नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की राजनीति में पिछले दो वर्षों में एक नया नाम तेजी से उभरकर सामने आया है- सर्वजन आम पार्टी (एसएपी)। बेहद सीमित संसाधनों और जमीनी संघर्ष के साथ खड़ी हुई यह पार्टी आज फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए नई चुनौती बनती नजर आ रही है। सम्मेलन, बैठकों और लगातार जनसंपर्क के जरिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने न सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक आधार भी तैयार किया है, जिसे अब नजरअंदाज करना आसान नहीं रह गया है।
सर्वजन आम पार्टी की राजनीति की शुरुआत धोबी समाज को एकजुट करने से हुई। बरेली जिले, खासकर फरीदपुर क्षेत्र में धोबी समाज की संख्या अच्छी-खासी मानी जाती है, लेकिन लंबे समय तक यह समाज राजनीतिक रूप से बिखरा रहा। जयप्रकाश भास्कर ने सबसे पहले इसी बिखराव को खत्म करने की दिशा में काम किया। गांव-गांव बैठकें की गईं, समाज के युवाओं और बुजुर्गों से संवाद स्थापित किया गया और यह समझाने की कोशिश की गई कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक उसकी राजनीतिक आवाज कमजोर ही रहेगी।
धोबी समाज के बाद पार्टी ने पूरे दलित समाज की आवाज बनने का प्रयास शुरू किया। इसके लिए संत गाडगे जी महाराज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ आयोजन करना नहीं था, बल्कि दलित समाज को उसके अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर जागरूक करना था। पार्टी का दावा है कि इन आयोजनों से दलित समाज के बीच एक नई उम्मीद जगी है, जो खुद को परंपरागत दलों से ठगा हुआ महसूस कर रहा था।
पिछले विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद ही जयप्रकाश भास्कर ने नई राजनीतिक राह पर चलने का मन बना लिया था। करीब दो साल पहले सर्वजन आम पार्टी औपचारिक रूप से अस्तित्व में आई। एक जमीनी कार्यकर्ता से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर आसान नहीं था। रास्ते में कई तरह की चुनौतियां आईं। कुछ बड़े नेता उनके बढ़ते प्रभाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ उनकी पार्टी को खत्म करने की कोशिशों में जुटे बताए जाते हैं। वहीं, कुछ दलों की ओर से उन्हें अपने साथ जोड़ने के प्रलोभन भी दिए गए। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह फरीदपुर विधानसभा सीट पर उनकी लगातार मजबूत होती पकड़ मानी जा रही है।

जयप्रकाश भास्कर की राजनीति की खासियत उनका जमीनी जुड़ाव है। वे सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। स्थानीय समस्याओं को उठाना, लोगों की बात सुनना और प्रशासन तक आवाज पहुंचाने की कोशिश करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। यही वजह है कि कम समय में वे राष्ट्रीय दलों के कई नेताओं के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि फरीदपुर में एसएपी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
फरीदपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण भी इस पूरे परिदृश्य में अहम भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी है, वहीं धोबी समाज के वोट भी करीब 15 से 20 हजार के बीच बताए जाते हैं। जयप्रकाश भास्कर का दावा है कि उनकी मुस्लिम समाज में भी अच्छी पकड़ है। यदि मुस्लिम वोटों का बिखराव होता है तो इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी को हो सकता है। वहीं, धोबी समाज के वोटों का एकमुश्त समर्थन न मिलने की स्थिति में भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
एक समय इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का खासा प्रभाव रहा है, लेकिन मौजूदा समय में बसपा का संगठन कमजोर नजर आता है। जमीनी स्तर पर पार्टी की सक्रियता काफी कम हो गई है। इसी खाली जगह को भरने की कोशिश सर्वजन आम पार्टी कर रही है। यही वजह है कि अब कई राजनीतिक विश्लेषक एसएपी को फरीदपुर में तीसरे विकल्प के रूप में देखने लगे हैं।

जयप्रकाश भास्कर बसपा पर भी खुलकर निशाना साधते हैं। उनका कहना है कि जब कांशीराम ने बसपा की स्थापना की थी, तब दलित समाज के बीच एक बड़ी उम्मीद जगी थी। लेकिन कांशीराम के निधन के बाद पार्टी अपने मूल उद्देश्य से भटक गई। भास्कर का आरोप है कि मायावती ने दलितों को उनका हक देने के बजाय टिकट बेचने की राजनीति की और दलित समाज के सम्मान का सौदा किया। उनका मानना है कि इसी वजह से दलित समाज अब नए विकल्प की तलाश में है।
सर्वजन आम पार्टी की रणनीति फिलहाल साफ नजर आती है- पहले संगठन को मजबूत करना, समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ना और फिर चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतरना। पिछड़े वर्गों को जोड़ने की कवायद भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यदि पार्टी इसमें सफल रहती है तो आने वाले समय में फरीदपुर ही नहीं, बल्कि बरेली जिले की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने फरीदपुर से लेकर लखनऊ तक कई समीक्षा बैठकों का आयोजन किया। संत गाडगे जी महाराज से लेकर बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर तक से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए और लगातार संगठन को विस्तार दिया। कुछ नेता उनकी पार्टी को खत्म करने का भी प्रयास कर रहे हैं। कुछ नेता उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करने का भी प्रलोभन दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर काम करने की बदौलत जयप्रकाश भास्कर मौजूदा समय में राष्ट्रीय दलों के कई दिग्गज नेताओं के आंखों की किरकिरी बन चुके हैं।





