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दावेदार भी हैं, दमदार भी, 10 करोड़ से अधिक के करा चुकी हैं काम, लगा चुकी हैं जीत की हैट्रिक, कोरोना काल में दांव पर लगा दी थी जान, दिलचस्प है कांग्रेस पार्षद अरुणा अरोड़ा की दास्तान, आप भी पढ़ें

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नीरज सिसौदिया, जालंधर
जालंधर की‌ सियासत में अरुणा अरोड़ा का नाम किसी परिचय का‌ मोहताज नहीं है। वह तीन बार से लगातार पार्षद बनती आ रही हैं। जीत की हैट्रिक लगाने के बाद अब वो चौथी बार फिर से मैदान में उतरने जा रही हैं। पिछले पंद्रह वर्षों में वार्ड में दस करोड़ से भी अधिक के विकास कार्यों से इलाके की तस्वीर में चार चांद लगाने वाली अरुणा अरोड़ा ने कोरोना काल में अपनी जान तक दांव पर लगा दी थी। यह पहला चुनाव है जब उनके पति मनोज अरोड़ा इस दुनिया में नहीं हैं। इस लिहाज से जनता के बीच उनके प्रति एक सहानुभूति की लहर भी देखने को मिल रही है। प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार है लेकिन अरुणा अरोड़ा अपने काम के दम पर किस्मत आजमाने को बरकरार हैं। सूबे में सरकार चाहे किसी की भी रही हो लेकिन वार्ड 33 (पहले वार्ड नंबर 27) में जीत अरुणा अरोड़ा की ही हुई है। इसी उम्मीद के साथ वह एक बार फिर इतिहास दोहराने की कवायद में जुट गई हैं।
यूं तो अरुणा अरोड़ा को पार्षद बने 15 साल से भी अधिक समय हो चुका है लेकिन पिछले पांच साल उनके लिए काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। उन्होंने इन पांच वर्षों में कोरोना जैसी महामारी का डटकर मुकाबला किया और अपने वार्ड के लोगों को इससे बचाने में अहम भूमिका निभाई। इन पांच वर्षों में उन्होंने अपने पति को खोया लेकिन जनता के लिए हमेशा समर्पित रहीं।
उनके वर्तमान कार्यकाल की बात करें तो इन पांच वर्षों में मॉडल टाउन की मैक्सिमम रोड कवर कर चुकी हैं। दो-तीन रह गई थीं उन्हें भी बनवा दिया है। पानी की पाइप लाइन डलवाई हैं।‌ पांच-छह लेन में पाइपलाइंस डलवाई गई हैं।
अरुणा अरोड़ा उन महिला पार्षदों में से बिल्कुल नहीं हैं जिनके काम उनके पति देखते हैं और वो सिर्फ नाम की पार्षद होती हैं। अरुणा ने अपने काम के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सबसे खास बात यह है कि वो कभी वादा नहीं करती, रियालिटी में काम करके दिखाती हैं। नगर निगम से जनता की अपेक्षा सफाई, सड़क, पानी, सीवरेज और स्ट्रे डॉग्स जैसी समस्याओं से निजात दिलाने की होती है जिन पर अरुणा अरोड़ा पूरी तरह खरी उतरी हैं।
सफाई के लिए सरकारी के साथ-साथ उन्होंने प्राइवेट स्वीपर्स भी रखे हुए हैं। सरकारी ट्रॉली जब उपलब्ध नहीं होती तो वो प्राइवेट ट्रॉली मंगवाकर काम करवाती थीं। उनके कार्यकाल में एलईडी लाइट्स भी लगाई गई हैं। डार्क पॉइंट मोस्टली कवर हो चुके हैं।
पिछले 5 साल में एक ऐसी महामारी आई जो पहले कभी नहीं आई थी। इसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। ऐसे में किसी भी पार्षद के लिए जनता के बीच जाना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना आसान नहीं था लेकिन अरुणा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कोरोना को मात दी।
एक पार्षद होने के नाते वह अपने वार्ड को एक परिवार की तरह देखती रहीं। इसलिए उन्होंने कोरोना काल में अपने वार्ड की जिम्मेदारी को भी उसी तरह निभाया जिस तरह अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाती रही हैं। उन्होंने एनजीओ के साथ मिलकर एक ग्रुप तैयार किया था। इसमें उनकी एक स्वीपर्स की टीम थी जो सवेरे रोज सफाई करती थी। एक प्राइवेट टीम सैनिटाइजेशन के लिए हायर की थी। उन्होंने प्राइवेट ट्रैक्टर भी मंगाए और प्राइवेट मशीनें भी मंगवाईं। राशन के लिए अलग टीम बनाई थी। रोजाना लगभग 200 पैकेट डेरा सत्संग राधा स्वामी वालों के सहयोग से तैयार किए जाते थे। राशन बांटने के लिए अलग टीम बनाई थी। दुनिया भर की मांएं जहां अपने बच्चों को उस दौर में घर से बाहर कदम तक नहीं रखने देती थीं उस वक्त अरुणा अरोड़ा ने अपने इकलौते बेटे को भी वार्ड के लोगों की सेवा में लगा दिया। वह सुबह 7:00 बजे से शाम तक मां की मदद करता था। ये वो दौर था जब अरुणा के पति की तबीयत ठीक नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने मुझे कभी अरुणा को जनसेवा से नहीं रोका और पूरा सपोर्ट किया। शायद यही वजह रही कि कोरोना का वो मुश्किल दौर भी अरुणा के इरादों को नहीं डिगा सका।

