देश

चित्र सब विचित्र हुए…

चित्र सब विचित्र हुए। मित्र भी अमित्र हुए। चित्र सब विचित्र हुए। बेला जब बदल गई, चांदनी भी ढल गई, पक्षियों के कलरव में, भोर भी फिसल गई, मध्याह्न जो चढ़ा तनिक तो बदले से चरित्र हुए। चित्र सब विचित्र हुए। बृहद कोश बन गए, अपशब्द यूॅं बिखर गए , पाप के प्रभाव से ही, […]