नीरज सिसौदिया, बरेली
संसद के बजट सत्र का पहला चरण समाप्त होते ही उत्तर प्रदेश की सियासत में संगठनात्मक बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में बरेली जिले में समाजवादी पार्टी के नए जिला अध्यक्ष को लेकर हलचल बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सोमवार से इस विषय पर गंभीर मंथन शुरू हो सकता है और आने वाले कुछ हफ्तों में नए जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा भी संभव मानी जा रही है। संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तहत इस बार पार्टी नेतृत्व जातीय संतुलन, जमीनी पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता- तीनों पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहता है।
बरेली की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वह है सपा के महानगर सचिव महेंद्र सिंह लोधी। पहली बार लोधी समाज से किसी मजबूत चेहरे ने खुलकर जिला अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। बताया जा रहा है कि उनकी सक्रियता और संगठन में लगातार काम करने की वजह से उनका नाम अब गंभीर दावेदारों की सूची में शामिल कर लिया गया है। लोधी समाज के कई स्थानीय संगठन भी उनके समर्थन में सामने आए हैं, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बरेली जिले में लोधी समाज का वोट कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। खासतौर पर मीरगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यह वोट बैंक चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। अब तक यह वर्ग भाजपा का पारंपरिक समर्थक माना जाता रहा है और समाजवादी पार्टी इस वोट में बड़ी सेंध नहीं लगा पाई है। ऐसे में यदि पार्टी इस बार लोधी समाज से जिला अध्यक्ष बनाती है तो इसे एक बड़े राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जाएगा, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
सूत्र बताते हैं कि जिला अध्यक्ष पद के लिए केवल एक-दो नहीं बल्कि कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। संभावित दावेदारों में पूर्व सांसद और पूर्व जिला अध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव, शुभलेश यादव, राजकुमार पाल, अरविंद यादव, संजीव यादव और कमल साहू समेत कई अन्य नेताओं के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। अभी यह सूची अंतिम नहीं है और पार्टी स्तर पर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह पूरी सूची जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व, खासकर अखिलेश यादव के सामने रखी जाएगी, जिसके बाद अंतिम फैसला होगा।
इस बार चयन प्रक्रिया में केवल जातीय समीकरण ही नहीं बल्कि संगठनात्मक योगदान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के अंदर चल रही एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में किस नेता ने कितना योगदान दिया, यह भी देखा जा रहा है। जिन नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने में भूमिका निभाई है, उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना बताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि जिला अध्यक्ष ऐसा हो जो सिर्फ नाम का पदाधिकारी न होकर चुनावी मशीनरी को जमीनी स्तर पर खड़ा कर सके।
घोषणा के समय को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ पार्टी सूत्रों का कहना है कि होली तक इंतजार करना पड़ सकता है ताकि संगठनात्मक कामकाज और चल रही प्रक्रियाएं प्रभावित न हों। वहीं दूसरी ओर कुछ जानकार मानते हैं कि घोषणा इससे पहले भी हो सकती है, क्योंकि संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होना है और पार्टी नेतृत्व उससे पहले संगठनात्मक ढांचा स्पष्ट कर देना चाहता है। इससे लोकसभा और भविष्य के विधानसभा चुनावों की तैयारी को गति मिलेगी।
बरेली जिले की सियासत में जिला अध्यक्ष का पद हमेशा से बेहद अहम माना जाता रहा है। यही पद संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सेतु का काम करता है और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए इस बार पार्टी नेतृत्व कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता और हर पहलू पर गहराई से विचार किया जा रहा है। स्थानीय नेताओं से लेकर क्षेत्रीय प्रभारियों तक से रिपोर्ट ली जा रही है ताकि ऐसा चेहरा चुना जाए जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस बार सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नया चेहरा सामने आता है तो इससे पार्टी को ग्रामीण क्षेत्रों में नई ऊर्जा मिल सकती है। खासतौर पर उन सीटों पर जहां पार्टी पिछले चुनावों में कमजोर रही थी, वहां संगठन को मजबूत करने में जिला अध्यक्ष की भूमिका निर्णायक होगी। इसी कारण बरेली का यह संगठनात्मक फैसला केवल एक पद की नियुक्ति नहीं बल्कि आने वाली बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल बरेली की सियासत में चर्चा का बाजार गर्म है और कार्यकर्ता भी उत्सुकता से नए जिला अध्यक्ष के नाम का इंतजार कर रहे हैं। सोमवार से शुरू होने वाले मंथन के बाद तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व अनुभव पर दांव लगाता है या सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देता है। इतना जरूर है कि नए जिला अध्यक्ष की घोषणा होते ही जिले की सियासी दिशा तय होने लगेगी और आने वाले चुनावों की तैयारी भी उसी के साथ तेज हो जाएगी।





