यूपी

पति के निधन की सूचना सुने बिना ही कोरोना से हार गई मंजुलिका

निर्भय सक्सेना, बरेली 

ईश्वर से अपने लिए जो भी जितनी श्वास लेकर आया है उसे अपने एक निश्चित समय पर उसी लोक में वापस जाना ही होता है। पर कुछ लोगो के समय से पूर्व ही जाना उनके शुभचिंतकों को अंदर तक हिला जाता है परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका संसार से जाना सभी को अधिक ही विचलित कर जाता है। ऐसी ही एक हसमुख स्वभाव की धनी सभी की मददगार श्रीमती मंजुलिका देवगन उर्फ मीनू , का 7 जून 2021 को दिल्ली के एक होस्पिटल एक माह संघर्ष के बाद हुआ अवसान सभी को अंदर तक हिला गया। अर्ध चेतन मीनू को यह भी नहीं पता था कि एक साथ भर्ती होने के बाद लगभग 25 दिन पूर्व ही 13 मई 2021 को उनके पति मदन देवगन का इसी हॉस्पिटल में कोविड 19 से निधन हो चुका है। इंडिगो एयर लाइन्स में कई वर्ष एयर होस्टेज रह चुकी एवम अब एक अन्य निजी संस्थान में उच्च पद पर कार्यरत उनकी पुत्री श्रीमती नेहा देवगन वरन्दानी ने अंतिम समय तक अपनी मां के बेहतर इलाज की सभी सुविधाएं जुटाई भी। पर मीनू सभी को अलविदा कह गईं।

स्मरण रहे मंजुलिका देवगन ने बाल्यकाल से ही अपने पापा के साथ बाँदा, बड़ोदा दिल्ली में रहकर जीवन व्यतीत करने के साथ ही स्नातक की शिक्षा को पूरा किया। उनके पिता एयरफोर्स में नोकरी के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में तबादला होने के कारण अपने अन्य छोटे बच्चों के साथ रहते थे।

पिता शिव शंकर सिन्हा का 16 जून 1976 में एयरफोर्स की नोकरी के दौरान ही दिल्ली में ही निधन हो गया था। उसके बाद मंजुलिका उर्फ मीनू ने दिल्ली में कई संस्थानों में नोकरी कर परिवार की मदद की। उनकी बेटी नेहा देवगन, पढ़ाई के बाद अपने दम पर इंडिगो में यहएयर होस्टेज रहीं । कई वर्ष बाद इंडिगो एयरलाइन्स से अपना त्यागपत्र देकर अब दिल्ली के अब हॉस्पिटल में उच्च प्रशासनिक पद पर कार्यरत है। जिनका विदेशी बैंक में कार्यरत मोहित वरन्दानी से 29 फरवरी 2012 में विवाह हुआ। उनका पुत्र आशीष देवगन अपनी पत्नी कोमल के साथ अब दुबई से कई वर्ष बाद लौटकर एक निजी कंपनी में कार्यरत है। स्वर्गीय शिव शंकर सिन्हा – सरोजनी सिन्हा (बिट्टो) के महोबा के घर में 1 सितंबर 1959 को जन्मी मंजूलिका सिन्हा ने बाँदा में नाना — नानी जय गोपाल श्रीवास्तव एवं कुंती देवी के पास रहकर अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली। बाद में बड़ौदा (गुजरात) जाकर अपने पापा के साथ रहीं। जब पिता का दिल्ली तबादला हुआ। तो मंजुलिका दिल्ली आ गई। कुछ दिन बाद ही उनके पिता शिव शंकर सिन्हा का 16 जून 1976 में निधन हो गया। उसके बाद नोकरी कर अपने परिवार को संभाला। एक भाई अजय सिन्हा ने जब पढ़ाई पूरी कर ली तो पिता के स्थान पर उन्हें इंडियन एयरफोर्स में ही नोकरी मिल गई। इसके साथ ही मंजुलिका सिन्हा ने सेंट्रल गवर्मेन्ट की मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स में कार्यरत युवक मदन देवगन पुत्र श्रीमती पुष्पा देवगन से 19 जून 1983 को विवाह किया जिन्होंने सरकारी नोकरी छोड़ कर गारमेंट एक्सपोर्ट के कारोबार की फैक्ट्री दिल्ली में लगाई थी। बाद में सरकारी आदेश पर फैक्टरी दिल्ली के बाहर शिफ्ट करनी पड़ी। इसके बाद में विदेशों में पैसे फसने से उनका कारोबार बंद हो गया। उनकी बेटी नेहा देवगन इंडिगो एयरलाइन्स में ‘एयर होस्टेस’ की नोकरी छोड़ने के बाद अब एक बड़ी कंपनी में उच्च पद पर दिल्ली में ही कार्यरत है और बैंक कर्मी पति मोहित वरन्दानी के साथ रहती है। मंजुलिका देवगन के दोनों भाई अजय की मीना से (22 जून 1988), पीयूष सिन्हा की अनीता आनंद से (14 फरवरी 1993) एवम बड़ी बहन मधुरिमा की निर्भय सक्सेना से (15 दिसंबर 1985), बड़ी बहन मधुलिका सिन्हा का विवाह बीबी सिन्हा से (12 नवम्बर 1992) में विवाह कराने में अपनी मां सरोजनी सिन्हा के साथ मिलकर पूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन किया। इसी दौरान मंजुलिका की मां सरोजनी सिन्हा का भी 31 मई 2001 को निधन हो गया था।

परिजनों के साथ सेल्फी लेती नेहा.

कुछ वर्ष बाद उनके छोटे भाई पीयूष सिन्हा का गुरुग्राम के मेदांता मेडिसिटी में कई हृदय एवम वाल्व के कई ऑपरेशन के बाद फंगल वायरस से 31 मई 2014 में निधन हो गया जो उनके लिए एक बड़ा आघात था। समय के साथ साथ भाई बहनों के बच्चों के बड़े होने पर सभी की मददगार की भी भूमिका में रहीं। परिवार में फ़ोन पर सभी का हाल चाल लेने वाली मंजुलिका ने परिवार में सक्रिय होने के नाते नेहा- मोहित, आशीष – कोमल, रुचिका सक्सेना- अमित, शेफाली – अभिषेक, इशिता- अभिषेक आदि उन सभी के भी विवाह में सक्रियता से पूर्ण जिम्मेदारी निभाई। पर यह भी एक दुखद संयोग ही रहा कि अपनी विवाहित संतान रूपी पुत्र आशीष एवम नेहा के दादा – दादी, नाना – नानी बनने के सुख से वह वंचित ही रहीं। और अपने परिवार के सभी बच्चों को हमेशा अपना आशीष स्नेह देती ही रहीं। उनकी बड़ी बहन मधुलिका सिन्हा का 27 अप्रैल 2021 को निधन हो गया था। कहते हैं समय बलबान होता है वही सब अपने अनुसार ईश्वर की मर्जी से ठीक भी करता है पर जाने बाले कभी लौटते नहीं है। उनकी केवल यादें ही शेष रह जाती हैं।

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