चुनावी बॉण्ड योजना से संबंधित एक शिकायत के बाद यहां की एक अदालत के निर्देश पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया गया। इस योजना को अब निरस्त किया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार एक विशेष अदालत के आदेश के आधार पर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 384 (जबरन वसूली के लिए सजा), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 34 (सामान्य इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बी वाई विजयेंद्र, पार्टी नेता नलिन कुमार कटील का भी नाम प्राथमिकी में दर्ज है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श आर अय्यर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने चुनावी बॉण्ड की आड़ में जबरन वसूली की और 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा उठाया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सीतारमण ने ईडी अधिकारियों की गुप्त सहायता और समर्थन के माध्यम से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दूसरों के फायदे के लिए हजारों करोड़ रुपये की जबरन वसूली की। इसमें कहा गया है, ‘‘चुनावी बॉण्ड की आड़ में जबरन वसूली का काम विभिन्न स्तरों पर भाजपा के पदाधिकारियों की मिलीभगत से चलाया जा रहा था।” उच्चतम न्यायालय ने फरवरी में चुनावी बॉण्ड योजना को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इससे संविधान के तहत सूचना के अधिकार और भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है। मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के कारण विपक्षी भाजपा ने उनका इस्तीफा मांगा है। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘भाजपा नेताओं के तर्क के अनुसार, निर्मला सीतारमण को अब इस्तीफा दे देना चाहिए, है ना।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जद (एस) नेता एवं केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘निर्मला सीतारमण को इस्तीफा क्यों देना चाहिए? क्या चुनावी बॉण्ड का पैसा निर्मला सीतारमण के निजी खाते में गया है, जिससे वह इस्तीफा दें? क्या उन्होंने आपकी (सिद्धरमैया) तरह सत्ता का दुरुपयोग कर खुद को फायदा पहुंचाया है?” विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं भाजपा नेता आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस को केंद्रीय वित्त मंत्री पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है और उनके खिलाफ चुनावी बॉण्ड मुद्दे और सिद्धरमैया के खिलाफ एमयूडीए मामले के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘….(चुनावी बॉण्ड) मुद्दा खत्म हो गया है, इस पर उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया है और हमारे नेता (प्राथमिकी के संबंध में) कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेंगे।”
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