नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनुराग सिंह नीटू भी अब खुलकर चुनावी मैदान में उतरते नजर आ रहे हैं। छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले नीटू पिछले काफी समय से कैंट विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं और पार्टी के भीतर टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। उनका दावा है कि छात्र जीवन से लेकर अब तक उन्होंने गरीबों, छात्रों और युवाओं के लिए काम किया है और इसी जनसंपर्क के आधार पर वह आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में हैं।
अनुराग सिंह नीटू की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वह बरेली कॉलेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने युवाओं के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनका कहना है कि छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में उन्होंने किसी जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर राजनीति नहीं की, बल्कि हर छात्र की समस्या को अपनी समस्या मानकर उसके समाधान के लिए प्रयास किया। यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में युवा उनके साथ जुड़े हुए हैं। नीटू का दावा है कि छात्र राजनीति के दौरान बनाए गए उनके व्यक्तिगत संबंध अब भी उनकी राजनीतिक ताकत हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में यही नेटवर्क उनकी दावेदारी को मजबूती प्रदान कर सकता है।
सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति
बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में मुस्लिम और सवर्ण मतदाताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अनुराग सिंह नीटू क्षत्रिय समाज से आते हैं और क्षत्रिय समाज के कई संगठनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं। वह दबंग नेता भी हैं और जरूरतमंदों के मददगार भी। इसके चलते समाज के भीतर उनकी मजबूत पकड़ होने का दावा किया जाता है। उनके समर्थकों का मानना है कि अगर समाजवादी पार्टी उन्हें टिकट देती है तो वह भाजपा के परंपरागत सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं।
नीटू की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि वह अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता और सामाजिक संपर्क को पार्टी के वोट बैंक के साथ जोड़कर चुनावी मुकाबले को भाजपा के लिए कठिन बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि कैंट विधानसभा सीट पर केवल पार्टी के पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोटों के सहारे चुनाव जीतना संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्याशी की अपनी व्यक्तिगत पकड़ और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच स्वीकार्यता भी जरूरी है।
अनुराग सिंह नीटू कहते हैं, “मैंने छात्र राजनीति के दौरान युवाओं की निस्वार्थ सेवा की है और उसी का नतीजा है कि आज हजारों युवा मेरे साथ हैं। अगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मुझे आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट देते हैं तो मैं यह सीट जीतकर उनकी झोली में डालने का काम करूंगा।”
उनका कहना है कि उन्होंने छात्र राजनीति को केवल राजनीतिक करियर बनाने के माध्यम के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इस दौरान जरूरतमंद छात्रों की समस्याओं को उठाने का काम किया। वह बताते हैं कि कई गरीब छात्रों की फीस माफ कराने में उन्होंने मदद की, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में रुकने से बच गई। नीटू का दावा है कि ऐसे कई छात्र आज उच्च पदों पर काम कर रहे हैं और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। उनका मानना है कि यही छात्र और उनके परिवार आज भी उनके साथ खड़े हैं।
2022 में भी की थी टिकट की दावेदारी
अनुराग सिंह नीटू के लिए समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदारी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कैंट विधानसभा सीट से टिकट के लिए जोरदार प्रयास किया था। उस समय उनके समर्थकों ने क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया था और नीटू को टिकट दिए जाने की मांग उठाई थी।
हालांकि, चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की तत्कालीन विधायक सुप्रिया ऐरन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं और पार्टी ने उन्हें कैंट सीट से प्रत्याशी बनाया। इसके चलते नीटू की दावेदारी अंतिम समय में पीछे रह गई। उस चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बावजूद उनके समर्थकों का दावा है कि उनकी लोकप्रियता पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।
2022 के चुनाव के दौरान बरेली शहर के अलग-अलग इलाकों में नीटू के समर्थन में माहौल दिखाई देने का दावा उनके समर्थक करते हैं। उस समय शहर के कई ऑटो रिक्शा पर नीटू के समर्थन में प्रचार सामग्री लगी नजर आती थी। स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भी बड़ी संख्या में युवा उनके समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए थे। हालांकि, टिकट न मिलने के बाद भी उन्होंने राजनीतिक सक्रियता बंद नहीं की।
