नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भोजीपुरा विधानसभा सीट पर जीत का परचम लहराने वाले समाजवादी पार्टी के विधायक शहजिल इस्लाम की सल्तनत इस बार खतरे में पड़ती नजर आ रही है। एक तरफ तो विपक्ष में होने की वजह से शहजिल इस्लाम पिछले विधानसभा चुनाव में किए गए बड़े-बड़े वादे पूरे नहीं कर सके हैं तो वहीं दूसरी ओर मीरगंज के सुल्तान बेग ने इस बार भोजीपुरा का रुख कर लिया है। उस पर संभावना जताई जा रही है कि इस बार बहुजन समाज पार्टी से जाने-माने कारोबारी यूसुफ जरीवाला भोजीपुरा के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो शहजिल इस्लाम की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
दरअसल, शहजिल इस्लाम से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव नाराज बताए जा रहे हैं। ये नाराजगी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग से जुड़ी है। आरोप है कि शहजिल इस्लाम ने अपने आर्थिक साम्राज्य को बाबा के बुलडोजर से बचाने के लिए ऐसा किया था। इसके बाद वह आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी इंद्रेश कुमार से भी मिलने गए थे। जिसकी तस्वीर भी खूब वायरल हुई थी। कहा यह भी जा रहा है कि शहजिल इस्लाम ने खुद ही इस मुलाकात की तस्वीर को वायरल करवाया था ताकि भाजपा के उनके विरोधी यह समझ लें कि उनकी पहुंच आरएसएस तक है।

इंद्रेश कुमार आरएसएस के मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। कहा यह भी जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले शहजिल इस्लाम आरएसएस के मुस्लिम अनुषांगिक संगठन के रास्ते भाजपा में भी शामिल हो सकते हैं। वैसे भी बहोरनलाल मौर्य के एमएलसी बनने के बाद यह सीट खाली हो चुकी है और भाजपा भी अब चाहती है कि मुस्लिम नेता भी उसके साथ जुड़े। पसमांदा महाज और राष्ट्रीय मुस्लिम मंच जैसे संगठन इसी का प्रमाण हैं। इंद्रेश कुमार तो इफ्तार पार्टी तक में शामिल हो चुके हैं जिनके वीडियो भी जारी हो चुके हैं। शहजिल के भाजपा प्रेम और चुनावों में क्रॉस वोटिंग से अखिलेश यादव नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कभी इस नाराजगी को जाहिर नहीं होने दिया लेकिन सुल्तान बेग ने जैसे ही भोजीपुरा का रुख किया, इन चर्चाओं को और मजबूती मिली।
दरअसल, सुल्तान बेग लगातार भोजीपुरा विधानसभा सीट पर ताबड़तोड़ कार्यक्रम और बैठकें कर रहे हैं। पार्टी के विधानसभा सीट अध्यक्ष भी सुल्तान बेग की बैठकों में शामिल हो रहे हैं। अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित एक बैठक में बरेली के सभी बड़े-छोटे नेताओं के सामने सुल्तान बेग को स्पष्ट रूप से कह दिया था कि तुम भोजीपुरा से दूर रहो। इसके बावजूद सुल्तान बेग का भोजीपुरा में वोट बनवाना, पीडीए पंचायतें और जनसंपर्क करना यह संकेत दे रहा है कि कहीं न कहीं पार्टी सुुप्रीमो का भी उन्हें अंदरखाने समर्थन प्राप्त है। वरना राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेश का खुला उल्लंघन करने की हिम्मत जुटाना सुल्तान बेग के लिए आसान नहीं है। राजनीतिक जानकार भी यही मान रहे हैं कि सुल्तान बेग को शहजिल इस्लाम के विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा है। संगठन को इसलिए भी मजबूती दी जा रही है ताकि शहजिल को किनारे करने का कोई विपरीत असर पार्टी पर न पड़े।
दूसरे पहलू से देखें तो भी सुल्तान बेग शहजिल इस्लाम का खेल बिगाड़ते नजर आते हैं। सुल्तान बेग इतने सक्षम हैं कि वह अपने दम पर अपनी बिरादरी और दूसरी बिरादरी के मुस्लिम वोटों पर सेंधमारी कर सकें। सूत्र बताते हैं कि सुल्तान बेग टिकट न मिलने की सूरत में निर्दलीय भी लड़ सकते हैं। ऐसा हुआ तो शहजिल इस्लाम का खेल उसी तरह एक बार फिर चौपट हो जाएगा जिस तरह वर्ष 2017 के चुनाव में सुल्तान बेग के भाई सुलेमान बेग के बसपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने से हुआ था। तब शहजिल इस्लाम को हार का सामना करना पड़ा था।
एक और संभावना यह भी जताई जा रही है कि बसपा इस बार भोजीपुरा से किसी मुस्लिम चेहरे को उतारकर मुस्लिम- दलित समीकरण तैयार करना चाहती है। ऐसे में पहला नाम कारोबारी यूसुफ जरीवाला का सामने आ रहा है। साथ ही चर्चा यह भी है कि सुल्तान बेग भी सपा का टिकट न मिलने पर बसपा से चुनाव लड़ सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो बसपा के दलित वोट और सुल्तान बेग के मुस्लिम वोट मिलकर भोजीपुरा सीट जीत भी सकते हैं। क्योंकि दलितों का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी बसपा में आस्था रखता है।
बहरहाल, भोजीपुरा का चुनावी दंगल इस बार बेहद दिलचस्प होने जा रहा है।




