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लखनऊ में भाजपा कार्यालय के बाहर मनाई जा रही थी अवंतीबाई की जयंती, महेंद्र सिंह लोधी ने नहीं लगने दिए थे भाजपा के झंडे, अब सपा जिला अध्यक्ष पद के हैं प्रबल दावेदार, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में समाजवादी राजनीति के भीतर संगठनात्मक बदलाव की चर्चा तेज है और इसी बीच समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पद के लिए महेंद्र सिंह लोधी राजपूत का नाम प्रबल दावेदारों में गिना जाने लगा है। पार्टी कार्यकर्ताओं और लोधी समाज के बीच उनकी पकड़, पुराने आंदोलनों में सक्रिय भूमिका और खुलकर राजनीतिक संघर्ष करने की छवि उन्हें बाकी दावेदारों से अलग बनाती है। खास तौर पर 16 अगस्त 2016 को वीरांगना अवंतीबाई की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को आज भी उनके समर्थक उनके साहस और नेतृत्व की मिसाल मानते हैं, जिसने उन्हें समाज के भीतर पहचान दिलाई और राजनीतिक तौर पर मजबूत चेहरा बनाया।
बताया जाता है कि उस समय जयंती कार्यक्रम को लेकर लखनऊ में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। कार्यक्रम लोधी समाज का था, लेकिन उसमें सियासी दलों के झंडे लगाने की कोशिश हुई। महेंद्र सिंह लोधी राजपूत ने खुलकर ऐलान कर दिया कि जब कार्यक्रम समाज का है तो उसमें किसी अन्य दल, खासकर भारतीय जनता पार्टी के झंडे नहीं लगने दिए जाएंगे। इस मुद्दे पर भारी टकराव भी हुआ, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। आखिरकार कार्यक्रम अवंतीबाई लोधी महासभा के बैनर तले ही कराया गया। उस आयोजन में कई जिलों- आगरा, इटावा, मैनपुरी, सीतापुर, बरेली, रामपुर, लखनऊ, बदायूं और एटा से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, जिससे उनकी संगठन क्षमता और समाज में प्रभाव साफ दिखाई दिया।


राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उस घटना ने महेंद्र सिंह को सिर्फ एक स्थानीय नेता नहीं बल्कि समाज के सम्मान के लिए लड़ने वाले चेहरे के रूप में स्थापित किया। कार्यक्रम भाजपा कार्यालय के सामने ही हुआ और उन्होंने साफ संदेश दिया कि समाज के सम्मान के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। उस दिन का रुख आज भी उनके समर्थकों के बीच चर्चा में रहता है और इसे उनकी राजनीतिक दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है।
समाजवादी खेमे में यह भी कहा जा रहा है कि महेंद्र सिंह लोधी राजपूत लंबे समय से संगठन के भीतर सक्रिय रहे हैं और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क रखते हैं। लोधी समाज के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों में भी उनकी पहचान बनी हुई है, जो किसी भी जिला अध्यक्ष के लिए अहम मानी जाती है। पार्टी** सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावी रणनीति को देखते हुए ऐसा चेहरा सामने लाने पर जोर है जो सामाजिक समीकरण साध सके और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत कर सके। इसी वजह से समाजवादी पार्टी के भीतर उनके नाम पर गंभीर चर्चा बताई जा रही है।


स्थानीय कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जिला अध्यक्ष पद पर ऐसा नेता चाहिए जो संघर्षशील भी हो और समाज के बीच स्वीकार्य भी। महेंद्र सिंह का पुराना रिकॉर्ड, बड़े कार्यक्रम कराने की क्षमता और विवाद की स्थिति में भी डटकर खड़े रहने की छवि उन्हें स्वाभाविक दावेदार बनाती है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व सामाजिक संतुलन और मजबूत संगठन को प्राथमिकता देता है तो महेंद्र सिंह लोधी राजपूत का नाम सबसे आगे रह सकता है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन बरेली की सियासत में जिस तरह उनका नाम लगातार उभर रहा है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जिला अध्यक्ष की दौड़ में वे बेहद मजबूत स्थिति में हैं। आने वाले दिनों में पार्टी का फैसला चाहे जो हो, इतना तय माना जा रहा है कि महेंद्र सिंह लोधी राजपूत अब बरेली की समाजवादी राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो चुके हैं और उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

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