नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी बरेली के संगठन के पदाधिकारी इन दिनों टिकट की दलाली को लेकर चर्चा में हैं। यहां टिकट दिलाने के लिए लखनऊ तक पैरवी करने के नाम पर वसूली का खेल शुरू हो चुका है और पार्टी के कुछ मौजूदा एवं कुछ निवर्तमान पदाधिकारी कथित तौर पर अपनी जेबें भरने में जुट गए हैं। ताजा मामला फरीदपुर विधानसभा सीट का सामने आया है। यहां मटन वाली भाभी को मटन खाने वाले देवर जी और पार्टी के बड़े पदाधिकारी ने आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने का वादा कर डाला है। इससे भाभी जी इतनी उत्साहित हो गईं कि उन्होंने अपनी जीत के पोस्टर तक लगा डाले। पोस्टर में मोटे अक्षरों में स्पष्ट रूप से लिखा गया है, ‘भाभी जी की ऐतिहासिक विजय।’ साथ में अखिलेश यादव के साथ भाभी जी का फोटो भी लगा है।
बताया जाता है कि टिकट बंटवारे तक भाभी जी से लगातार वसूली करने की जमीन तैयार की जा चुकी है। ये वही भाभी जी हैं जिनकी पैरवी एक पुराने दिग्गज ने नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव से की थी। उस वक्त अखिलेश यादव ने भाभी जी को टिकट देने से साफ इनकार भी कर दिया था। इसके बाद नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई तो भाभीजी के देवरजी ने टिकट दिलाने का ठेका ले लिया।
दिलचस्प बात यह है कि देवरजी ने सिर्फ भाभी जी का ही ठेका नहीं लिया है बल्कि दारू वाली मैडम और पुलिस वालों को सत्ता में आने पर पेशाब पिलाने की धमकी देने वाले एक पूर्व प्रत्याशी का भी ठेका लिया हुआ है। इतना ही नहीं देवरजी का अपना भाई खुद इस पेशाब पिलाने की धमकी देने वाले नेता के साथ गांव-गांव जाकर यह ऐलान करता नजर आ रहा है कि अखिलेश यादव ने इस पेशाब पिलाने की धमकी देने वाले नेता को सपा उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी महज एक मजाक बनकर रह गई है।
इसी बीच, कुछ अन्य दावेदारों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। कई कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या बिना आधिकारिक घोषणा के किसी को उम्मीदवार बताना पार्टी की छवि को प्रभावित नहीं करता। उनका कहना है कि इससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और विरोधी दलों को भी राजनीतिक हमला करने का अवसर मिलता है।
फिलहाल, क्षेत्र में चर्चाओं और दावों का बाजार गर्म है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि अंततः समाजवादी पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है। अंतिम निर्णय चाहे जो भी हो, इतना तय है कि फरीदपुर की राजनीति आने वाले महीनों में और अधिक रोचक होने वाली है।
बहरहाल, अखिलेश यादव किसे टिकट देंगे और किसे नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, टिकट के दलालों की दुकान बड़ी अच्छी चल रही है।




