नीरज सिसौदिया, बरेली
जब इबादत का महीना दिलों को नरम करता है, जब रोज़ों की पाकीज़गी इंसान को इंसान के और करीब लाती है और जब समाज को सबसे ज़्यादा मोहब्बत की ज़रूरत होती है—ऐसे वक्त में अगर कोई आगे बढ़कर दिलों को जोड़ने का काम करे, तो वह सिर्फ एक आयोजन नहीं करता, बल्कि समाज को नई दिशा देता है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार डॉ. अनीस बेग एक बार फिर उसी परंपरा को निभाने जा रहे हैं, जिसकी पहचान आज बरेली ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में बन चुकी है।
आगामी 22 मार्च को आईएमए लॉन, डोहरा रोड पर आयोजित होने वाला जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि वह एहसास बनेगा, जहां होली के रंग दुआओं में घुलेंगे और ईद की मिठास इंसानियत के स्वाद में बदल जाएगी। यह वही मंच होगा, जहां मजहब की दीवारें गिरेंगी और दिलों के बीच की दूरियां मिटेंगी।

इन दिनों रमजान का पाक महीना चल रहा है। माह-ए-रमजान इबादत, सब्र और आत्मशुद्धि का महीना माना जाता है। ऐसे पवित्र माह में जब लोग खुदा की इबादत में मशगूल रहते हैं, उसी इबादत के महीने के ठीक बाद मोहब्बत का पैगाम देने वाला यह शानदार आयोजन होने जा रहा है, जो अपने आप में सामाजिक सौहार्द और इंसानियत की एक मिसाल बनेगा।
डॉ. अनीस बेग का मानना है कि इबादत का असली मतलब सिर्फ नमाज़, रोज़ा या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका असली मकसद दिलों को जोड़ना है। उनके लिए यह आयोजन राजनीति का मंच नहीं, बल्कि इंसानियत का पैगाम देने का ज़रिया है। यही वजह है कि उनके कार्यक्रमों में न कोई दीवार होती है और न कोई भेदभाव—सिर्फ इंसान और इंसान के बीच मोहब्बत का रिश्ता होता है।
सबसे अहम बात यह है कि जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह को एक साथ मनाने की यह परंपरा खुद डॉ. अनीस बेग ने ही शुरू की थी। बरेली में पिछले साल संभवतः पहली बार उन्होंने ही ऐसा आयोजन कराया था, जब होली और ईद को एक ही मंच पर जोड़कर भाईचारे का संदेश दिया गया। उस समय यह पहल नई सोच के रूप में देखी गई थी, लेकिन बहुत जल्दी यह प्रयोग पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।
उस पहले आयोजन की गूंज सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी धूम पूरे प्रदेश तक सुनाई दी। हर तरफ यही चर्चा हुई कि बरेली में एक ऐसा नेता सामने आया है, जो त्योहारों को राजनीति से ऊपर उठाकर इंसानियत से जोड़ रहा है। इसी पहल ने डॉ. अनीस बेग को एक नई परंपरा का प्रवर्तक बना दिया। आज वह केवल इस परंपरा को निभा नहीं रहे, बल्कि उसे आगे बढ़ा रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम कर रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें अब केवल आयोजक नहीं, बल्कि परंपरा के वाहक के रूप में भी देखा जाने लगा है।
पिछले वर्ष आयोजित जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया कि बरेली की मिट्टी में आज भी गंगा-जमुनी तहजीब सांस लेती है। उन आयोजनों में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया, सेवइयां बांटी और मंच से सिर्फ एक ही आवाज़ उठी—नफरत छोड़ो, मोहब्बत अपनाओ।
डॉ. अनीस बेग का मानना है कि समाज की असली ताकत आपसी भाईचारे में है। जब लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शरीक होते हैं, तब दिलों की दूरियां अपने आप मिट जाती हैं। इसी सोच के साथ वह हर साल यह आयोजन करते हैं, ताकि यह याद दिलाया जा सके कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक ही होती है।
इस बार के आयोजन को और भी यादगार बनाने के लिए सांस्कृतिक रंग भी भरे जाएंगे। कार्यक्रम में बॉलीवुड स्टार और मशहूर सूफी गायक सलमान अली अपनी मनमोहक प्रस्तुति देंगे। उनकी सूफियाना गायकी जब मंच से गूंजेगी, तो माहौल सिर्फ उत्सव का नहीं रहेगा, बल्कि वह रूहानी एहसास में बदल जाएगा।
डॉ. अनीस बेग का कहना है कि संगीत वह ज़ुबान है, जिसे हर दिल समझता है। बिना मजहब और बिना भेदभाव के संगीत सीधे आत्मा तक पहुंचता है। ऐसे में सलमान अली की आवाज़ इस जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह को और ज्यादा असरदार बना देगी।
डॉ. अनीस बेग को बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि एक सामाजिक व्यक्तित्व के रूप में भी जाना जाता है। जरूरतमंदों की मदद हो, धार्मिक आयोजन हों या सामाजिक कार्यक्रम—हर मौके पर उनकी मौजूदगी यह बताती है कि वह जनता से सिर्फ वोट का रिश्ता नहीं रखते, बल्कि दिल का रिश्ता रखते हैं। उनका मानना है कि नेता वही सफल होता है, जो जनता के सुख-दुख में खड़ा दिखाई दे।
बरेली कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार के रूप में उनकी पहचान लगातार मजबूत हो रही है। उनकी राजनीति का आधार भाषण नहीं, बल्कि व्यवहार है। जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह जैसे आयोजन यह साबित करते हैं कि वह समाज को तोड़ने की नहीं, बल्कि जोड़ने की राजनीति करते हैं। यही कारण है कि युवा उन्हें नई सोच का प्रतीक मानते हैं, बुजुर्ग उन्हें परंपराओं से जुड़ा नेता समझते हैं और बच्चे उन्हें अपने त्योहारों में शामिल होने वाला अपना सा व्यक्ति मानते हैं।
22 मार्च को आईएमए लॉन, दोहरा रोड पर सजने वाली यह महफिल केवल एक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि मोहब्बत का उत्सव होगी। वहां गुलाल भी होगा, सेवइयां भी होंगी, दुआएं भी होंगी और इंसानियत की बातें भी होंगी। यह दिन सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की यादों में बस जाने वाला एहसास बनेगा।
इबादत के महीने में मोहब्बत का पैगाम लेकर एक बार फिर डॉ. अनीस बेग यह साबित करने जा रहे हैं कि राजनीति का सबसे खूबसूरत चेहरा वही होता है, जो दिलों को जोड़ दे। जिस परंपरा की उन्होंने शुरुआत की थी, उसी परंपरा को आज वह पूरे सम्मान और मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
जश्न-ए-ईद और होली मिलन समारोह उनके लिए केवल आयोजन नहीं, बल्कि एक मिशन है—मिशन, इंसानियत को जिंदा रखने का; मिशन, गंगा-जमुनी तहजीब को आने वाली नस्लों तक पहुंचाने का।
गंगा-जमुनी तहजीब के तरानों के साथ, सलमान अली की सूफियाना आवाज़ में और डॉ. अनीस बेग की सोच में—यह आयोजन बरेली को एक बार फिर याद दिलाएगा कि रंग अलग हो सकते हैं, लेकिन दिलों का रंग एक ही होता है।





