चेन्नई : तमिलनाडु के एक कलेक्टर ने फर्ज का एक ऐसा नमूना पेश किया है जो देशभर के अफसरों के लिए एक मिसाल बन गई। इस कलेक्टर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक हों और अफसर ईमानदार हो तो सरकारी योजनाओं का लाभ उसके असली हकदार तक पहुंचाने से कोई नहीं रोक सकता. हम बात कर रहे हैं करूर के कलेक्टर टी. अनबाजागन की.
कलेक्टर के मुताबिक उनके पास 2 दिन पहले कुछ लोग आए। उन्होंने बताया कि एक महिला अत्यंत गरीबी की हालत में जिंदगी बसर कर रही है। उसे सरकार की तरफ से किसी भी तरह की पेंशन नहीं दी जा रही है जबकि उसे वृद्धावस्था पेंशन मिलनी चाहिए। इस पर कलेक्टर ने खुद जाकर महिला से मिलने और उसकी हालत देखने का फैसला किया। महिला का नाम रा कमल है और वह 80 साल की है। वह चिन्नामनाईकेनपट्टी में अकेली रहती है और उसके परिवार में कोई भी नहीं है। वह काम काज करके अपना गुजारा करने में पूरी तरह से अक्षम है। 2 दिन पहले कलेक्टर उसके घर अचानक दोपहर को पहुंच गए। वहां के हालात देख कलेक्टर का दिल पसीज गया। उन्होंने खुद ही किचन संभाला और महिला के लिए खाना बनाया। महिला अचानक से इस VIP गेस्ट को अपने घर में देखकर हैरान थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है। खाना बनाने के बाद कलेक्टर साहब ने केले के पत्ते में खाना परोस महिला को दिया। इसके बाद दूसरे केले के पत्ते में कलेक्टर ने खुद खाना लिया और जब वही जमीन पर महिला के साथ बैठ कर खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद कलेक्टर वहां से चले गए। महिला को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर यह हो क्या रहा है। लेकिन महिला के पास से जाने के बाद कलेक्टर ने तत्काल उक्त महिला के लिए ₹1000 प्रतिमाह वृद्धा पेंशन जारी करने के आदेश दिए। इसके बाद महिला की खुशी का ठिकाना ना रहा। वृद्धावस्था में यह सहारा उसकी जीवन यापन के लिए पर्याप्त है। कलेक्टर ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन योजना जैसी योजनाएं असल में ऐसे लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं। बस जरूरत है कि उनका लाभ सही लोगों को मिले। जो इसके वास्तविक हकदार हैं उन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हम यह प्रयास कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिलाया जा सके।

तमिलनाडु के इस कलेक्टर ने वृद्ध महिला के घर जाकर बनाया खाना, साथ खाया और फिर…



