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न यादव, न दलित, न कश्यप और न ही पाल, लोधी मचाएगा धमाल, अबकी बार लोधी नेता को मिल सकती है बरेली सपा जिला अध्यक्ष पद की कमान, बस होली तक करें इंतजार

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में समाजवादी पार्टी की जिला इकाई में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शिवचरण कश्यप को जिला अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अब पार्टी नए चेहरे की तलाश में है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी जातीय संतुलन को नए तरीके से साधने की कोशिश कर रही है। चर्चा है कि इस बार न यादव, न कश्यप, न कुर्मी, न पाल और न ही दलित समाज से जिला अध्यक्ष बनाया जाएगा, बल्कि लोधी समाज के किसी नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
दरअसल, पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने की रणनीति बना रही है। इसी रणनीति के तहत लोधी समाज को साधने पर खास जोर दिया जा रहा है। बरेली जिले में लोधी मतदाता अच्छी संख्या में हैं और कई सीटों पर उनका असर निर्णायक माना जाता है। पार्टी का मानना है कि अगर संगठन की कमान लोधी समाज के हाथ में दी जाती है तो चुनावी समीकरण मजबूत हो सकते हैं।
जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे प्रमुख नाम पार्टी के महानगर सचिव महेंद्र सिंह लोधी का बताया जा रहा है। महेंद्र सिंह लोधी लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। बताया जाता है कि उनका संपर्क लोधी समाज के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी अच्छा है। वह कई लोधी संगठनों से भी जुड़े हैं और बड़े पैमाने पर समाज के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनके समर्थन में कई लोधी संगठन प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को समर्थन पत्र भी भेज चुके हैं। साथ ही पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय सचिव साधना लोधी ने भी उनका समर्थन खुलकर कर दिया है। यही वजह है कि उन्हें इस पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
महेंद्र सिंह लोधी की एक खासियत यह भी बताई जा रही है कि वे भाजपा के लोधी कार्यकर्ताओं को समाजवादी पार्टी में लाने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर भाजपा के लोधी नेटवर्क में सेंध लगानी है तो महेंद्र सिंह लोधी इस काम में प्रभावी साबित हो सकते हैं। यही कारण है कि संगठन में उनके नाम की चर्चा तेजी से बढ़ी है।
हालांकि, जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में सिर्फ महेंद्र सिंह लोधी ही नहीं हैं। पीयूष वर्मा का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है और वे भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं। इसके अलावा बीडी वर्मा ने भी इच्छा जताई है, लेकिन फिलहाल उनकी संभावना कमजोर मानी जा रही है।
बरेली की राजनीति में लोधी मतदाताओं की अहमियत खास तौर पर मीरगंज विधानसभा सीट पर साफ दिखाई देती है। इस सीट पर लगभग 45 से 50 हजार लोधी मतदाता बताए जाते हैं। समाजवादी पार्टी को पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व मानता है कि अगर संगठन में लोधी समाज को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया जाए तो इस सीट समेत कई इलाकों में पार्टी की स्थिति सुधर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व स्तर पर इस फॉर्मूले को लेकर सहमति बन चुकी है और शीर्ष नेतृत्व, जिसमें अखिलेश यादव का नाम भी लिया जा रहा है, संगठन में नए संतुलन के पक्ष में बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।
बताया जा रहा है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो होली तक नए जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। फिलहाल बरेली की सियासत में यह चर्चा तेज है कि इस बार संगठन की कमान लोधी समाज के हाथ में जा सकती है। अब सभी की नजर पार्टी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।

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