यूपी

ऑन ड्यूटी जान गंवाने वाले बीएलओ के अनाथ बच्चों की हरसंभव मदद करेगी सपा, महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी और जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप ने मासूमों से की मुलाकात, पार्टी मुख्यालय को भेजी रिपोर्ट, डीएम के समक्ष भी उठाया मुद्दा

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नीरज सिसौदिया, बरेली
भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र के परधौली गांव में ड्यूटी के दौरान बीएलओ सर्वेश गंगवार (45) की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत ने जिले में गहरा आक्रोश और शोक पैदा कर दिया है। परिवार के अनुसार यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि SIR कार्य के अत्यधिक दबाव, सर्वर की समस्या और लगातार रात-दिन के काम का परिणाम है। मृतक के करीबियों ने बताया कि पिछले दो महीने पहले उनकी पत्नी का निधन हुआ था, जिसके बाद दो छोटे बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी। ऐसे में लगातार बढ़ते SIR दबाव ने उनके तनाव को और बढ़ा दिया था।
परिवार का कहना है कि दिनभर वह भोजीपुरा के परधौली गांव में SIR कार्य में लगे रहते और रातभर सर्वर डाउन होने की वजह से फार्म अपलोड करते रहते। बावजूद इसके, टारगेट पूरा करने का जबरन दबाव उन पर बना हुआ था। लगातार मानसिक और शारीरिक बोझ के बीच ड्यूटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक ने उनकी जान ले ली।
घटना की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप और अन्य पार्टी नेता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि यह मौत सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि “प्रशासनिक दबाव की त्रासदी” है।


अगले दिन सुबह भी शमीम खां सुल्तानी और शिवचरण कश्यप मृतक के घर पहुंचे और परिवार से विस्तार से बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सपा परिवार पूरी तरह उनके साथ खड़ा रहेगा।
शमीम खां सुल्तानी ने बताया कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने प्रदेश में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले बूथ स्तरीय अधिकारियों के परिजनों को 2–2 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसी के तहत पूरे प्रदेश से ऐसे मामलों की जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा, “हमने बरेली में जान गंवाने वाले बीएलओ सर्वेश गंगवार का पूरा विवरण पार्टी मुख्यालय भेज दिया है। 29 नवंबर को इस संबंध में लखनऊ बुलाया गया है।”
महानगर अध्यक्ष सुल्तानी ने बताया कि उन्होंने गुरुवार को जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में सर्वेश गंगवार की मौत का मुद्दा विशेष रूप से उठाया।उन्होंने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर मौजूद सुपरवाइजर और एआरपी ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी थीं।
उनके अनुसार- “जब कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान मौत के कगार पर था, तब जिन लोगों को सहायता करनी चाहिए थी, वे बिल्कुल असंवेदनशील बने रहे। यह बेहद निंदनीय है।”

सुल्तानी ने जिलाधिकारी से इनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने बताया कि सर्वेश गंगवार की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति बेहद कमजोर है। पत्नी की दो महीने पहले मृत्यु हो चुकी थी और अब घर में दो मासूम बच्चे अकेले रह गए हैं। उन्होंने कहा, “हम इस परिवार को अकेला नहीं छोड़ेंगे। सपा संगठन हरसंभव मदद करेगा और न्याय दिलाने के लिए साथ खड़ा रहेगा।”
सर्वेश गंगवार की मौत ने एक बार फिर SIR जैसे तकनीकी और प्रशासनिक अभियानों में कर्मचारियों पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव, सर्वर समस्याओं और अव्यवस्थित कार्यशैली को उजागर कर दिया है। परिवार का दर्द, गांव का शोक और नेताओं की प्रतिक्रिया- सब मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि इस व्यवस्था को बदले बिना ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं। देश के कई राज्यों में अत्यधिक बोझ के कारण बीएलओ की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं।

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