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300 घरों पर बुलडोज़र की आशंका, योगी के दरबार पहुंचा मामला, जिला सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष महेश पांडे ने लिखा पत्र, मांगा इंसाफ, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
नगर निगम बरेली द्वारा की जा रही ध्वस्तीकरण की संभावित कार्यवाही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व जिला सहकारी संघ अध्यक्ष महेश पांडे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी द्वारा चुनिंदा बस्तियों और आवासों को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण के लिए चिन्हित किया जा रहा है।
महेश पांडे ने अपने पत्र में लिखा है कि ग्राम खलीलपुर सहित करीब 300 से अधिक आवासों को बिना किसी वैधानिक सर्वे, बिना समुचित नोटिस और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए अवैध घोषित किया गया है। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मनमानी, भेदभावपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है, जिससे क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और आवास के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि जिन इलाकों को अवैध बताकर निशाना बनाया जा रहा है, वे कोई नई बस्तियां नहीं हैं। खलीलपुर सहित किला छावनी, सलेहनगर, नवदिया, सैदपुर हाकिन्स, बाकरगंज और कस्वा हाफिजपुर जैसे कई मोहल्ले देश की आज़ादी से भी पहले से आबाद बताए गए हैं। ऐसे में दशकों से बसे लोगों के घरों को अचानक अवैध घोषित करना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक वास्तविकताओं की अनदेखी भी है।
महेश पांडे ने पत्र में एक और गंभीर पहलू की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक ओर जहां गरीब और मध्यम वर्ग की बस्तियों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा सरकारी तालाबों, जलमग्न भूमि, चारागाहों और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के संबंध में बिना वैधानिक अधिकार के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किए गए हैं। उन्होंने इसे सरकारी और सार्वजनिक भूमि के अनियमित हस्तांतरण का मामला बताया है।
पत्र में कुछ उदाहरण भी गिनाए गए हैं। इनमें कस्वा हाफिजपुर की गाटा संख्या 488, जिसका क्षेत्रफल लगभग 48 हजार वर्ग मीटर बताया गया है, ब्रह्मपुरा की गाटा संख्या 155 से 170, जिसका क्षेत्रफल करीब 7 लाख 56 हजार वर्ग मीटर है, नगर निगम की गाटा संख्या 130 से 133 (लगभग 4 लाख वर्ग मीटर) और उदयपुर खास की गाटा संख्या 94 से 119 (करीब 1 लाख 50 हजार वर्ग मीटर) शामिल हैं। इन जमीनों को लेकर अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
पूर्व जिला सहकारी संघ अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और तब तक ध्वस्तीकरण की सभी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो सैकड़ों परिवार बेघर होने की कगार पर आ जाएंगे और इससे बड़ा सामाजिक संकट पैदा हो सकता है।
इस पत्र के सामने आने के बाद बरेली में ध्वस्तीकरण को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर भी लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वर्षों से बसे मोहल्लों को अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है, जबकि सार्वजनिक भूमि के मामलों में आंखें मूंद ली जाती हैं। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी है कि इस शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और बरेली के लोगों को राहत मिलती है या नहीं।

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