नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार डॉ. अनीस बेग इन दिनों सिर्फ चुनावी तैयारियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी उस सामाजिक पहचान को मजबूत करने के लिए भी सक्रिय हैं, जिसमें धर्म की दीवारों से ज्यादा इंसानियत और आपसी सम्मान दिखाई देता है। उर्स-ए-आला हजरत के मौके पर दरगाह-ए-आला हजरत पहुंचकर चादरपोशी और मुल्क में अमन-भाईचारे की दुआ इसी कड़ी का हिस्सा रही। खास बात यह है कि जिस डॉ. अनीस बेग की तस्वीर उर्स में चादर चढ़ाते हुए सामने आती है, वही सावन में कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करते, फल बांटते और भंडारा कराते भी नजर आते हैं। ईस्टर पर चर्च पहुंचना हो या गुरु पर्व पर नगर कीर्तन का स्वागत—उनकी सार्वजनिक सक्रियता का यह दायरा उन्हें कैंट की सियासत में एक खास सामाजिक संदेश देने वाला दावेदार बनाता है।
उर्स-ए-आला हजरत के मुबारक मौके पर डॉ. अनीस बेग ने दरगाह-ए-आला हजरत पहुंचकर अकीदत पेश की। उन्होंने मजार-ए-मुबारक पर चादर और गुलाब के फूल चढ़ाए तथा देश में अमन, भाईचारे, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की। दरगाह परिसर में मौजूद बड़ी संख्या में जायरीनों और अकीदतमंदों के बीच उन्होंने उर्स की मुबारकबाद भी दी।
लेकिन इस तस्वीर को केवल धार्मिक आस्था के एक कार्यक्रम के तौर पर देखना डॉ. अनीस बेग की मौजूदा राजनीतिक यात्रा की पूरी तस्वीर नहीं देता। कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की टिकट की दौड़ में मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे डॉ. बेग की गतिविधियों को देखें तो धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं दिखाई देती। उनकी कोशिश एक ऐसी सार्वजनिक पहचान बनाने की है, जिसमें बरेली के अलग-अलग धर्मों और सामाजिक वर्गों के साथ संवाद की जगह हो।
दरगाह की चौखट से उठी दुआ का मतलब
दरगाह पर चादरपोशी के बाद डॉ. अनीस बेग ने आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी की शिक्षाओं को इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द से जोड़ते हुए कहा कि उनका संदेश समाज में अमन और इंसाफ की भावना को मजबूत करने वाला है।
उनके लिए उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बरेली की पहचान का हिस्सा भी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जायरीनों का बरेली पहुंचना और यहां से अमन और मोहब्बत का संदेश लेकर लौटना शहर की उस साझा संस्कृति को सामने लाता है, जिसे गंगा-जमुनी तहजीब कहा जाता है।
डॉ. बेग की चादरपोशी इसलिए भी राजनीतिक नजरिए से देखी जा रही है क्योंकि कैंट विधानसभा क्षेत्र में 2027 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में किसी संभावित प्रत्याशी की धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में मौजूदगी उसके जनसंपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
लेकिन डॉ. बेग की कहानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

सावन में बदल जाती है तस्वीर, भावना नहीं
उर्स की चादरपोशी के कुछ ही समय बाद सावन का माहौल आता है। सड़कों पर कांवड़िए दिखाई देते हैं और इसी दौरान डॉ. अनीस बेग की सामाजिक सक्रियता का दूसरा पक्ष सामने आता है।
वह हर साल सावन में कांवड़ियों की सेवा करते हैं। पुष्प वर्षा, फल वितरण और भंडारे के जरिए शिवभक्तों का स्वागत उनकी गतिविधियों का हिस्सा रहा है। इस बार रविवार और सोमवार को कांवड़ियों के लिए फल वितरण किया जाएगा, जबकि 16 अगस्त, रविवार को शिवभक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
डॉ. बेग का कहना है कि सावन के हर सोमवार को कांवड़ियों की सेवा की परंपरा वह निभाते आ रहे हैं और आगे भी इसे जारी रखेंगे।
यही वह बिंदु है जहां उनकी सामाजिक सक्रियता का अर्थ थोड़ा गहरा हो जाता है।
दरगाह पर चादर चढ़ाने वाला व्यक्ति जब कांवड़ियों के बीच खड़ा होकर फल बांटता है तो यह महज दो अलग-अलग धार्मिक आयोजनों में भागीदारी नहीं रह जाती। यह उस सोच की तस्वीर बनती है जिसमें अपनी आस्था के साथ दूसरे की आस्था के सम्मान को भी जगह दी जाती है।
ईस्टर पर चर्च, गुरु पर्व पर नगर कीर्तन
डॉ. अनीस बेग की सर्वधर्म सम्मान की छवि सिर्फ हिंदू-मुस्लिम आयोजनों तक सीमित नहीं है। ईस्टर के मौके पर उनकी चर्च में मौजूदगी और ईसाई समुदाय के लोगों के साथ पर्व की खुशियां साझा करना भी उनकी सामाजिक सक्रियता का हिस्सा रहा है।
इसी तरह गुरु पर्व के अवसर पर सिख समुदाय के नगर कीर्तन का स्वागत करने में भी वह आगे रहे हैं।
होली और दीपावली पर भी उनके कार्यक्रमों में अलग तस्वीर दिखाई देती है। वह लोगों के बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं।
यानी उनके सार्वजनिक जीवन की तस्वीर में धार्मिक पहचानें अलग-अलग हैं, लेकिन उनके साथ खड़े होने की कोशिश एक जैसी दिखाई देती है।
यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें केवल मुस्लिम समाज के नेता के रूप में नहीं, बल्कि सर्वधर्म और सर्वसमाज के बीच अपनी जगह बनाने वाले नेता के तौर पर पेश करते हैं।

