नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में समाजवादी पार्टी (सपा) के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक होली के बाद बरेली जिले को नया जिला अध्यक्ष मिलने जा रहा है। इस पद के लिए पार्टी के भीतर जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिल रही है और अब तक तीस से भी अधिक नेताओं ने औपचारिक रूप से आवेदन कर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इतने बड़े पैमाने पर आवेदन आने से साफ है कि जिले की सियासत में यह पद केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का केंद्र भी माना जा रहा है।
संगठन को साधने की चुनौती
सपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह ऐसा चेहरा चुने जो संगठन को एकजुट रख सके और विभिन्न जातीय व सामाजिक समीकरणों को संतुलित कर सके। बरेली में यादव, लोधी, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक का गणित हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। यही वजह है कि पार्टी इस बार जिला अध्यक्ष के चयन में जल्दबाजी नहीं करना चाहती।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने सभी आवेदकों की प्रोफाइल, संगठनात्मक अनुभव और जनाधार का बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिया है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कौन सा नेता आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
महेंद्र सिंह लोधी की मजबूत दावेदारी
दावेदारों में सबसे ज्यादा चर्चा महेंद्र सिंह लोधी के नाम की है। वह वर्तमान में सपा के महानगर सचिव हैं और पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। लोधी समाज से ताल्लुक रखने के कारण उनकी दावेदारी को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी मजबूत माना जा रहा है।

महेंद्र सिंह लोधी को युवा चेहरा माना जाता है और वे लगातार पार्टी कार्यक्रमों, आंदोलनों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय रहे हैं। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि नेतृत्व युवा और ऊर्जावान चेहरे पर दांव लगाना चाहता है तो महेंद्र सिंह लोधी एक उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं। लोधी समाज की संख्या और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उनका चयन पार्टी के लिए रणनीतिक लाभ भी दे सकता है।
विजय यादव पर सबकी नजर
दूसरा नाम जो सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, वह है विजय यादव। पूर्व सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) रह चुके विजय यादव प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक पकड़ दोनों के कारण मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव संगठन को व्यवस्थित ढंग से चलाने में मददगार हो सकता है।

विजय यादव को एक संतुलित और व्यवहारिक नेता के रूप में देखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक काम करने के कारण उनकी पहचान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी है। यही वजह है कि पार्टी के अंदर उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
यादव बिरादरी में कई नाम, लेकिन वीरपाल सिंह यादव सबसे बड़ा चेहरा
यादव समाज से भी कई नेताओं ने जिला अध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया है। इनमें शुभलेश यादव, अरविंद यादव, संजिव यादव जैसे नाम चर्चा में हैं। इन नेताओं ने संगठन में समय-समय पर सक्रिय भूमिका निभाई है और जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाई है।

हालांकि यादव बिरादरी में सबसे बड़ा और प्रभावशाली नाम पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव का माना जाता है। वे लगभग ढाई दशक तक पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगठन में उनका अनुभव और प्रभाव आज भी बरकरार है। पार्टी के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि यदि नेतृत्व अनुभव को प्राथमिकता देता है तो वीरपाल सिंह यादव का नाम फिर से सामने आ सकता है। हालांकि उम्र और नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति के चलते यह भी चर्चा है कि इस बार पार्टी किसी अपेक्षाकृत युवा चेहरे को मौका दे सकती है।
अन्य दावेदार भी कतार में
इन प्रमुख नामों के अलावा कमल साहू और राजकुमार पाल सहित कई अन्य नेताओं ने भी आवेदन किया है। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने का दावा किया है। पार्टी नेतृत्व के पास विकल्पों की कमी नहीं है, लेकिन यही अधिकता अब चयन प्रक्रिया को और जटिल बना रही है।
जातीय संतुलन और संगठनात्मक समीकरण
बरेली की राजनीति में जातीय संतुलन हमेशा अहम रहा है। यादव, लोधी, कुर्मी, पाल और दलित समाज के साथ-साथ मुस्लिम वोट बैंक भी निर्णायक भूमिका निभाता है। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि जिला अध्यक्ष का चयन करते समय इन सभी वर्गों को ध्यान में रखा जाएगा।
यदि यादव समाज से अध्यक्ष बनता है तो पार्टी के पुराने कोर वोट बैंक को साधने का संदेश जाएगा। वहीं लोधी समाज से चेहरा चुनने पर पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग के एक बड़े हिस्से को साधने की कोशिश करेगी। इसीलिए महेंद्र सिंह लोधी की दावेदारी को विशेष रूप से मजबूत माना जा रहा है।
होली के बाद हो सकता है ऐलान
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व होली तक सभी आवेदनों की समीक्षा पूरी कर लेगा और इसके तुरंत बाद जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जा सकती है। माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “यह पद केवल संगठन चलाने के लिए नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए भी अहम है। इसलिए ऐसा नेता चुना जाएगा जो कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चल सके और जनता के बीच पार्टी की मजबूत छवि बना सके।”
कार्यकर्ताओं में उत्सुकता
जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। कई जगहों पर गुटबाजी भी देखने को मिल रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे संभालने की कोशिश कर रहा है। सभी दावेदार अपने-अपने समर्थकों के साथ संपर्क साध रहे हैं और अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं।
कुल मिलाकर, बरेली सपा में जिला अध्यक्ष का चुनाव केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व अनुभव को तरजीह देता है या युवा चेहरे पर भरोसा जताता है।
फिलहाल, महेंद्र सिंह लोधी और विजय यादव पर सबकी नजरें टिकी हैं, जबकि यादव समाज से कई नाम चर्चा में हैं। होली के बाद होने वाली घोषणा से साफ हो जाएगा कि बरेली की सियासत में अगला अध्याय किसके नाम से लिखा जाएगा।





