नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आह्वान पर आज उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सपा द्वारा वीरांगना फूलन देवी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किए ख़ास बात यह रही कि यह कार्यक्रम ख़ास तौर पर पिछड़े वर्ग के आबादी वाले इलाकों में आयोजित किए गए।
इसी कड़ी में आज बरेली महानगर समाजवादी पार्टी द्वारा सुभाष नगर क्षेत्र के श्री रामलीला स्थल में महानगर उपाध्यक्ष समयुन खान, महानगर सचिव इजराफील खान व पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष आदित्य कश्यप के संयोजन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान सपा नेताओं द्वारा स्व. फूलन देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन करते हुए जीवन पर प्रकाश डालने हेतु एक गोष्ठी का आयोजन महानगर अध्यक्ष शमीम खाँ सुल्तानी की अध्यक्षता में आहूत हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप मौजूद रहे, वहीं कार्यक्रम का संचालन महासचिव पंडित दीपक शर्मा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए महानगर अध्यक्ष शमीम सुल्तानी ने कहा सामंतवादियों के अमानवीय अन्याय और अत्याचार के खिलाफ मुखर होकर बड़ी लड़ाई लड़ने वाली मर्दानी थीं फूलन देवी, उन्होंने न केवल अपने ऊपर बल्कि अपने पूरे समाज के ऊपर होनें वाले जातिवादी लोगों के अत्याचार से दुःखी होकर विद्रोह का रास्ता चुना, उन्हें गरीबों का रॉबिन हुड कहा जाता था वे एक ऐसी भारतीय महिला थीं जिन्होंने अपने जीवन में असाधारण परिस्थितियों का सामना किया और सामाजिक अन्याय के खिलाफ विद्रोह की मिसाल कायम की। उनका जीवन गरीबी, शोषण, बदले की भावना और अंततः राजनीतिक सक्रियता की कहानी है।

इस मौके कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप ने कहा स्व.फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के गोरहा का पुरवा गाँव में एक गरीब मल्लाह (निषाद) परिवार में हुआ था। उनके पिता देवी दीन छोटे-मोटे काम करके परिवार का गुजारा करते थे। परिवार के पास केवल एक एकड़ जमीन थी, जिसके लिए उनके चाचा के साथ विवाद चलता था। फूलन ने कम उम्र में ही इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके लिए उन्हें परिवार और समाज से प्रताड़ना झेलनी पड़ी। 11 साल की उम्र में उनकी शादी एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति, पुत्तीलाल मल्लाह, से कर दी गई, जो उनसे तीन गुना बड़ा था। इस शादी में फूलन को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, ससुराल और मायके में प्रताड़ना के बाद फूलन देवी जी का जीवन और कठिन हो गया। दबंग आताताईयों द्वारा उनके साथ सामूहिक बलात्कार कई दिन तक कर उन्हें पूरे गाँव के सामने नग्न अवस्था में घुमाया और जुल्म की इंतहा कर दी।
ऐसे जघन्य अपराध के खिलाफ उन्हें मजबूरी में बंदूक का सहारा लेना पड़ा, और वह चंबल की ओर रुख कर गई। निचली जातियों और दलित समुदायों के बीच, उन्हें सामाजिक अन्याय के खिलाफ एक प्रतीक के रूप में मानते थे। बेहमई नरसंहार के बाद फूलन दो साल तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहीं। 1983 में, इंदिरा गांधी जी की अपील पर, फूलन ने मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।

कार्यक्रम की संयोजक महानगर उपाध्यक्ष समयुन खान ने कहा स्व.फूलन देवी कई वर्षों तक जेल में रहीं फ़िर 1994 में, मुलायम सिंह यादव जी की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी की सरकार ने उनके खिलाफ सभी आरोप वापस ले लिए, और फूलन देवी जी को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद, फूलन देवी जी ने समाजवादी पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ा और दो बार सांसद बनीं। उन्होंने दलितों और निचली जातियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनकी लोकप्रियता और बेबाक स्वभाव ने उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। 25 जुलाई 2001 को, दिल्ली में अपने सरकारी आवास के बाहर, फूलन देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इस अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद डॉ अनीस बेग ने कहा फूलन देवी जी की कहानी आज भी भारत में सामाजिक और जातिगत अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। कुछ लोग उन्हें एक क्रूर डकैत मानते हैं, जबकि अन्य उन्हें दलितों और महिलाओं के लिए एक नारीवादी और सामाजिक योद्धा के रूप में देखते हैं। टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया की सबसे महान महिला विद्रोहियों की सूची में चौथा स्थान दिया था।

संचालन करते हुए महासचिव पंडित दीपक शर्मा ने कहा उनकी आत्मकथा, “आई, फूलन देवी: द ऑटोबायोग्राफी ऑफ इंडियाज बैंडिट क्वीन,” उनके दर्द और संघर्ष की कहानी को बयान करती है। फूलन देवी जी का जीवन एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसने अन्याय के खिलाफ हथियार उठाए, फिर संसद में कमजोरों की मजबूत आवाज बनी जिसकी क़ीमत अंत में अपने जीवन से चुकाई। उनकी कहानी न केवल व्यक्तिगत साहस की मिसाल है, बल्कि सामाजिक सुधार की आवश्यकता को भी दर्शाती है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में महानगर उपाध्यक्ष गणों में राजेश मौर्या, दिनेश यादव, सिम्पल कन्नौजिया, सूरज यादव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख आदेश यादव गुड्डू, बाबा साहब वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सोनकर व महासचिव रणवीर सिंह, सचिव गणों में इसराफील खाँ राश्मी, नाजिम कुरैशी, ब्रजेश श्रीवास्तव, द्रोण कश्यप, हिमांशी शर्मा, विशाल कश्यप, कांशी राम भारती व जितेंद्र मुंडे, डॉ. चाँद तथा पूर्व पार्षद डालचंद वाल्मीकि व अब्दुल ज़ब्बार, युवा पदाधिकारियों में हिमांशु सोनकर, रेहान अंसारी, संजीव कश्यप, सनी कश्यप, आशा कश्यप, आदित्य कश्यप, संत राम कश्यप, ओम पाल कश्यप, जयंती कश्यप, तंजीन फातिमा, राजेश्वरी यादव, सरदार परमिन्दर सिंह, दीपक कश्यप, हरिओम कश्यप आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।





