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फरीदपुर से जयप्रकाश भास्कर का चुनावी शंखनाद: 2027 की सियासत में नए समीकरणों का संकेत, अब त्रिकोणीय होगी फरीदपुर की चुनावी जंग

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नीरज सिसौदिया, बरेली

नए साल की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की हलचल तेज होती दिखने लगी है। इसी कड़ी में सर्व जन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित यूपी विधानसभा चुनाव के लिए फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी बिगुल फूंक कर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में यह सीट केवल पारंपरिक दलों के बीच की लड़ाई नहीं रहने वाली। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है और अब यहां मुकाबला और भी दिलचस्प होता जा रहा है।

फरीदपुर विधानसभा: सामाजिक संरचना और राजनीतिक महत्व

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र बरेली जनपद का एक अहम राजनीतिक क्षेत्र है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यहां की राजनीति में दलित वोट बैंक की भूमिका निर्णायक रही है। इसके साथ-साथ क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग, विशेषकर कुर्मी, यादव और कुछ अन्य ओबीसी समुदायों की भी अच्छी-खासी आबादी है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी, गन्ना उत्पादन, छोटे उद्योग और मजदूरी यहां की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं।

राजनीतिक तौर पर फरीदपुर में लंबे समय तक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है, लेकिन समय-समय पर यहां जनता ने नए चेहरों और नए प्रयोगों को भी मौका दिया है। यही कारण है कि यह सीट हमेशा से “सेफ” नहीं रही, बल्कि हर चुनाव में नए समीकरण बनते-बिगड़ते रहे हैं।

भाजपा विधायक के निधन के बाद बदला सियासी माहौल

फरीदपुर से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल के आकस्मिक निधन के बाद इस क्षेत्र की राजनीति में एक खालीपन पैदा हुआ है। राजनीतिक हलकों में उपचुनाव की संभावना पर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन जयप्रकाश भास्कर ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी उपचुनाव में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव पर फोकस करेगी

यह फैसला बताता है कि जयप्रकाश भास्कर तात्कालिक लाभ से ज्यादा दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि उपचुनाव अक्सर सहानुभूति और तात्कालिक भावनाओं से प्रभावित होते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में जनता विकास, नेतृत्व और क्षेत्रीय पकड़ को ज्यादा गंभीरता से परखती है।

दो दशक से फरीदपुर की सियासत में सक्रिय जयप्रकाश भास्कर

जयप्रकाश भास्कर कोई नया नाम नहीं हैं। वे पिछले लगभग बीस वर्षों से फरीदपुर की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। आंदोलनों से लेकर स्थानीय मुद्दों तक, उन्होंने लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यही वजह है कि जब उन्होंने चुनावी शंखनाद के लिए किसी सीट का चुनाव किया, तो वह फरीदपुर ही रहा।

स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है जो जमीनी मुद्दों—जैसे दलित उत्पीड़न, सामाजिक सम्मान, स्थानीय विकास, शिक्षा और रोजगार—पर खुलकर बात करता है। यही निरंतरता उन्हें बाकी संभावित उम्मीदवारों से अलग करती है।

जयप्रकाश भास्कर का संबंध धोबी समाज से है, जो फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में एक संगठित और प्रभावशाली सामाजिक समूह माना जाता है। इसके साथ-साथ उन्होंने केवल अपने समाज तक सीमित रहने के बजाय दलितों के अन्य वर्गों और पिछड़े समुदायों से भी संवाद कायम किया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फरीदपुर में जयप्रकाश भास्कर को दलितों के साथ-साथ पिछड़ों का भी अच्छा समर्थन हासिल है। यह समर्थन केवल जातीय समीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता और सुलभता का भी परिणाम है।

सपा की अंतर्कलह और भास्कर को मिलता अवसर

फरीदपुर विधानसभा में इस समय समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही अंतर्कलह खुलकर सामने आ चुकी है। टिकट के कई दावेदार मैदान में हैं और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता। यह स्थिति पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भ्रम और असंतोष पैदा कर रही है।

सपा से पहले ही हार की हैट्रिक झेल चुके विजयपाल सिंह एक बार फिर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ सपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर भी खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक सियाराम सागर की पुत्रवधू कल्पना सागर भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। इतने दावेदारों के बीच पार्टी का एकजुट चेहरा सामने न आ पाना, जयप्रकाश भास्कर के लिए एक बड़ा अवसर बनता जा रहा है।

मुख्य विपक्ष के चेहरे के रूप में उभरते जयप्रकाश भास्कर

स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं से नाराज जनता अब मुख्य विपक्ष के चेहरे के रूप में जयप्रकाश भास्कर को देखने लगी है। यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा, गुटबाजी और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का नतीजा है।

जयप्रकाश भास्कर ने इस मौके को भांपते हुए सियासी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। वह जल्द ही फरीदपुर में एक बड़ी रैली करने जा रहे हैं, जिसके जरिए वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के साथ-साथ विपक्षी वोटों को एक मंच पर लाने की कोशिश करेंगे।

“किंगमेकर” से संभावित मजबूत दावेदार तक

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जयप्रकाश भास्कर फरीदपुर में इतने सक्षम माने जाते हैं कि वे किसी का भी खेल बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। अब सवाल यह है कि क्या वह केवल किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे या खुद एक मजबूत दावेदार बनकर उभरेंगे?

उनकी मौजूदा रणनीति और साफ संदेश को देखें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि जयप्रकाश भास्कर इस बार आधे-अधूरे प्रयास के मूड में नहीं हैं। सीधे 2027 पर फोकस, जमीनी समर्थन, सामाजिक संतुलन और विपक्ष की कमजोरियों का फायदा—ये सभी संकेत देते हैं कि वह लंबी रेस की तैयारी कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। भाजपा विधायक के निधन से बना शून्य, समाजवादी पार्टी की अंदरूनी खींचतान और स्थानीय जनता की बढ़ती नाराजगी—इन सबके बीच जयप्रकाश भास्कर एक ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं, जो न केवल समीकरण बिगाड़ सकते हैं, बल्कि उन्हें अपने पक्ष में भी मोड़ सकते हैं।

2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन फरीदपुर में इसकी बुनियाद आज ही रखी जा चुकी है। और इस बुनियाद के केंद्र में अगर कोई नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वह है—जयप्रकाश भास्कर

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