नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी में बरेली जिला अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस पद के प्रबल दावेदार महेंद्र सिंह लोधी राजपूत ने रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात को बरेली की राजनीति में एक अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जिला अध्यक्ष पद को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है।
इस मुलाकात के दौरान एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। शाहजहांपुर के लोधी समाज के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके स्वर्गीय राममूर्ति वर्मा के परिवार की तीन बेटियों ने समाजवादी पार्टी में वापसी की। यह वापसी सिर्फ एक पारिवारिक फैसला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे लोधी समाज के बीच सपा की पकड़ मजबूत होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राममूर्ति वर्मा का नाम लोधी समाज में लंबे समय से सम्मान के साथ लिया जाता रहा है, इसलिए उनके परिवार का सपा के साथ जुड़ना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। खास तौर पर तब जबकि राममूर्ति वर्मा के पुत्र और पुत्रवधु भाजपा में हैं।

इससे पहले पीलीभीत में भी बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला था। वहां के लोधी समाज के प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने भी समाजवादी पार्टी में वापसी की थी। हेमराज वर्मा का प्रभाव पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों में काफी मजबूत माना जाता है। उनके सपा में लौटने से पार्टी को उस इलाके में नई ताकत मिलने की चर्चा शुरू हो गई थी। अब शाहजहांपुर और पीलीभीत, दोनों जिलों के बड़े लोधी परिवारों के सपा से जुड़ने के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी लोधी समाज के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
महेंद्र सिंह लोधी राजपूत ने बताया कि वह काफी समय से लोधी समाज के प्रमुख नेताओं से संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि वह लोधी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर मोहर सिंह लोधी और अन्य सामाजिक नेताओं के साथ मिलकर समाज को समाजवादी पार्टी से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, पहले वे हेमराज वर्मा से मिले और उनसे सपा में वापसी का आग्रह किया। कुछ ही दिनों बाद हेमराज वर्मा ने पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया। इसी तरह उन्होंने राममूर्ति वर्मा के परिवार से भी संपर्क किया और उनसे सपा में वापसी का अनुरोध किया, जिसके बाद तीनों बेटियों ने पार्टी में वापसी कर ली।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम महज संयोग नहीं है। इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखाई दे रही है। बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर जैसे जिलों में लोधी समाज का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में अगर यह समाज एकजुट होकर किसी एक दल के साथ खड़ा होता है, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। समाजवादी पार्टी इसी संभावना को मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान लोधी समाज के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया गया कि पार्टी तीनों जिलों में समाज को उचित भागीदारी देगी। इसका मतलब यह माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में टिकट वितरण और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लोधी समाज को महत्व दिया जा सकता है। इससे समाज के बीच यह संदेश जाएगा कि सपा उन्हें राजनीतिक रूप से सम्मान और अवसर देने के लिए तैयार है।
इन सभी घटनाओं के बीच महेंद्र सिंह लोधी राजपूत की दावेदारी भी मजबूत होती दिखाई दे रही है। जिस तरह उन्होंने समाज के बड़े नेताओं को एक साथ लाने की पहल की और उन्हें सपा से जोड़ा, उससे उनकी संगठनात्मक क्षमता की चर्चा बढ़ी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिला अध्यक्ष पद की घोषणा होली के तुरंत बाद की जा सकती है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बरेली की राजनीति के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में लोधी समाज के बड़े नेताओं की सपा में वापसी से पार्टी को नई ऊर्जा मिली है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिला अध्यक्ष पद की कमान किसे सौंपी जाती है और पार्टी इस नई सामाजिक मजबूती को चुनावी लाभ में कैसे बदलती है।





