नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली के राजेंद्र नगर इलाके में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना के तहत चल रहे सड़क मरम्मत कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के पार्षद सतीश मम्मा ने जल निगम और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जनता को सुविधा देने के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है और सड़क मरम्मत का काम पूरी तरह मानकों के विपरीत कराया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “ऐसा काम होने से बेहतर है कि काम ही न हो।”
सतीश मम्मा ने बिग बाजार के सामने राजेंद्र नगर में चल रहे सड़क रिपेयरिंग कार्य का निरीक्षण किया तो वहां की स्थिति देखकर नाराज हो गए। उनका आरोप है कि सड़क मरम्मत में इस्तेमाल की जा रही सामग्री बेहद खराब गुणवत्ता की थी और काम पूरी तरह लापरवाही से किया जा रहा था। उन्होंने मौके पर ही काम रुकवा दिया और इसकी शिकायत जल निगम तथा नगर निगम के अधिकारियों से की।
“सिर्फ खानापूर्ति हो रही है”
सतीश मम्मा का कहना है कि शहर में 24 घंटे सातों दिन पानी उपलब्ध कराने के लिए जो पाइपलाइन डाली जा रही है, उसके बाद सड़क मरम्मत का कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल निगम की ओर से कराए जा रहे इस काम में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहता और ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है।
उनके अनुसार, जिस गुणवत्ता की सड़क पहले थी, उसी मानक के अनुसार मरम्मत होना तय किया गया था। योजना के तहत साफ निर्देश थे कि यदि सड़क हॉटमिक्स की है तो उसी स्तर की बनाई जाए, यदि इंटरलॉकिंग या आरसीसी सड़क काटी गई है तो उसे भी उसी गुणवत्ता के साथ दोबारा तैयार किया जाए। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
सतीश मम्मा ने कहा कि सड़क की मरम्मत में बजरी और सीमेंट को सही तरीके से अलग-अलग अनुपात में इस्तेमाल करने के बजाय दोनों को एक साथ अव्यवस्थित तरीके से डाला जा रहा था। मौके पर केवल एक सीमेंट का कट्टा रखा था जबकि मिक्सर में लगातार कई परात बजरी डाली जा रही थी। उनका आरोप है कि इतनी कम मात्रा में सीमेंट डालकर मजबूत सड़क बन ही नहीं सकती।

“यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है”
पार्षद सतीश मम्मा ने कहा कि इस प्रकार का काम सीधे-सीधे सरकारी धन की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि जनता टैक्स देती है ताकि विकास कार्य सही गुणवत्ता के साथ हों, लेकिन यहां तो केवल कागजों में काम पूरा दिखाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा, “मैं सरकार, पार्टी और जनता—तीनों के साथ खड़ा हूं। जो काम सही होगा उसका समर्थन करूंगा, लेकिन गलत काम किसी कीमत पर नहीं होने दूंगा। जनता के पैसे से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सतीश मम्मा का कहना है कि यदि अभी इस तरह की लापरवाही नहीं रोकी गई तो कुछ महीनों बाद सड़क फिर टूट जाएगी और जनता को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ेगी। एक तरफ सड़कें खोदे जाने से लोग परेशान हैं, दूसरी तरफ मरम्मत भी टिकाऊ नहीं हो रही।
मौके पर नहीं मिला कोई जिम्मेदार अधिकारी
सतीश मम्मा ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि इतना बड़ा काम चल रहा है लेकिन मौके पर जल निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। उनके अनुसार, ठेकेदार बिना किसी निगरानी के मनमाने ढंग से काम कर रहा था।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में सबसे जरूरी चीज निगरानी होती है। यदि अधिकारी मौके पर मौजूद रहें तो मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है, लेकिन यहां पूरी व्यवस्था ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी गई है।

पार्षद के अनुसार, जब उन्होंने मौके पर आपत्ति जताई तो काम रुकवा दिया गया। इसके बाद उन्होंने संबंधित टीम के सूरज और समीर नामक अधिकारियों से बात की और कहा कि जब तक मानक के अनुसार सामग्री और प्रक्रिया सुनिश्चित न हो, तब तक काम शुरू न कराया जाए।
अधिकारियों को भेजी शिकायत
सतीश मम्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी शिकायत जल निगम और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने जल निगम के अवर अभियंता, अधिशासी अभियंता, नगर निगम के अवर अभियंता, नगर आयुक्त और महापौर को व्हाट्सएप के माध्यम से पूरी जानकारी और फोटो भेज दिए हैं।
उन्होंने कहा कि फोटो खुद इस बात के गवाह हैं कि किस तरह घटिया स्तर का काम किया जा रहा था। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते संज्ञान नहीं लेते तो भविष्य में ऐसे कार्यों की शिकायतें और बढ़ेंगी।

जनता में भी नाराजगी
राजेंद्र नगर इलाके के लोगों में भी सड़क मरम्मत को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से सड़कें खोदी गई हैं, जिससे आवाजाही प्रभावित हो रही है। धूल, मिट्टी और गड्ढों की वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में उम्मीद थी कि मरम्मत का काम मजबूत और टिकाऊ होगा, लेकिन जिस तरीके से काम हो रहा है उसे देखकर लोगों का भरोसा टूट रहा है।
कई लोगों का कहना है कि यदि पार्षद मौके पर न पहुंचते तो शायद यह काम इसी तरह पूरा कर दिया जाता और कुछ समय बाद सड़क फिर उखड़ जाती।
“काम मानक के अनुसार होना चाहिए”
सतीश मम्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी काम को रुकवाना नहीं बल्कि उसे सही तरीके से कराना है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे पानी उपलब्ध कराने की योजना जनता के हित में है और इसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के निर्धारित मानकों के अनुसार ही सड़क रिपेयरिंग होनी चाहिए। यदि सड़क काटी गई है तो उसकी मजबूती पहले जैसी या उससे बेहतर होनी चाहिए। केवल ऊपर से सीमेंट डालकर खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा।

“जनता के बीच रहकर लड़ूंगा”
सतीश मम्मा ने कहा कि वह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और जनता की समस्याओं को उठाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि कहीं भी घटिया निर्माण या भ्रष्टाचार जैसी स्थिति दिखाई देगी तो वह आवाज उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ बयान देने वाला नेता नहीं हूं। जहां गलत काम होगा, वहां पहुंचकर उसे रुकवाऊंगा भी। जनता ने मुझे इसलिए चुना है कि मैं उनकी आवाज बनूं।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सतीश मम्मा लगातार स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजेंद्र नगर में सड़क मरम्मत के मुद्दे को जिस तरह उन्होंने उठाया है, उससे यह संदेश देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जल निगम और नगर निगम के अधिकारी इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और सड़क मरम्मत का काम दोबारा किस गुणवत्ता के साथ शुरू कराया जाता है। फिलहाल राजेंद्र नगर का यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।