कैंट की सियासत में क्यों महत्वपूर्ण है यह छवि?
कैंट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता शुरू हो चुकी है। डॉ. अनीस बेग भी समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में उनकी कोशिश केवल पार्टी संगठन के भीतर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने की भी है।
राजनीतिक तौर पर देखें तो यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव में टिकट मिलने के बाद अचानक जनसंपर्क शुरू करने के बजाय पहले से सामाजिक रिश्ते मजबूत करने वाले दावेदार को स्वाभाविक बढ़त मिल सकती है।
डॉ. बेग की गतिविधियों में यही निरंतरता दिखाई देती है। वह धार्मिक पर्वों को केवल शुभकामना देने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि कई मौकों पर स्वयं कार्यक्रमों में पहुंचकर सहभागिता करते हैं।
हालांकि यह भी सच है कि किसी धार्मिक या सामाजिक आयोजन में मौजूदगी अपने आप चुनावी समर्थन में तब्दील नहीं होती। चुनाव में टिकट, संगठन, स्थानीय समीकरण, व्यक्तिगत नेटवर्क और मतदाताओं का भरोसा—सभी की भूमिका होती है। लेकिन राजनीतिक दावेदारी के दौर में किसी नेता की सामाजिक स्वीकार्यता जरूर महत्वपूर्ण पूंजी बन सकती है।

अस्पताल से समाज तक सेवा की छाप
डॉ. अनीस बेग की पहचान केवल राजनीतिक नेता के रूप में नहीं है। वह अनीस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड फहमी IVF सेंटर के निदेशक भी हैं। चिकित्सा के पेशे से जुड़े होने के कारण सेवा उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शायद इसी वजह से धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी भी केवल राजनीतिक मंच तक सीमित दिखाई नहीं देती। अस्पताल में मरीज की पहचान उसके धर्म से नहीं होती। वहां बीमारी और इलाज प्राथमिकता होते हैं। इसी तरह सामाजिक जीवन में भी उनकी कोशिश अलग-अलग समुदायों के बीच दूरी के बजाय संवाद की तस्वीर पेश करने की है। उनके समर्थक इसी पहलू को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हैं।

उनका कहना है कि डॉ. अनीस बेग हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समाज को अलग-अलग खांचों में देखने के बजाय एक ही सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा मानते हैं। इसलिए उनके लिए ईद और उर्स की खुशियां जितनी महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही होली, दीपावली, सावन, गुरु पर्व और ईस्टर की खुशियां भी।
सियासत में कितना बदलेगा यह सामाजिक संदेश?
बरेली की राजनीति में धर्म और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसी नेता का सार्वजनिक रूप से सर्वधर्म सम्मान का संदेश देना अपने आप में राजनीतिक महत्व रखता है।
डॉ. अनीस बेग की चुनौती अब यह है कि वह इस सामाजिक छवि को कैंट विधानसभा क्षेत्र में कितनी व्यापक राजनीतिक स्वीकार्यता में बदल पाते हैं। समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट की दौड़ में कई दावेदार हैं और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है। लेकिन डॉ. बेग ने अपनी दावेदारी के साथ एक अलग नैरेटिव जरूर खड़ा किया है।

वह नैरेटिव सिर्फ यह नहीं है कि वह चुनाव लड़ना चाहते हैं। बल्कि यह है कि कैंट की राजनीति में ऐसी आवाज होनी चाहिए जो अपने धर्म में आस्था रखते हुए दूसरे धर्म की आस्था का भी उतना ही सम्मान करे।
उर्स-ए-आला हजरत में उनकी चादरपोशी इसी नैरेटिव की एक तस्वीर है। इसके साथ सावन में कांवड़ियों की सेवा, ईस्टर पर चर्च में मौजूदगी और गुरु पर्व पर नगर कीर्तन का स्वागत जोड़ दें तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है।
यह वही बरेली है जिसकी पहचान गंगा-जमुनी तहजीब से की जाती है। यहां धार्मिक विविधता कोई नई चीज नहीं, बल्कि शहर के सामाजिक जीवन की पुरानी धारा है। डॉ. अनीस बेग इसी धारा को अपनी राजनीतिक पहचान से जोड़ने की कोशिश करते नजर आते हैं।
दरगाह की चौखट पर उनके हाथों में चादर थी, सावन में कांवड़ियों के लिए हाथों में फल होंगे और 16 अगस्त को शिवभक्तों के लिए भंडारे की तैयारी होगी। धर्म अलग हैं, आस्थाएं अलग हैं, रस्में अलग हैं—लेकिन संदेश एक है।
सम्मान का अधिकार हर आस्था को है और समाज की खूबसूरती तभी है जब हर आस्था के लिए दिल में जगह हो।
अब देखना यह होगा कि बरेली कैंट की 2027 की सियासत में डॉ. अनीस बेग की यह सर्वधर्म और सर्वसमाज वाली छवि उन्हें समाजवादी पार्टी के टिकट की दौड़ में कितनी मजबूती देती है और चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिलने पर यह सामाजिक जुड़ाव कितनी बड़ी राजनीतिक ताकत में बदलता है।




