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विजयपाल सिंह के जाटव सम्मेलन पर सियासी घमासान: 400 रुपये देकर दिहाड़ी पर जुटाई गई भीड़, सिर्फ 40-50 जाटव पहुंचे, सपा नेता सरवर खान का बड़ा दावा

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नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विजयपाल सिंह की ओर से आयोजित जाटव सम्मेलन अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। सम्मेलन के कुछ दिन बाद ही समाजवादी पार्टी के युवा नेता एवं बीडीसी सदस्य सरवर खान ने सम्मेलन की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कई बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि तीन जुलाई को आयोजित यह सम्मेलन पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ और भीड़ जुटाने के लिए लोगों को चार-चार सौ रुपये देकर बुलाया गया। हालांकि, दूसरी ओर विजयपाल सिंह अपने सम्मेलन को पूरी तरह सफल बता चुके हैं। ऐसे में सम्मेलन को लेकर सपा के भीतर ही दो अलग-अलग दावे सामने आने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सरवर खान ने आरोप लगाया कि विजयपाल सिंह ने जाटव समाज में अपनी स्वीकार्यता दिखाने के उद्देश्य से सम्मेलन आयोजित किया था, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत रही। उनका कहना है कि जिस सम्मेलन को जाटव समाज की ताकत का प्रदर्शन बताया गया, उसमें जाटव समाज के केवल 40 से 50 लोग ही मौजूद थे, जबकि अधिकांश भीड़ मुस्लिम समुदाय और अन्य जातियों के लोगों की थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने पर आयोजकों ने लोगों को दिहाड़ी मजदूरों की तरह चार-चार सौ रुपये देकर बुलाया। सरवर खान का कहना है कि इसके बावजूद सम्मेलन स्थल पर उम्मीद के अनुरूप भीड़ नहीं पहुंच सकी। उन्होंने कहा कि यदि किसी सम्मेलन की सफलता दिखाने के लिए पैसे देकर भीड़ जुटानी पड़े तो इससे उसकी वास्तविक लोकप्रियता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

‘भीड़ जुटाने के लिए भोजन का भी सहारा लिया गया’

सरवर खान ने दावा किया कि सम्मेलन में अधिक से अधिक लोगों को लाने के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था की गई थी। उनका कहना है कि आयोजकों को उम्मीद थी कि भोजन के आकर्षण से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन सुबह 11 बजे शुरू होना था, लेकिन भीड़ कम होने के कारण कार्यक्रम लगभग दो बजे शुरू किया गया। इस दौरान आयोजकों ने लोगों को रोके रखने की भरसक कोशिश की, लेकिन जब लोग लगातार कार्यक्रम स्थल से जाने लगे तो भोजन पहले ही शुरू करवा दिया गया। सरवर खान के अनुसार, भोजन करने के बाद आधे से अधिक लोग कार्यक्रम समाप्त होने से पहले ही वापस चले गए, जिससे सम्मेलन स्थल पर मौजूद लोगों की संख्या और कम हो गई।

‘बड़े नेताओं ने भी देर से की आमद’

सरवर खान ने यह भी दावा किया कि सम्मेलन में भीड़ नहीं जुट पाने के कारण पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आगमन भी काफी देर से हुआ। उनका कहना है कि जब तक पर्याप्त संख्या में लोग नहीं पहुंचे, तब तक प्रमुख नेताओं ने कार्यक्रम में आने से परहेज किया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि सम्मेलन अपेक्षित माहौल बनाने में सफल नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि यदि सम्मेलन वास्तव में सफल होता और बड़ी संख्या में लोग पहले से मौजूद होते तो कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर शुरू हो जाता तथा वरिष्ठ नेताओं को भी देर से आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

‘हाईकमान को गुमराह करने की कोशिश’

सरवर खान ने विजयपाल सिंह पर पार्टी नेतृत्व को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद जिस तरह बड़ी संख्या में जाटव समाज के लोगों के शामिल होने का दावा किया गया, वह वास्तविकता से कोसों दूर है।

उनका कहना है कि विजयपाल सिंह लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में उनका राजनीतिक जनाधार काफी कमजोर हो चुका है। ऐसे में वह पार्टी हाईकमान के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत दिखाने के लिए इस तरह के सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं।

सरवर खान ने कहा कि यदि किसी नेता को अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के लिए अपनी ही जाति का अलग से सम्मेलन आयोजित करना पड़े, तो यह स्वयं इस बात का संकेत है कि उसका जनाधार पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सम्मेलन के जरिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जिला संगठन की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया गया ताकि आगामी राजनीतिक समीकरणों में स्वयं को मजबूत दावेदार के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

सरवर खान के आरोपों ने फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट की संभावित दावेदारी को लेकर पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में नेताओं के बीच बयानबाजी भी लगातार बढ़ती जा रही है।

अब सम्मेलन को लेकर दोनों नेताओं के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। एक ओर विजयपाल सिंह इसे सफल आयोजन बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरवर खान इसे पूरी तरह फ्लॉप बताते हुए भीड़ जुटाने के लिए पैसे बांटने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

फिलहाल इतना तय है कि जाटव सम्मेलन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद फरीदपुर की सियासत में आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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