यूपी

बरेली पुलिस ने भी स्वीकारी मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन समारोह में अव्यवस्था की बात, महिला की मौत की बात भी कही, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं, क्या शासन के आदेश का इंतजार कर रहा है बरेली का पुलिस प्रशासन, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव बोले, बहुत बेईमान मेयर है, तुरंत जेल भेज देना चाहिए, आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल भी आएगा बरेली, आखिर कौन बचा रहा है उमेश गौतम और उनके बेटे को?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली
रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पहले 27 अगस्त को बरेली क्लब के मेला ग्राउंड में बरेली के मेयर उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ गौतम की ओर से आयोजित रक्षाबंधन समारोह में धक्का-मुक्की और अव्यवस्था की बात आखिरकार बरेली पुलिस ने स्वीकार कर ली है, साथ ही एक महिला की मौत की बात भी कही है। लेकिन अब तक न तो मेयर और उनके बेटे के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की गई है और न ही कोई कार्रवाई की गई है। इस बीच लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उमेश गौतम को बहुत बेईमान मेयर बताते हुए कहा कि ऐसे मेयर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उसे तुरंत जेल भेज देना चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि उमेश गौतम और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई करने से पुलिस प्रशासन को कौन रोक रहा है? क्या बरेली के पुलिस प्रशासन को इस मामले में कार्रवाई करने के लिए शासन के आदेशों का इंतजार है? आखिर कौन है जो पर्दे के पीछे रहकर उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ को बचा रहा है?

इंडिया टाइम 24 को बरेली पुलिस की ओर से दिया गया जवाब।

बता दें कि इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम (indiatime24.com) लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है। इस संबंध में जब बरेली पुलिस को एक्स पर एक पोस्ट किया गया तो जवाब में उन्होंने कहा, ‘बरेली क्लब में आयोजित रक्षाबंधन संबंधित कार्यक्रम के दौरान भीड़ होने से महिलाओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हुई थी। पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर पर्याप्त पुलिस बल के साथ स्थिति को नियंत्रित किया गया तथा कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इस संबंध में एक महिला की मृत्यु के संबंध में जानकारी सोशल मीडिया आदि के माध्यम से प्राप्त हुई। महिला के परिजनों से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ कि उनके द्वारा महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। परिजनों द्वारा कोई तहरीर अभी तक नहीं दी गई है।’ बरेली पुलिस ने तो महिला की मौत की बात स्वीकार कर ली है लेकिन मेयर उमेश गौतम ने अभी भी यह बात स्वीकार नहीं की है।

वहीं, यह मामला उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव तक भी पहुंच गया है। इस पर शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में जब अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जिस तरह विपक्ष पर कार्रवाई होती है, पुलिस तैयार रहती है, बुलडोजर तैयार रहता है उसी तरह इस मेयर के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मेयर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करके उसे तुरंत जेल भेज देना चाहिए। बहुत बेईमान मेयर है यह।’
उधर, भगदड़ में मृत महिला की भाभी लता तोमर ने मीडिया से बातचीत के दौरान मृतका मधु सिंह तोमर के पुत्र को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाभी तो चली गई लेकिन हम सरकार से मांग करते हैं कि मेरे भतीजे को सरकारी नौकरी दी जाए जो अभी पढ़ाई कर रहा है।

मृतका मधु की भाभी लता तोमर।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सबकुछ जानने और मानने के बाद भी पुलिस प्रशासन उमेश गौतम और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? आखिर कौन है वो चेहरा जो पर्दे के पीछे से उमेश गौतम को बचाने में लगा हुआ है?कानून-व्यवस्था के जिस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी की सत्ता पर काबिज हुए थे, बरेली में उसकी खुलेआम धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं? क्या बरेली का पुलिस प्रशासन इस संबंध में कार्रवाई के लिए शासन के आदेशों का इंतजार कर रहा है?
बहरहाल, इस घटना और इस पर पुलिस प्रशासन के रवैये ने पूरे बरेली को देशभर में शर्मसार कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब कानून किसी के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाएगा तो इंसाफ कैसे मिलेगा?

आज बरेली आएगा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन समारोह में हुई भगदड़ के मामले में रविवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बरेली आ रहा है। स्थानीय नेताओं में वरिष्ठ कांग्रेस नेता नवाब मुजाहिद हसन खां, प्रेमप्रकाश अग्रवाल और अन्य नेता शामिल होंगे।

सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं, व्यवस्था की परीक्षा भी

रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और सामाजिक पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं का पहुंचना स्वाभाविक था। ऐसे आयोजन में भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकासी, आपात स्थिति के लिए मेडिकल व्यवस्था तथा पर्याप्त पुलिस बल की जिम्मेदारी आयोजकों और प्रशासन दोनों की होती है।

अगर पुलिस के मुताबिक भीड़ के कारण महिलाओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और बाद में एक महिला की मौत की सूचना मिली, तो यह केवल भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बनकर नहीं रहना चाहिए। यह जांच का विषय है कि आखिर आयोजन में व्यवस्थाएं कैसी थीं और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।

अब निगाहें बरेली पुलिस प्रशासन और शासन पर हैं। पुलिस के आधिकारिक जवाब के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब घटना की जानकारी सामने आ चुकी है तो कार्रवाई कब होगी और किसके खिलाफ होगी? क्या जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी या मामला राजनीतिक प्रभाव के चलते ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

फिलहाल अखिलेश यादव के बयान ने इस मामले को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। दूसरी ओर, मृतका के परिवार की सरकारी नौकरी की मांग ने इसे संवेदनशील मानवीय मुद्दा भी बना दिया है। ऐसे में अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *