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बरेली से चुन-चुन कर निकाले जाएंगे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक, पहचान करने के लिए अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा प्रशासन, मंडलायुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को दिए अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने के निर्देश

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नीरज सिसौदिया, बरेली

बरेली मंडल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर प्रशासन ने एक व्यापक और सख्त अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। यह कदम सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार के उन निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिनमें प्रदेश भर में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों को चिन्हित कर उन्हें वापस भेजने की बात कही गई है। बरेली मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी जिलाधिकारियों को अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने का निर्देश जारी किया है। इन केंद्रों में उन लोगों को रखा जाएगा जिन पर रोहिंग्या या बांग्लादेशी होने का संदेह होगा और जिनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच पूरी होने में समय लगेगा।
मंडलायुक्त के अनुसार सरकार की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि कई बांग्लादेशी नागरिक खुद को असम या पश्चिम बंगाल का निवासी बताकर बरेली और आसपास के जिलों में रह रहे हैं। वे ईंट भट्टों, छोटी फैक्ट्रियों और अन्य श्रमिक आधारित व्यवसायों में काम कर रहे हैं। इनमें से कई के पास भारतीय दस्तावेज भी पाए गए हैं, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी बोली, उच्चारण और हाव-भाव से यह शक जाहिर हो रहा है कि वे स्थानीय नहीं हैं। मंडलायुक्त चौधरी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर त्रिपुरा से भाषा विशेषज्ञ बुलाए जाएंगे ताकि पहचान में आसानी हो सके, जबकि स्थानीय स्तर पर बंगाली भाषा बोलने वाले निवासी भी प्रशासन की मदद करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान बड़े पैमाने पर और पूरी सावधानी के साथ चलाया जाएगा ताकि किसी निर्दोष को परेशान न किया जाए, लेकिन किसी अवैध प्रवासी को भी छोड़ा न जाए।
बरेली जिले में प्रशासन और पुलिस ने इस अभियान का प्रारंभिक काम पहले ही शुरू कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के पास नकली आधार कार्ड, फर्जी वोटर आईडी या किसी भी प्रकार का फर्जी दस्तावेज मिलने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह केवल पहचान का मामला नहीं होगा, बल्कि यह एक आपराधिक मामला माना जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में पहले भी ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ है। हाल ही में जून में पुलिस ने दो महीने लंबा अभियान चलाया था जिसमें झुग्गी-झोपड़ियों और खानाबदोश बस्तियों की गहन जांच की गई थी। उस समय पुलिस ने दस से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध तरीके से रहने की पुष्टि की थी। इन लोगों के पास विभिन्न पहचान पत्र भी मिले थे, जिनका उपयोग वे स्थानीय नागरिक बनकर कर रहे थे।
अगस्त में भी प्रेमनगर थाना क्षेत्र में बांग्लादेशी मूल की तीन बहनों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वे फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी दस्तावेज और भारतीय नागरिकता का लाभ उठाने की कोशिश कर रही थीं। एक अन्य मामले में एक बांग्लादेशी नागरिक को भी नकली पहचान के साथ पकड़ा गया। इन मामलों के सामने आने के बाद से प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए निर्देशों में यह साफ कहा गया है कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाए। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को यह भी कहा गया है कि जिनकी पहचान में शक हो और जांच में समय लगे, उन्हें अस्थायी हिरासत केंद्रों में रखा जाए ताकि वे जांच के दौरान गायब न हो जाएं।
अस्थायी हिरासत केंद्र बनाना इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बरेली मंडल में इन केंद्रों के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिलाधिकारियों को इस काम के लिए जगह चिन्हित करने, सुरक्षा व्यवस्था करने और आवश्यक सुविधाएं तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हिरासत केंद्रों में किसी तरह की अव्यवस्था न हो, और वहां रखे जाने वाले लोगों की पहचान, भाषा जांच और दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से पूरा किया जा सके। प्रशासन इस बात को लेकर भी सक्रिय है कि इन केंद्रों में बिना पर्याप्त कारण किसी भी व्यक्ति को न रखा जाए, और मानवाधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए।
प्रशासन का मानना है कि यह अभियान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के अनुसार अवैध रूप से रह रहे लोगों के कारण स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है, अपराध की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं और यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है। इसलिए अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेजी से लागू किया जा रहा है।
बरेली के स्थानीय निवासी भी इस अभियान को लेकर जागरूक किए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें अपने आसपास किसी ऐसे व्यक्ति पर संदेह हो, जो गैर-कानूनी तरीके से रह रहा हो या जिसके दस्तावेज संदिग्ध लगते हों, तो इसकी जानकारी पुलिस या प्रशासन को दें। अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस अभियान के दौरान किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न किया जाए और जांच पूरी तरह से तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित हो।
बरेली मंडल का यह कदम अब पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल बन सकता है। सरकारी स्तर पर जिस तेजी और सख्ती के साथ कदम उठाए जा रहे हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा। अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया में बरेली प्रशासन अब निर्णायक और सक्रिय भूमिका निभाने जा रहा है।

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