इसके उलट, पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने जनसंपर्क को और मजबूत करने का प्रयास किया है। अब वह पहले की तरह केवल छात्र और युवा राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि विधानसभा क्षेत्र के व्यापक मतदाता वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
बूथ स्तर पर टीम तैयार
नीटू का कहना है कि आगामी चुनाव को लेकर उनकी तैयारी अब केवल व्यक्तिगत जनसंपर्क तक सीमित नहीं है। उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने का दावा किया है। उनके मुताबिक, कैंट विधानसभा क्षेत्र में 167 हिंदू बूथ हैं और इन बूथों पर उनकी टीम लगातार काम कर रही है।
वह कहते हैं कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए केवल पार्टी का सिंबल पर्याप्त नहीं होता। प्रत्याशी की अपनी व्यक्तिगत ताकत भी महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, कैंट विधानसभा सीट पर वही प्रत्याशी मजबूत मुकाबला कर सकता है, जो व्यक्तिगत तौर पर कम से कम 10 हजार वोट हासिल करने की क्षमता रखता हो।
नीटू का दावा है कि उनके पास अपने समाज के करीब 20 हजार वोटों का समर्थन है। इसके अलावा दलित और पिछड़े वर्गों से जुड़े युवा भी उनकी टीम का हिस्सा हैं। वह इसे अपनी चुनावी रणनीति की महत्वपूर्ण ताकत मानते हैं।
हालांकि, उनके इन दावों की वास्तविकता का आकलन चुनाव के दौरान ही संभव होगा। फिलहाल टिकट के लिए दावेदारी कर रहे सभी नेताओं की तरह नीटू भी अपने समर्थन का आधार मजबूत होने का दावा कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती यह होगी कि वह किस उम्मीदवार को मैदान में उतारकर कैंट सीट पर भाजपा को सबसे मजबूत चुनौती दे सकती है।
जातीय समीकरण पर भी खुलकर बोले नीटू
कैंट विधानसभा सीट के जातीय समीकरण को लेकर भी अनुराग सिंह नीटू काफी स्पष्ट नजर आते हैं। उनका मानना है कि इस सीट पर भाजपा को हराने के लिए समाजवादी पार्टी को ऐसा उम्मीदवार उतारना होगा, जिसकी हिंदू मतदाताओं के बीच भी मजबूत स्वीकार्यता हो।
नीटू कहते हैं, “मैंने राजनीति कभी जाति देखकर नहीं की। छात्र जीवन में बरेली कॉलेज छात्र संघ का अध्यक्ष रहते हुए मैंने हर जाति, हर वर्ग, गरीब और अमीर हर छात्र के लिए काम किया। उनका प्रेम ही मेरी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है।”
हालांकि, इसी क्रम में वह यह भी दावा करते हैं कि कैंट सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार के लिए चुनाव जीतना मुश्किल होगा और भाजपा को हराने के लिए हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारना जरूरी है। उनका यह बयान समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट के संभावित दावेदारों के बीच चल रही बहस को भी सामने लाता है। पार्टी के सामने एक तरफ पीडीए की सामाजिक रणनीति है, तो दूसरी तरफ कैंट जैसी सीट पर भाजपा के मजबूत आधार को चुनौती देने के लिए उम्मीदवार के व्यक्तिगत सामाजिक समीकरण का सवाल है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा भरोसा
अनुराग सिंह नीटू की पूरी राजनीतिक रणनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण नजर आती है। छात्र राजनीति से निकले होने के कारण उनका मानना है कि युवाओं के बीच उनकी व्यक्तिगत पहचान किसी भी चुनाव में उन्हें बढ़त दिला सकती है।
वह दावा करते हैं कि उनके साथ हजारों युवा जुड़े हुए हैं और इनमें अलग-अलग जाति एवं सामाजिक वर्गों के लोग शामिल हैं। उनका कहना है कि छात्र राजनीति में किए गए काम का लाभ उन्हें आज भी मिल रहा है। फीस माफी से लेकर छात्रों की समस्याओं के समाधान तक किए गए अपने प्रयासों को वह अपनी राजनीतिक पूंजी मानते हैं। नीटू युवाओं को रोजगार, शिक्षा और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैं।
अब खुलकर मैदान में आए नीटू
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट के लिए कई दावेदार सक्रिय हैं। इनमें अनुराग सिंह नीटू का दावा इस मायने में अलग है कि वह छात्र राजनीति से निकले हैं और अपने व्यक्तिगत जनाधार को टिकट का प्रमुख आधार बता रहे हैं। क्षत्रिय समाज में पकड़, सवर्ण मतदाताओं के बीच पहुंच, युवाओं का समर्थन और बूथ स्तर पर टीम तैयार करने का दावा उनकी रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं।
अब तक अपेक्षाकृत खामोशी से अपनी तैयारियों में जुटे अनुराग सिंह नीटू ने अब खुलकर अपनी दावेदारी सामने रख दी है। उनका अगला लक्ष्य समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को यह विश्वास दिलाना है कि वह कैंट विधानसभा सीट पर पार्टी के लिए जीत का उम्मीदवार साबित हो सकते हैं।
फिलहाल यह तय होना बाकी है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में बरेली कैंट से किसे अपना प्रत्याशी बनाती है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि टिकट की दौड़ अब तेज हो चुकी है और अनुराग सिंह नीटू ने अपनी दावेदारी मजबूती से पेश करते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी राजनीतिक ताकत का दावा कर दिया है। आने वाले समय में उनकी सक्रियता और उनके समर्थन में जुटने वाले लोगों की संख्या यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है कि उनकी दावेदारी कितनी मजबूत है।




