नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। बरेली जिले की 126 आंवला विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर हलचल बढ़ती जा रही है, लेकिन इस दौड़ में जिस नेता की सक्रियता सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह हैं डॉक्टर जीराज सिंह यादव। गांव-गांव जाकर लगातार पीडीए पंचायत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के चलते उनकी दावेदारी अब सबसे मजबूत मानी जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आंवला विधानसभा क्षेत्र में इस समय जितना व्यापक जनसंपर्क अभियान डॉ. जीराज यादव चला रहे हैं, उतना समाजवादी पार्टी का कोई दूसरा दावेदार नहीं कर पा रहा। खास बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे आरके शर्मा इस बार राजनीतिक मैदान में लगभग निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय समीकरणों के बीच डॉ. जीराज यादव तेजी से अपनी मजबूत पकड़ बनाते दिखाई दे रहे हैं।
शनिवार को भी डॉ. जीराज यादव ने एक दिन में छह ग्राम पंचायतों में पहुंचकर पीडीए पंचायतों का आयोजन किया। उन्होंने धरमपुर, सुकटिया, गुलरिया, अरिल, बिहारीपुर, पृथ्वीपुर और पट्टी गांवों में पंचायतों और बैठकों के जरिए लोगों से सीधा संवाद किया। इन बैठकों में उन्होंने समाजवादी पार्टी की नीतियों, पिछली सरकार की योजनाओं और मिशन 2027 की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

आंवला विधानसभा क्षेत्र में डॉ. जीराज यादव जिस तरह लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं, उसे उनकी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। वे सिर्फ सभाएं नहीं कर रहे, बल्कि छोटे समूहों में बैठकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उनका संपर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में केवल बड़े कार्यक्रमों से ज्यादा असर बूथ और गांव स्तर की सक्रियता का होता है। यही वजह है कि डॉ. जीराज यादव का लगातार गांवों में जाना उन्हें दूसरे दावेदारों से अलग पहचान दे रहा है। समाजवादी पार्टी इस समय पूरे प्रदेश में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। आंवला में भी डॉ. जीराज यादव इसी फॉर्मूले को जमीन पर उतारने की कोशिश में जुटे हैं।
गांवों में आयोजित पंचायतों के दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय, भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका फोकस यादव, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों को एकजुट कर सपा के पक्ष में माहौल बनाने पर दिखाई दे रहा है।
डॉ. जीराज यादव के लगातार सक्रिय रहने का असर पार्टी कार्यकर्ताओं पर भी दिखाई दे रहा है। पंचायतों में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हो रहे हैं। कई जगहों पर ग्रामीणों ने खुलकर 2027 में उन्हें समाजवादी पार्टी से टिकट दिए जाने की मांग भी उठाई।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के स्थानीय संगठन के भीतर भी यह संदेश जा रहा है कि जो नेता अभी से मैदान में मेहनत करेगा, टिकट की दौड़ में वही आगे रहेगा। यही कारण है कि डॉ. जीराज यादव की सक्रियता को संगठन में गंभीरता से देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे आरके शर्मा इस बार क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रहे। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा लगातार हो रही है कि जिस समय अन्य संभावित दावेदारों को जनता के बीच होना चाहिए, उस समय उनकी मौजूदगी लगभग गायब है।
इसी खाली जगह को डॉ. जीराज यादव तेजी से भरते दिखाई दे रहे हैं। लगातार दौरे, पंचायतें और संगठनात्मक सक्रियता ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत विकल्प बना दिया है। स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो टिकट की दौड़ में उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।

डॉ. जीराज यादव अपने हर कार्यक्रम में मिशन 2027 का जिक्र कर रहे हैं। वे ग्रामीणों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाला चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण बदलने का चुनाव होगा।
उनकी सभाओं में समाजवादी पार्टी की पुरानी योजनाओं- जैसे समाजवादी पेंशन, लैपटॉप योजना, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इससे पार्टी के पुराने वोट बैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
आंवला विधानसभा सीट को समाजवादी पार्टी इस बार गंभीरता से ले रही है। पार्टी नेतृत्व जानता है कि बरेली और आसपास के इलाकों में मजबूत संगठनात्मक पकड़ के बिना चुनावी लड़ाई आसान नहीं होगी। ऐसे में जो नेता अभी से क्षेत्र में मजबूत नेटवर्क तैयार करेगा, उसे स्वाभाविक बढ़त मिलेगी।

डॉ. जीराज यादव की सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि वह केवल टिकट की दावेदारी नहीं कर रहे, बल्कि अभी से चुनावी जमीन तैयार करने में जुटे हैं। यही वजह है कि उनकी सभाओं और पंचायतों को अब स्थानीय राजनीति में गंभीरता से देखा जाने लगा है।
आंवला क्षेत्र की राजनीति हमेशा जातीय और स्थानीय समीकरणों से प्रभावित रही है। यहां गांव स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाला नेता ही चुनाव में बढ़त हासिल कर पाता है। डॉ. जीराज यादव की रणनीति भी इसी आधार पर दिखाई दे रही है।

वे सीधे गांवों में पहुंचकर लोगों के बीच समय बिता रहे हैं। इससे उनकी छवि एक ऐसे नेता की बन रही है, जो चुनाव आने का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि लगातार जनता के बीच मौजूद है।
फिलहाल आंवला विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर अंतिम फैसला भले भविष्य में होना हो, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में डॉ. जीराज यादव की सक्रियता और जनसंपर्क अभियान ने उन्हें सबसे मजबूत दावेदारों की कतार में सबसे आगे ला खड़ा किया है।




