवास पर भी पहुंचे। यहां दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बरेली की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बातचीत हुई।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सबसे अहम मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठबंधन और सीटों के बंटवारे का रहा। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि अगर कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन होता है तो बरेली जिले की नौ विधानसभा सीटों में से किन सीटों पर कांग्रेस को अपने उम्मीदवार उतारने चाहिए।

पांच सीटों पर कांग्रेस की संभावनाओं का दावा
नवाब मुजाहिद हसन खां ने इमरान मसूद के सामने बरेली जिले की चुनावी स्थिति का अपना आकलन रखा। उन्होंने बताया कि बरेली कैंट, बरेली शहर, नवाबगंज, मीरगंज और आंवला विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है। उनके मुताबिक इन सीटों पर कांग्रेस या तो जीत की स्थिति में पहुंच सकती है या फिर गठबंधन की स्थिति में भाजपा और अन्य दलों को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखती है।
खास तौर पर बरेली कैंट सीट को लेकर कांग्रेस की गतिविधियां पहले से चर्चा में हैं। यहां नवाब मुजाहिद हसन खां को कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में प्रमुख नाम माना जा रहा है। वह इससे पहले भी बरेली कैंट की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और गठबंधन के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर पार्टी संगठन तथा समर्थकों के बीच उनकी मौजूदगी बनी हुई है।
इमरान मसूद और नवाब मुजाहिद हसन के बीच हुई बातचीत को इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर कोई समझौता होता है तो बरेली जिले में कांग्रेस किन सीटों पर अपना दावा पेश करेगी, यह आने वाले समय में गठबंधन की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

गठबंधन की स्थिति में बदल सकता है चुनावी समीकरण
बरेली जिले में विधानसभा की नौ सीटें हैं और प्रत्येक सीट का सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरण अलग है। पिछले चुनावों में भाजपा की मजबूत मौजूदगी के बावजूद विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की संभावना ने चुनावी गणित को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
ऐसे में कांग्रेस का फोकस उन सीटों पर हो सकता है जहां उसका अपना संगठन, परंपरागत समर्थन और स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरे मौजूद हैं। नवाब मुजाहिद हसन की ओर से बताए गए पांच विधानसभा क्षेत्रों को इसी रणनीति के संभावित हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
इमरान मसूद के बरेली दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि धार्मिक कार्यक्रम के साथ उन्होंने स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व से सीधे संवाद किया। राहुल गांधी की चादर लेकर दरगाह आला हजरत पहुंचना कांग्रेस के लिए सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है। वहीं, नवाब मुजाहिद हसन के साथ उनकी मुलाकात ने बरेली की चुनावी राजनीति में कांग्रेस की संभावित सक्रियता को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस के लिए बरेली में जमीन तलाशने का दौर
कांग्रेस पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संभावित राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटी है। बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिले में पार्टी की गतिविधियां बढ़ना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
इमरान मसूद की बरेली यात्रा के दौरान हुई राजनीतिक चर्चा से यह संकेत जरूर मिला है कि कांग्रेस संभावित गठबंधन की स्थिति में केवल सीटों की संख्या के आधार पर समझौता करने के बजाय ऐसी सीटों पर जोर देना चाहती है, जहां उसके उम्मीदवार चुनावी मुकाबले को प्रभावी ढंग से प्रभावित कर सकें।
हालांकि अंतिम रूप से किस दल को कौन सी सीट मिलेगी, यह सपा-कांग्रेस के बीच होने वाली बातचीत और शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल बरेली में इमरान मसूद और नवाब मुजाहिद हसन की मुलाकात ने संभावित गठबंधन की राजनीति के बीच कांग्रेस की सीटों को लेकर नई अटकलों को जरूर हवा दे दी है।

दरगाह आला हजरत पर चादर पेश करने से शुरू हुआ इमरान मसूद का बरेली दौरा महज धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। राहुल गांधी की चादर, आला हजरत की दरगाह, नवाब मुजाहिद हसन से मुलाकात और बरेली की नौ विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण पर चर्चा—इन सभी घटनाक्रमों ने इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि गठबंधन की स्थिति बनने पर कांग्रेस बरेली में कितनी सीटों पर दावा करती है और सपा नेतृत्व इस दावे को किस रूप में स्वीकार करता है।




