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प्रेम प्रकाश की उम्मीदों पर पानी फेर ऐरन हो गई थीं साइकिल पर सवार, अबकी बार शहर सीट पर ठोक रहे ताल प्रेम प्रकाश अग्रवाल, पढ़ें क्या हैं वरिष्ठ कांग्रेस नेता के समक्ष चुनौतियां?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की सियासत में प्रेम प्रकाश अग्रवाल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। कांग्रेस के पुराने दिग्गजों में शुमार प्रेम प्रकाश अग्रवाल वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बरेली शहर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी -कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार थे। मोदी लहर के बावजूद उन्होंने लगभग 85 हजार से भी अधिक वोट हासिल किए थे। उस बार का चुनाव हिन्दू-मुस्लिम के मुद्दे पर लड़ा गया था और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था।
प्रेम प्रकाश वर्ष 2022 में भी शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन तब पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन कैंट विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बनकर आईं और पार्टी ने महानगर की दोनों सीटों पर वैश्य उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया। ऐन वक्त पर सुप्रिया कांग्रेस छोड़ समाजवादी पार्टी में चली गईं और पार्टी ने कैंट सीट से हाजी इस्लाम बब्बू अपनी जमानत तक जब्त करा बैठे। वो इतने वोट भी नहीं ला सके जितने उन्हें वार्ड पार्षद के चुनाव में मिलते थे।लिहाजा प्रेम प्रकाश अग्रवाल चुनाव नहीं लड़ पाए। उनकी जगह केके शर्मा को कांग्रेस उम्मीदवार बनाया गया जो अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बार पुरानी गलती बिल्कुल भी नहीं दोहराएगी और पुराने दिग्गजों पर ही भरोसा जताएगी।
अब एक बार फिर सपा -कांग्रेस गठबंधन की तैयारी हो चुकी है। ऐसे में प्रेम प्रकाश अग्रवाल अभी से शहर विधानसभा सीट से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। कई सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रेम प्रकाश अग्रवाल कहते हैं कि बरेली जिले की कम से कम तीन सीटों पर कांग्रेस का हक बनता है। वर्ष 2017 के चुनाव में भी कांग्रेस को तीन सीटें गठबंधन के तहत दी गई थीं। प्रेम प्रकाश कहते हैं कि शहर और कैंट विधानसभा सीटें तो कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। इसलिए ये दोनों ही सीटें इस बार भी कांग्रेस के ही हिस्से में आएंगी। इसके अलावा पिछली बार मीरगंज सीट भी कांग्रेस के खाते में आई थी। शहर और कैंट में कांग्रेस की दावेदारी को मजबूत बताते हुए वह कहते हैं कि इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा था।
प्रेम प्रकाश अग्रवाल पिछले चार दशक से भी अधिक समय से कांग्रेस से जुड़े हैं। पार्टी के लिए वह कई भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्होंने वो दौर भी देखा है जब पार्टी अपने चरम पर थी और फिर पार्टी को सिमटते हुए भी देखा लेकिन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद उन्होंने किसी और पार्टी की तरफ नहीं देखा।
पुराने जो लोग हैं वे पार्टी से जुड़े हुए हैं। कोई भी पार्टी से कटा नहीं है। यह और बात है कि कोई अपनी उम्र के हिसाब से पार्टी के कार्यक्रमों में कम ही आते हैं मगर आते जरूर हैं। क्योंकि वे विचारधारा से कांग्रेसी हैं। प्रेम प्रकाश अग्रवाल भी उनमें से एक हैं।
प्रेम प्रकाश अग्रवाल की चुनावी राह इस बार आसान प्रतीत होती है। पिछले चुनाव में उनका टिकट चुनाव से लगभग 7-8 दिन पहले ही घोषित हुआ जिसके कारण उन्हें चुनावी तैयारी का मौका नहीं मिल सका था। फिर उस वक्त मोदी लहर चरम पर थी जो आज कहीं नजर नहीं आती। सबसे अहम बात कि उस बार मुकाबला अरुण कुमार जैसे दिग्गज नेता से था जबकि इस बार कोई नया चेहरा ही शहर सीट पर भाजपा उम्मीदवार के तौर पर सामने होगा।
हालांकि, प्रेम प्रकाश अग्रवाल को गठबंधन सहयोगियों से पार पाना होगा। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अभी तक यह निर्णय नहीं लिया है कि बरेली की कौन सी सीट कांग्रेस को दी जाएगी, इसलिए मोहम्मद कलीमुद्दीन जैसे तेज-तर्रार युवा समाजवादी नेता और अब्दुल कय्यूम खां उर्फ मुन्ना जैसे अनुभवी पार्षद भी शहर विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी पेश करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। ये दोनों नेता जरूर चाहते हैं कि शहर विधानसभा सीट अबकी बार कांग्रेस को न दी जाए। कलीमुद्दीन पूरे जोर-शोर से चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं लेकिन मुन्ना अभी खामोशी से तैयारी कर रहे हैं।
बहरहाल, प्रेम प्रकाश अग्रवाल जैसे कांग्रेसी दिग्गज के सामने ये दोनों नेता कुछ कमतर नजर आते हैं। बरेली के ज्यादातर सवाई नेता भी यही चाहते हैं कि शहर विधानसभा सीट कांग्रेस को ही दे दी जाए लेकिन कैंट सीट सपा के पास ही आए। ऐसे में प्रेम प्रकाश अग्रवाल की राह आसान नजर आती है क्योंकि उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस में शहर विधानसभा सीट पर कोई भी ऐसा नेता फिलहाल नजर नहीं आता जो उनके सियासी कद के आसपास भी ठहरता हो।

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