पंजाब

मॉडल टाउन की जंग में जीत की हैट्रिक लगाने के बाद चौका मारने उतरी ‘आयरन लेडी’, विरोधियों के होश उड़े, आम आदमी पार्टी ने राज्यपाल से पुरस्कृत अरुणा अरोड़ा को उतारा मैदान में

Share now

नीरज सिसौदिया, जालंधर
कोरोना काल में अपने मजबूत इरादों और दिन-रात की मेहनत के दम पर ‘आयरन लेडी’ (हार्ड वर्किंग वुमन) का तमगा हासिल करने वाली राज्यपाल से पुरस्कृत वार्ड 33 की पार्षद अरुणा अरोड़ा एक बार फिर चुनावी समर में उतर चुकी हैं। जीत की हैट्रिक लगाने वाली अरुणा को जीत का चौका मारने का पूरा भरोसा है। ये भरोसा इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि उनके विरोधी चेहरे हर चुनाव में बदलते रहे लेकिन उन्हें कोई भी मात नहीं दे सका। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि अरुणा अरोड़ा एक मंझे हुए सियासतदान स्वर्गीय मनोज अरोड़ा की पत्नी होने के बावजूद कभी भी स्टेपनी बनकर नहीं रहीं। अपने काम और मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। वह उन महिला पार्षदों में कभी नहीं रहीं जो सिर्फ नाम की पार्षद रहती हैं और सारा काम उनके पति देखते हैं।

कोरोना काल में सफाई करती अरुणा अरोड़ा।

कोरोना काल इसका सबसे बेहतर उदाहरण है। इस दौर में जहां दुनिया भर की मांएं अपने बच्चों को घर से बाहर कदम तक रखने नहीं दे रही थीं उस दौर में अरुणा अरोड़ा ने अपने इकलौते बेटे को भी वार्ड के लोगों की सेवा में लगा दिया था और खुद भी दिन-रात सैनेटाइजेशन से लेकर जरूरतमंदों के लिए भोजन तक की पूरी व्यवस्था वह खुद ही करती थीं। एक तरफ घर में बीमार पति की सेवा और दूसरी तरफ एक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं था लेकिन अरुणा अरोड़ा दोनों ही पैमानों पर खरी उतरीं। उनके इसी जज्बे को दुनिया ने सलाम किया और खुद राज्यपाल ने उन्हें कर्मठ महिला के पुरस्कार से नवाजा।


अरुणा अरोड़ा ने अपने लगभग 15 वर्षों के कार्यकाल में वार्ड की सूरत ही बदल दी। पार्कों के जीर्णोद्धार से लेकर स्वच्छता की सारी उम्मीदों को उन्होंने पूरा किया। उन्होंने अपने वार्ड में लगभग 12 करोड़ रुपए से भी अधिक के विकास कार्य करवाए हैं। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो अरुणा अरोड़ा ने अपने राजनीतिक कौशल से अपने वार्ड का कोई काम रुकने नहीं दिया।

इसके अलावा स्वच्छता के लिए उन्हें तीन बार पुरस्कृत किया गया। सबसे पहले वर्ष 2017, फिर 2020, फिर 2021 और फिर 2023 में उन्हें स्वच्छता के लिए पुरस्कृत किया गया। उनकी मेहनत और सौम्य स्वभाव का ही असर रहा कि अरुणा अरोड़ा के विरोधी दल उम्मीदवार बदलते रहे लेकिन जीत हमेशा अरुणा अरोड़ा की ही हुई। अब एक बार फिर चुनावी रण में उतरी अरुणा अरोड़ा की राह बेहद आसान नजर आती है।
बहरहाल, अरुणा अरोड़ा अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुकी हैं और 21 दिसम्बर को होने वाले चुनाव में उनकी राह काफी आसान प्रतीत होती है।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *