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11 गांव, एक दिन और बड़ा संदेश: दलित गांवों में पहुंचेंगे चंद्रसेन सागर, अंबेडकर जयंती पर दिखेगा सियासी शक्ति प्रदर्शन, पढ़ें क्या है पूरी रणनीति?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट पर इस बार अंबेडकर जयंती सिर्फ एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि सियासी संदेश का बड़ा मंच बनती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर ने 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर क्षेत्र के 11 दलित बहुल गांवों में कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने की घोषणा की है। खास बात यह है कि इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा उन्होंने काफी पहले, 26 मार्च को ही तैयार कर ली थी, जिसके बाद अन्य राजनीतिक दलों ने भी इसी तरह के कार्यक्रमों की घोषणा शुरू कर दी।
स्थानीय स्तर पर इस पहल को लेकर काफी चर्चा है। यह सिर्फ एक सामाजिक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी है। चंद्रसेन सागर फरीदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, ऐसे में उनके इस कार्यक्रम को सीधे तौर पर चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि वह पहले भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। पूर्व दस्यु सुंदरी फूलनदेवी के जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर भी उन्होंने मल्लाहों के गांवों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए थे।
चंद्रसेन सागर खुद दलित समाज से आते हैं और लंबे समय से इस वर्ग के बीच सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने शिक्षा को अपनी राजनीति और सामाजिक काम का केंद्र बनाया है। वे एक स्कूल भी संचालित करते हैं, जिसमें आसपास के दलित समुदाय के बच्चों को भी शिक्षा दी जाती है। उनके समर्थकों का कहना है कि सागर सिर्फ राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि समाज के बीच काम करने वाले व्यक्ति हैं, जिनकी पहचान जमीनी स्तर पर बनी है।
14 अप्रैल को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की योजना काफी व्यापक है। सुबह 9:30 बजे अर्जुनपुर गांव से इसकी शुरुआत होगी, जिसके बाद पृथ्वीपुर, महोलिया और बढरा कासिमपुर जैसे गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दोपहर तक यह सिलसिला गुलड़िया मकरंदपुर और कमनपुर तक पहुंचेगा, जबकि दोपहर बाद उजसिया गोटियां, अस्तू नगला और बिलपुर में आयोजन होंगे। दिन का समापन अंबेडकर नगर और तरा गोटियां में कार्यक्रमों के साथ होगा। हालांकि आयोजकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय में कुछ बदलाव संभव है, लेकिन कार्यक्रमों की श्रृंखला तय है।
इस पूरी योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि सभी कार्यक्रम दलित बहुल गांवों में आयोजित किए जा रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चंद्रसेन सागर अपने मुख्य सामाजिक आधार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। अंबेडकर जयंती जैसे अवसर पर इन गांवों में पहुंचकर वे एक तरफ बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने राजनीतिक आधार को भी मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फरीदपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और यहां पर दलित वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अंबेडकर जयंती पर इस तरह के बड़े स्तर के कार्यक्रम चुनावी दृष्टि से काफी अहम माने जाते हैं। चंद्रसेन सागर द्वारा सबसे पहले इस तरह की घोषणा किए जाने के बाद अन्य दलों का भी सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि आने वाले चुनाव में दलित वोटों को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।
फरीदपुर क्षेत्र में पहले भी अंबेडकर जयंती मनाई जाती रही है, लेकिन इस बार जिस तरह से इसे संगठित और योजनाबद्ध तरीके से 11 गांवों में फैलाया गया है, वह इसे खास बनाता है। हर गांव में अलग-अलग समय पर कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति यह दर्शाती है कि आयोजक ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाना चाहते हैं और हर गांव में व्यक्तिगत रूप से संपर्क स्थापित करना चाहते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस पहल को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। कई गांवों में पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई हैं और लोग इसे सामाजिक एकजुटता के अवसर के रूप में देख रहे हैं। वहीं विपक्षी दल भी इस पर नजर बनाए हुए हैं और अपने स्तर पर जवाबी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में अंबेडकर जयंती इस बार सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि राजनीतिक सक्रियता का केंद्र बनती जा रही है। चंद्रसेन सागर की यह पहल यह संकेत देती है कि आने वाले चुनाव में जमीन पर काम करने वाले नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। अब देखना यह होगा कि इस सामाजिक-राजनीतिक पहल का असर चुनावी परिणामों पर किस रूप में सामने आता है।

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