नियम विरुद्ध नरेंद्र मौर्य और कन्हैया राजपूत को भाजपा मंडल अध्यक्ष बनाने की तैयारी में आका, एक है ओवरएज तो दूसरा लगातार दो कार्यकाल कर चुका है पूरा, कश्यप का चयन लगभग तय, कल लखनऊ की बैठक में होगा अंतिम फैसला
नीरज सिसौदिया, बरेली
भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक चुनाव अब मंडल अध्यक्ष के चरण को पार करने की राह पर हैं। शुक्रवार को प्रदेश भर के मंडल अध्यक्षों के नामों पर अंतिम मुहर लग जाएगी। इसके लिए शुक्रवार को लखनऊ में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला स्तर के चुनाव पदाधिकारी भाग लेंगे। इसके बाद 22 दिसम्बर तक मंडल अध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। उसके बाद महानगर और जिला अध्यक्ष के चुनाव पर फोकस रहेगा।
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस बार मंडल अध्यक्ष के चयन के लिए कुछ नियम तय किए हैं। इनमें दो प्रमुख नियम यह हैं कि मंडल अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ वही नेता योग्य माने जाएंगे जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक न हो। वहीं, जो नेता लगातार दो बार मंडल अध्यक्ष रह चुका है वह भी इस पद के योग्य नहीं माना जाएगा। संगठन के नियम के अनुसार जो नेता वर्ष 2019 से लगातार मंडल अध्यक्ष है उसके कार्यकाल को भी दो बार का कार्यकाल माना जाएगा और ऐसे नेता मंडल अध्यक्ष पद के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद बरेली के ऐसे दो नेताओं को पार्टी में बैठे उनके आकाओं ने न सिर्फ आवेदन कराया है बल्कि उन्हें मंडल अध्यक्ष बनाने के लिए पूरी ताकत भी झोंक दी है।
इनमें पहला नाम मढ़ीनाथ के मौजूदा मंडल अध्यक्ष नरेंद्र मौर्य का है और दूसरा चेहरा दीनदयाल मंडल अध्यक्ष कन्हैया राजपूत का है।
नरेंद्र मौर्य पिछले विधानसभा चुनाव में कैंट विधायक संजीव अग्रवाल के गुट का हिस्सा रहे। सूत्र बताते हैं कि विगत चुनाव में उन्होंने पार्टी से दगाबाजी की और समाजवादी पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी का अंदरखाने साथ देने का प्रयास भी किया। इसके बाद संजीव अग्रवाल ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। ऐसे में नरेंद्र मौर्य संजीव अग्रवाल के धुर विरोधी मेयर उमेश गौतम के खेमे में पहुंच गए। अब नरेंद्र मौर्य मंडल अध्यक्ष पद के लिए ओवरएज हो चुके हैं। लेकिन उनके नए आका उन्हें नियम विरुद्ध मंडल अध्यक्ष बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। अगर आका कामयाब हो गए तो यह उनकी बड़ी जीत मानी जाएगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो नरेंद्र मौर्य का राजनीतिक भविष्य तो संकट में पड़ेगा ही, उनके राजनीतिक आका की भी फजीहत हो जाएगी।
इसी तरह कन्हैया राजपूत वर्ष 2019 से लगातार मंडल अध्यक्ष हैं। इसलिए नियमानुसार तो वह आवेदन ही नहीं कर सकते थे। वह भी मेयर उमेश गौतम के गुट के बताए जाते हैं।
इनके अलावा हरमिलाप मंडल एक ऐसा मंडल है जहां के मौजूदा अध्यक्ष राजीव कश्यप का रिपीट होना लगभग तय माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि कश्यप को इसी साल मंडल अध्यक्ष बनाया गया था।
इसके अलावा महानगर के नौ मंडलों में से एक मंडल की कमान इस बार किसी महिला को भी सौंपी जा सकती है। ऐसा इसलिए है कि इस बार भाजपा का जोर महिलाओं पर ज्यादा है। क्योंकि महाराष्ट्र चुनाव में लाडकी बहिन ने ही उसे जीत दिलाई और झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की मैया सम्मान योजना की वजह से उसे शिकस्त झेलनी पड़ी। ऐसे में अब ज्यादा फोकस महिलाओं पर ही रहेगा।
बहरहाल, मंडल अध्यक्षों के नामों की घोषणा 22 दिसम्बर तक कर दी जाएगी।
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