कोरोना काल में सफाई करती अरुणा अरोड़ा।

बात अगर अरुणा अरोड़ा की उपलब्धियों की करें तो उनके वार्ड पर खर्च हुए दस करोड़ रुपये से भी अधिक का बजट खुद ब खुद इसकी गवाही दे रहा है। लेकिन कोरोना काल में अरुणा अरोड़ा ने जिस तरह से बिना बीमार हुए जो सेवा कार्य किया वह उनके अब तक के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है।
उनकी दूसरी अचीवमेंट मॉडल टाउन के लाल बत्ती चौक पर “आई लव जालंधर” बनाना है। यह मॉडल टाउन का मेन एंट्री पॉइंट है।
इसके अलावा उन्होंने गुरुद्वारा साहिब मॉडल टाउन के पार्क का जिस तरह सुंदरीकरण कराया है वह वाकई में अद्भुत है। ऐसा पार्क जालंधर ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब में शायद ही कहीं और देखने को मिले। इस पार्क ग्रीनरी है, ओपन जिम लगा है, यहां रोजाना योगा क्लास भी चलती है और यह क्लास पूरी तरह नि:शुल्क चलती है।
उन्होंने दो तरह के जॉगिंग ट्रैक बनवाए हैं। एक कच्चा तो दूसरा टाइल्स वाला बनवाया गया है। कुछ लोगों को टाइल्स वाले ट्रैक पर सैर करना पसंद नहीं होता और कुछ को डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि वे टाइल्स वाले ट्रैक पर सैर न करें, इसलिए अब जिसे जहां सैर करनी है वह कर सकता है।
इसके अलावा पक्षियों के लिए स्पेशल नेस्ट तैयार किए गए हैं जिसमें पंछियों के लिए खाना और पानी प्रोवाइड किया जाता है। इसके अलावा शिवानी पार्क मॉडल टाउन को भी उन्होंने एचआर इंटरनेशनल वालों से पर्सनल रिक्वेस्ट करके बनवाया है। वार्ड के लगभग सभी पार्कों के विकास और सुंदरीकरण पर उनका फोकस रहा है। उन्होंने फ्रूट ट्रीज भी लगवाए हैं जिससे जनता फल भी खा सकती है और ताजी हवा भी ले सकती है। इसमें कई एनजीओ का भी सहयोग मिला है। लगभग 25 लाख रुपए से पार्कों के सुंदरीकरण का काम करवाया गया है। इतना ही नहीं सड़कों का भी निर्माण व्यापक पैमाने पर हुआ है। पिछले 4.5 साल के दौरान करीब 70-80 लाख रुपए की लागत से सड़कें बनवाई गई हैं।


पिछले 5 वर्ष के कार्यकाल में सभी कार्यों को जोड़ा जाए तो अरुणा अरोड़ा ने लगभग 7 करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए हैं।
अब फिर से नगर निगम चुनाव आ रहे हैं। 21 दिसम्बर को मतदान होना है। वैसे तो अरुणा अरोड़ा वार्ड में इतने काम करा चुकी हैं लेकिन विकास की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। बेहतरी की गुंजाइश हमेशा रहती है। ऐसे में अरुणा अरोड़ा अबकी बार किन मुद्दों को लेकर मैदान में उतरती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
सूबे की सत्ता अब आम आदमी पार्टी के हाथों में है। प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पहले से काफी खराब हो चुकी है लेकिन पार्षद का जो चुनाव होता है वह स्थानीय चेहरे पर होता है और उम्मीदवार के व्यक्तित्व पर होता है। जनता को लगता है कि पार्षद ऐसा होना चाहिए जो हर वक्त अवेलेबल हो और उनके काम करके दे और इन मापदंडों पर अरुणा अरोड़ा पूरी तरह फिट बैठती हैं। यही वजह रही थी कि पिछले नगर निगम चुनाव में अरुणा अरोड़ा का नाम मेयर पद के प्रबल दावेदारों में शामिल था। हालांकि अरुणा अरोड़ा ने खुद कभी खुलकर इस पद के लिए दावेदारी नहीं जताई थी। इस बार भी लगता है कि अगर कांग्रेस नगर निगम चुनाव जीतती है तो अरुणा अरोड़ा भी मेयर पद के प्रबल दावेदारों शुमार होंगी।

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