नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी हमेशा से संगठन और सामाजिक समीकरणों के संतुलन पर जोर देती रही है। बरेली जिले में भी इन दिनों पार्टी संगठन को लेकर हलचल तेज है। चर्चा है कि आगामी नवरात्रों के दौरान समाजवादी पार्टी के नए जिला अध्यक्ष का चयन किया जा सकता है। इस संभावित बदलाव के बीच एक नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है- डॉ. जीराज सिंह यादव। साफ-सुथरी छवि, लंबे राजनीतिक अनुभव और समाजसेवा के कारण वह पार्टी के अंदर एक मजबूत विकल्प के रूप में देखे जा रहे हैं।
डॉ. जीराज सिंह यादव समाजवादी पार्टी के पुराने और समर्पित नेताओं में गिने जाते हैं। वह वर्ष 1992 में समाजवादी पार्टी से जुड़े थे, जब पार्टी अपने शुरुआती दौर में थी और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। पिछले तीन दशकों में उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम किया है और आंवला विधानसभा क्षेत्र में एक मजबूत जनाधार तैयार किया है। राजनीति के साथ-साथ उनका सामाजिक काम भी उन्हें अलग पहचान देता है।
जमींदार परिवार में जन्मे जीराज सिंह यादव ने अपने पारिवारिक संसाधनों का उपयोग सिर्फ निजी जीवन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई। आंवला विधानसभा क्षेत्र में वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक अस्पताल चलाते हैं, जहां जरूरतमंद लोगों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए उनका यह प्रयास लोगों के बीच काफी सराहा जाता है।
समाजसेवा के क्षेत्र में भी जीराज सिंह यादव की भूमिका उल्लेखनीय रही है। गरीब बेटियों की शादी में आर्थिक मदद करना, जरूरतमंद परिवारों के लिए मकान बनवाना और गरीबों के इलाज में सहयोग करना जैसे कई काम उन्होंने समय-समय पर किए हैं। यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल एक नेता नहीं बल्कि समाजसेवी के रूप में भी देखते हैं। यह छवि राजनीति में उनके लिए एक बड़ी पूंजी मानी जाती है।
राजनीतिक तौर पर भी जीराज सिंह यादव का अनुभव काफी व्यापक है। वर्ष 2006 में वह ब्लॉक प्रमुख चुने गए थे, जिसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 2015 में वह जिला पंचायत सदस्य भी बने। इन दोनों पदों पर रहते हुए उन्होंने विकास और संगठनात्मक कामों के जरिए अपनी सक्रियता साबित की।
हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बड़ा मौका मिलते-मिलते रह गया। उस समय आंवला विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रमुख दावेदारों में उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था। स्थानीय स्तर पर भी उनके समर्थन में माहौल दिखाई दे रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी नेतृत्व ने आरके शर्मा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले से जीराज सिंह यादव के समर्थकों में निराशा फैल गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस फैसले का असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा। चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आरके शर्मा को लगभग 18 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना था कि यदि उस समय जीराज सिंह यादव को टिकट दिया जाता तो मुकाबला अलग हो सकता था। यह घटना आज भी बरेली की सियासत में चर्चा का विषय बनी रहती है।
इसी पृष्ठभूमि में अब जब समाजवादी पार्टी बरेली में नए जिला अध्यक्ष की तलाश कर रही है, तो जीराज सिंह यादव का नाम फिर से सुर्खियों में आ गया है। पिछले दो कार्यकालों से इस पद पर गैर-यादव नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। पहले अगम मौर्य को जिला अध्यक्ष बनाया गया और उसके बाद शिवचरण कश्यप को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। ऐसे में पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि इस बार किसी यादव नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि संगठन में सामाजिक संतुलन बनाया जा सके।
जीराज सिंह यादव के समर्थक चाहते हैं कि पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपे। उनका तर्क है कि वह लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और उनकी छवि भी साफ-सुथरी है। हालांकि खुद जीराज सिंह यादव ने इस पद के लिए खुलकर कोई दावेदारी नहीं जताई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि यदि पार्टी यादव चेहरे पर विचार करती है तो जीराज सिंह यादव का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में हो सकता है। हालांकि, अरविंद सिंह यादव, संजीव यादव, शुभलेश यादव सहित कुछ अन्य नेता पहले से ही जिला अध्यक्ष पद की कतार में खड़े हैं लेकिन समाजसेवा के क्षेत्र में जीराज सिंह यादव के सामने ये नेता कहीं नहीं ठहरते।
समाजवादी पार्टी इस समय संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बरेली जैसे बड़े जिले में जिला अध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही पद स्थानीय स्तर पर संगठन की दिशा तय करता है। पार्टी नेतृत्व भी इस बार ऐसे नेता को जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है जिसकी छवि साफ हो और जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके।
डॉ. जीराज सिंह यादव इस कसौटी पर काफी हद तक फिट बैठते हैं। उनकी राजनीतिक छवि विवादों से दूर रही है और समाजसेवा के कारण उन्हें विभिन्न वर्गों में स्वीकार्यता भी मिली है। खास बात यह है कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उनका संपर्क समाज के उस वर्ग से भी है जिसे अक्सर “एलीट क्लास” कहा जाता है। यह वही वर्ग है जिसे अभी तक भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर माना जाता रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी जीराज सिंह यादव जैसे चेहरे को जिला अध्यक्ष बनाती है तो पार्टी को दो स्तरों पर फायदा मिल सकता है। पहला, संगठन के भीतर पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को संदेश जाएगा कि पार्टी मेहनत करने वालों को महत्व देती है। दूसरा, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता के कारण पार्टी नए सामाजिक वर्गों तक भी पहुंच बना सकती है।
बरेली की राजनीति में यह भी देखा गया है कि जो नेता सामाजिक कामों के जरिए अपनी पहचान बनाते हैं, उन्हें जनता का भरोसा जल्दी मिलता है। जीराज सिंह यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही नजर आता है। अस्पताल चलाने और समाजसेवा के कारण वह सिर्फ राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के जीवन से भी सीधे जुड़े हुए हैं।
फिलहाल समाजवादी पार्टी के नए जिला अध्यक्ष को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है। लेकिन जिस तरह से संगठन के भीतर जीराज सिंह यादव के नाम की चर्चा हो रही है, उससे यह साफ है कि वह इस दौड़ में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। अगर पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपती है तो यह न सिर्फ उनके राजनीतिक सफर का एक नया अध्याय होगा, बल्कि बरेली में समाजवादी पार्टी की रणनीति को भी नई दिशा मिल सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी बरेली के संगठन की कमान किसे सौंपती है। लेकिन इतना तय है कि डॉ. जीराज सिंह यादव का नाम फिलहाल जिले की सियासत में चर्चा के केंद्र में बना हुआ है और उनके समर्थक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पार्टी इस बार उनके अनुभव और साफ छवि को प्राथमिकता दे सकती है।





