यूपी

बरेली में जश्न-ए-आज़ादी का रंगीन जलवा: डॉ. अनीस बेग के भव्य मुशायरे में गूंजे देशभक्ति और मोहब्बत के तराने

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बरेली में एक अनोखा और यादगार आयोजन देखने को मिला। सपा नेता और समाजवादी पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अनीस बेग ने “जश्न-ए-आज़ादी” के मौके पर एक शानदार मुशायरे का आयोजन किया, जिसने देर रात तक शहरवासियों को मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और भारत माँ को समर्पित नज़्म से हुआ। श्रोताओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत ग़ज़लों और नज़्मों का ऐसा रसास्वादन किया कि पूरा ग्राउंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि रहे सपा बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती, पूर्व मंत्री और सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप, जबकि अन्य विशिष्ट अतिथियों में सुमैया राणा, शिवचरण कश्यप, शमीम खान सुलतानी, डॉ. सुप्रिया ऐरन, डॉ. आई.एस. तोमर, डॉ. सबीन एहसन, डॉ. गयासुल रहमान, केबी त्रिपाठी, अशफाक सकलानी, ज्ञानी काले सिंह समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मुशायरे में देशभर के नामचीन शायरों ने शिरकत की। वसीम बरेलवी, शबीना अदीब, मंज़र भोपाली, नदीम फ़ारुख़, खुर्शीद हैदर, मनिका दुबे, चिराग शर्मा, हाशिम फिरोज़ाबादी, हिमांशी बाबरा, मोहन मुन्तजिर, बिलाल सहारनपुरी, मध्यम सक्सेना, इब्राहिम अली, जीशान, आरिफ हाफ़ी, राहिल बरेलवी, शाइस्ता सना जैसे दिग्गजों ने अपने अशआर से एक से बढ़कर एक रंग जमाया।

शायरों ने कभी मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम दिया, तो कभी लोकतंत्र और आज़ादी की अहमियत पर ऐसी पंक्तियाँ पढ़ीं कि श्रोताओं की आंखें नम हो गईं और दिलों में एक नई ऊर्जा जाग उठी।

डॉ. अनीस बेग ने इस अवसर पर कहा—
“आज़ादी केवल एक तारीख़ नहीं बल्कि हमारी अस्मिता है। हमने इस आयोजन को ‘एक शाम, एकता के नाम’ का रूप दिया है। शायरी हमारी तहज़ीब का आईना है, जो गंगा-जमुनी संस्कृति और भाईचारे को मजबूत बनाती है।”

मुशायरे में शायरों के अशआर—

  • वसीम बरेलवी का शेर “इतना बिखराव संभाला नहीं जाता मुझसे, खुद को यू-ट्यूब पे डाला नहीं जाता मुझसे” ने खूब वाहवाही लूटी।

  • शबीना अदीब का “जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है” ने श्रोताओं को गहराई तक छू लिया।

  • मंज़र भोपाली का “ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है, अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है” भी देर तक गूंजता रहा।

कार्यक्रम में देशभक्ति, इंसानियत और मोहब्बत से लबरेज़ कलाम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा माहौल एक तरफ आज़ादी के जज़्बे से सराबोर था तो दूसरी ओर शायरी की मिठास और गंगा-जमुनी तहज़ीब की खुशबू से महक रहा था।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *