नीरज सिसौदिया, बरेली ‘मस्जिदों पर जान दी, कुर्बां शिवालों पर हुए कितने काले तजुरबे उजली किताबों पर हुए’ किसी शायर का ये शेर हिन्दुस्तान में बीते कई दशकों के दौरान हुए सांप्रदायिक भेदभाव और हिंसा के दर्द की अनकही दास्तान बयां करता है। आज भी साम्प्रदायिकता की ये आग कई प्रदेशों में दिलों की दूरियां […]

