नीरज सिसौदिया, जालंधर
सियासी खेल ने जालंधर में अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा दिया| शहरों में जगह कम पड़ी तो कॉलोनाइजरों ने गांव का रुख कर लिया| जालंधर शहर और उसके आसपास बसे गांवों में एक के बाद एक अवैध कॉलोनियों बनती चली गईं| देखते ही देखते खेतों में अनाज की जगह कंक्रीट की फसलें उगने लगी| खेती का रकबा कम होता गया और कंक्रीट के जंगल बढ़ते गए| अपने आशियाने का ख्वाब शहरी मध्यम वर्ग को गांव की तरफ आकर्षित करने लगा| ये वो तबका था जो शहर में महंगी जमीन और महंगी मकान खरीदने में असमर्थ था| बिल्डरों और कॉलोनाइजरों ने इसी आबादी को अपना निशाना बनाया| इनकी जरूरतों के हिसाब से 2 से लेकर 5 मरले तक के मकान तैयार किए गए| जमीदारों से कौड़ियों के भाव खेती वाली जमीन ली गई और अधिकारियों व राजनेताओं की मिलीभगत से इन खेतों में आशियानों की बुनियाद रखी गई| एक के बाद एक जालंधर जिले के गांवों में बड़ी आबादी बस गई| या यूं कहें कि जालंधर शहर का विस्तार गांव तक हो गया| इनमें से कुछ गांव नगर निगम की हद में आते थे तो कुछ पुडा के दायरे में हैं|
नियम और कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए दो से 7-8 एकड़ के दायरे में ज्यादातर कॉलोनियां काटी गईं| सरकारी खजाने में फूटी कौड़ी तक नहीं आई और नेता और कॉलोनाइजर अरबपति बन गए| सुविधाओं के नाम पर इन कॉलोनियों में सिर्फ रास्ता और सीवर दिया गया| न BPL के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया गया और ना ही नगर निगम के खाते में सीवरेज शेयरिंग चार्ज ही जमा हुआ| एक सर्वे के मुताबिक, जालंधर जिले में लगभग 5000 से भी अधिक अवैध कॉलोनियां वर्तमान में मौजूद हैं| इनमें लगभग आधी से अधिक कॉलोनियों में मकान भी बनकर तैयार हो गए हैं और वहां आबादी भी रहने लगी है| इन कॉलोनियों के विकास का बोझ अब नगर निगम और मगर पालिकाओं पर है| चहेड़ू, सेखे, कंगनीवाल, सलेमपुर मुसलमानों, ढड्डे, सिंघा, मदारा, रेरू, महेड़ू, लद्देवाली, सोफी पिंड, भोगपुर जैसे दर्जनों गांव की खेती की जमीन लगभग खत्म सी हो गई| हजारों एकड़ रखने में अवैध कॉलोनियां काट दी गईं लेकिन सरकार अभी खाली खजाने का रोना रो रही है| अगर यह कॉलोनियां नियमानुसार काटी जाती तो सरकार के खजाने में करोड़ों की राशि आ सकती थी| अभी कई कॉलोनियां ऐसी हैं जिनके खिलाफ अगर कार्रवाई की जाए तो स्थानीय निकाय विभाग के खाते में करोड़ों रुपए आ सकते हैं| नवजोत सिंह सिद्धू ने जिस तरह के तेवर जालंधर दौरे के दौरान दिखाए यदि उसी तरह के तेवर इन अवैध कॉलोनियों के खिलाफ भी दिखाएं तो निश्चित तौर पर सरकार का खाली खजाना चंद घंटों में भर जाएगा|

5000 से भी अधिक अवैध कॉलोनियां हैं जालंधर में, खेतों में काट रहे कंक्रीट की फसल




