नीरज सिसौदिया, जालंधर
जालंधर की सियासत में अरुणा अरोड़ा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें चुनावी सियासत से कोई लेना -देना नहीं था। वो सिर्फ घर संभालती थीं और उनके पति स्वर्गीय मनोज अरोड़ा सियासत।
बात उन दिनों की है जब मनोज अरोड़ा सियासत के फलक पर सितारों की मानिंद चमक बिखेर रहे थे। उनकी गिनती कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होने लगी थी। आज से लगभग ढाई दशक पहले सियासत में कदम रखने वाले मनोज अरोड़ा ने पहले दस साल चुनावी राजनीति से दूर जनता की सेवा में निकाल दिए। वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद जब नगर निगम चुनाव आए और मनोज अरोड़ा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा था तो जिस वार्ड से वह चुनाव लड़ना चाहते थे वो महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया। ऐसे में जब कोई विकल्प नहीं बचा तो उन्होंने अपनी पत्नी अरुणा अरोड़ा को चुनाव लड़ाने का फैसला किया। और इस तरह राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करने वाली अरुणा अरोड़ा इत्तेफाकन राजनीति में आ गईं। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग 17 साल पहले शुरू हुआ उनकी जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। वह लगातार चौथी बार जीत हासिल करने वाली जालंधर की संभवत: एकमात्र महिला पार्षद हैं।






