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हाउस टैक्स की लड़ाई में फिर कूदे राजेश अग्रवाल, नगर निगम की मनमानी के खिलाफ रंग लाया आंदोलन, मानी गईं मांगें, जानिये क्या-क्या लाभ मिलेगा आपको?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
लगभग चार माह तक हाउस टैक्स की लड़ाई लड़ने और नगर निगम की ओर से भेजे गए बिलों की तमाम गड़बड़ियों को उजागर करने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ पार्षद और शहर विधानसभा सीट से पूर्व उम्मीदवार राजेश अग्रवाल एक बार फिर जनहित के लिए हाउस टैक्स की लड़ाई में कूद पड़े हैं। इस बार मुद्दा स्व कर फॉर्म न जमा कर इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देने के विरोध का है। जनहित की इस लड़ाई में राजेश अग्रवाल को सैकड़ों करदाताओं का साथ मिला और नगर निगम की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद राजेश अग्रवाल ने मेयर उमेश गौतम और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी प्रदीप कुमार मिश्रा से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा।


राजेश अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम विगत 27 अक्टूबर से स्व कर के फॉर्म जमा नहीं कर रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि विगत 28 अक्टूबर तक जीआईएस सर्वे के उपरांत करदाताओं की संपत्ति की मैचिंग नहीं हो पाई है। वो लोग आज भी नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। जनता को बिल भी वितरित नहीं हुए हैं। इसके कारण लोग अपना हाउस टैक्स जमा नहीं कर पा रहे हैं। अत: करदाताओं का नगर निगम अधिनियम और संपत्ति कर नियमावली के तहत जो अधिकार है, उस स्व कर के फॉर्म जमा करने की तिथि विगत 31 अक्टूबर को समाप्त करके इस नियमावली की हत्या न की जाए और स्व कर फॉर्म पूर्ववत जमा किए जाएं।


इसके अलावा राजेश अग्रवाल ने खाली पड़े व्यावसायिक भवनों पर नियम विरुद्ध टैक्स लगाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खाली पड़े व्यावसायिक भवनों पर नगर निगम नियम विरुद्ध टैक्स लगा रहा है, जबकि भविष्य में भवन में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने पर किस गुणांक में टैक्स लगाया जाएगा, यह न तो नगर निगम जानता है और न ही भवन स्वामी। ऐसे में गलत एआरवी निर्धारण कर गृह कर कैसे लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की है कि खाली भवनों पर पूर्व वर्षों की भांति गृह कर न लगाया जाए।
साथ ही राजेश अग्रवाल ने यह भी मांग उठाई है कि बोर्ड बैठक के आदेशानुसार अग्रिम कर जमा करने वाले करदाताओं को नवम्बर में साढ़े सात प्रतिशत और दिसम्बर में पांच प्रतिशत छूट प्रदान की जाए।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को संबोधित ज्ञापन में राजेश अग्रवाल ने उक्त तीन मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर अमल करने का अनुरोध किया है।
विरोध प्रदर्शन में करदाताओं के साथ व्यापारी भी थे।
राजेश अग्रवाल ने मांग की स्वकर के फॉर्म नगर निगम को तब तक स्वीकार करने चाहिए जब तक नगर निगम अपनी गलतियो को सही न कर ले और लोगों को बिल न बांट दे।
आखिरकार राजेश अग्रवाल की मेहनत एक बार फिर रंग लाई। काफी चर्चा के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि स्व कर के फॉर्म अब 31 दिसम्बर तक नगर निगम जमा करेगा।
राजेश अग्रवाल ने उन भवनो पर भी चर्चा की जो किराए पर नहीं नहीं उठे हैं लेकिन नगर निगम उन पर ग्रह पर लगा रहा है।
चर्चा उपरांत महापौर ने कहा कि ऐसे सभी भवन स्वामी नगर निगम को लिखित में दें ताकि उनके घरों पर कर आरोपित न हो।
पार्षद राजेश अग्रवाल ने ऐतराज़ जताया कि निर्माणाधीन पर भी नगर निगम कर आरोपित कर रहा है जो कतई बर्दाश्त नहीं होगा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने विश्वास दिलाया कि इस प्रकार की गलती में सुधार किया जाएगा।
व्यापारियों ने समस्या बताई की कई महीने पूर्व उन्होंने स्वकर के फॉर्म जमा किए थे नगर निगम ने खो दिए और उनके बिलों का सुधार नहीं किया।
प्रदर्शन करने वालों में राजीव मोहन, अमृतपाल सिंह, सुरेंद्र सोनकर, संजीव मल्होत्रा, सैयद गौहर अली, पंकज श्रीवास्तव, राज नारायण, सुधीर गुप्ता, मोहम्मद नईम, सुधीर राजपूत, तनुज शर्मा, सुधीर अग्रवाल, अरुण शर्मा, अरविंद अग्रवाल, शिवनाथ चौबे, राजेश भाटिया, किशन मेहता, संजीव चौहान, अवधेश दुबे, श्याम यादव, रोहित राजपूत, संजय गुप्ता, संजीव अरोड़ा, गुलाम गौस, श्रीभगवान, दीपक राठौड़, भूषण, विजय चंद्र, अजीत अग्रवाल, डॉ सत्येंद्र, संजय, नरेश विश्वकर्मा आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

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