नीरज सिसौदिया, बरेली
कोरोना काल ने न जाने कितने बेबसों की जिंदगियां निगल लीं. जाने कितनों की मांग का सिंदूर उजड़ गया और न जाने कितने ही परिवार उजड़ गए. कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिनके सिर से मां-बाप का साया भी उठ गया. डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले ऐसे ही बेबसों की मदद को मेडिकल की कोचिंग के लिए मशहूर ओमेगा क्लासेस के डायरेक्टर मो. कलीमुद्दीन ने हाथ बढ़ाया है. समाजवादी पार्टी के युवा नेता और ओमेगा क्लासेस के डायरेक्टर मो. कलीमुद्दीन ने ऐसे बच्चों को वर्ष 2022 के लिए नीट की कोचिंग नि:शुल्क देने का निर्णय लिया है.
बता दें कि कोरोना काल में मो. कलीमुद्दीन जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग तो पहले से ही देते आ रहे हैं लेकिन कोरोना में लगातार जनसेवा के कार्यों में भी उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं. पिछले साल जब लॉकडाउन में बेबस लोग पैदल अपने-अपने गांवों की ओर जा रहे थे तो कलीमुद्दीन ने उनके लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरत का सामान उपलब्ध कराया था. जब तक बेबसों के आने का सिलसिला चलता रहा तब तक कलीमुद्दीन उनकी मदद को तत्पर रहे.
इसके बाद जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो कलीमुद्दीन फिर से जनसेवा के कार्यों में जुट गए. लोगों की सेवा करते-करते कलीमुद्दीन इस बार खुद भी कोरोना की चपेट में आ गए. लगभग 15 दिन तक कोरोना से जूझने के बाद कलीमुद्दीन ने उसे मात दे दी. शायद यह लोगों की दुआओं का ही असर था कि कोरोना भी कलीमुद्दीन का कुछ नहीं बिगाड़ सका. इतना ही नहीं कोरोना से जंग जीतने के बावजूद कलीमुद्दीन में कोरोना का कोई खौफ देखने को नहीं मिला. यही वजह रही कि जब कलीमुद्दीन ठीक हुए तो फिर से जरूरतमंदों की सेवा में जुट गए. सबसे पहले उन्होंने ऑक्सीजन संकट को देखते हुए मॉडल टाउन में सिख समाज की ओर से शुरू किए गए ऑक्सीजन लंगर में सहायता करनी शुरू की. फिर लोगों को दवाएं उपलब्ध कराईं. इसके बाद लोगों के अस्पताल के बिल तक का भुगतान किया. इस दौरान पूर्ण लॉकडाउन हुआ और गरीबों का रोजगार छिन गया. उनके घरों में रोटी का संकट न हो, इसलिए कलीमुद्दीन ने नि:शुल्क राशन वितरण करना शुरू कर दिया. मुंशी नगर स्थित कार्यालय में वह आज भी राशन बांट रहे हैं. जो भी उनके पास आता है वह खाली हाथ नहीं लौटता. अब उन्होंने उन बेबस बच्चों का डॉक्टर बनने का अरमान पूरा करना चाहते हैं जिनके माता-पिता अपने बच्चों को इस मुकाम पर देखना चाहते थे लेकिन कोरोना ने उनके सपनों को ग्रहण लगा दिया. वे मां-बाप अब इस दुनिया में तो नहीं हैं मगर उनका सपना आज भी उनके बच्चों के अंदर पल रहा है. वे बच्चे अपना और अपने मां-बाप का सपना साकार कर सकें, इसलिए कलीमुद्दीन ने ऐसे बच्चों को नि:शुल्क मेडिकल कोचिंग देने का फैसला किया है. उनके इस कार्य को लोगों की काफी सराहना मिल रही है. न सिर्फ पार्टी नेता बल्कि विपक्षी भी दबी जुबान में उनकी सराहना करते नहीं थकते.
कलीमुद्दीन कहते हैं, ‘कोरोना काल में जिस भी बच्चे ने अपने मां-बाप को खोया है और वह डॉक्टर बनना चाहता है तो हम उसे वर्ष 2022 की नीट परीक्षा के लिए नि:शुल्क कोचिंग देंगे. यह मायने नहीं रखता कि बच्चा हिन्दू है, मुस्लिम है, सिख है या ईसाई, अगर बच्चे का सपना डाक्टर बनने का है तो ओमेगा क्लासेस में उसे कोचिंग करने के लिए एक पैसा भी शुल्क नहीं देना होगा. हमें बच्चे का मजहब नहीं उनका भविष्य देखना है. कोरोना काल में अपनों को गंवाने वाले बच्चे किस कठिन दौर से गुजर रहे हैं उनके दर्द का एहसास हमें है. इसलिए हमने ऐसे बच्चों की मदद का संकल्प लिया है. बता दें कि ओमेगा क्लासेस राजेंद्र नगर में स्थित है.

अब कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चे नि:शुल्क कर सकेंगे मेडिकल की कोचिंग, सरकार ने नहीं सपा नेता कलीमुद्दीन ने की यह पहल…




