नीरज सिसौदिया, जालंधर
पंजाब की ईमानदार आम आदमी पार्टी की सरकार के मुखिया भगवंत मान ने अब ठान लिया है कि लोगों के घरों के चिराग बुझाने वाले नशा तस्करों के घरों को भी वह आबाद नहीं रहने देंगे। इसी के चलते उन्होंने इन तस्करों के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया है जिसका नाम है, ‘युद्ध विरुद्ध नशा’।
अपने इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पंजाब के ईमानदार मुख्यमंत्री ने अपनी ही तरह निष्पक्ष, निर्भीक और ईमानदार अधिकारियों को चुना है। इन तस्करों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने के लिए हर नगर निगम में ऐसे ही ईमानदार अधिकारियों के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम का गठन किया गया है। जालंधर नगर निगम में यह जिम्मा हेड ड्राफ्टमैन और एटीपी का चार्ज संभाल रहे सुखदेव वशिष्ठ को सौंपा गया है। सुखदेव वशिष्ठ की इस टीम में बिल्डिंग इंस्पेक्टर वरिंदर कौर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर अजय कुमार को शामिल किया गया है। बता दें कि सुखदेव वशिष्ठ वही अधिकारी हैं जिन्हें एक दौर में अपने सख्त मिजाज और जीरो टोलरेंस की नीति के चलते तबादले का दंश झेलना पड़ा था। उन्हें साजिश के तहत पठानकोट भेज दिया गया था। आज भी वह मूलरूप से पठानकोट में ही सेवाएं दे रहे हैं लेकिन उन्हें जालंधर नगर निगम में एटीपी का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है।सूत्र बताते हैं कि सुखदेव वशिष्ठ को विशेष तौर पर पंजाब सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान युद्ध विरुद्ध नशा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ही जालंधर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इससे पूर्व नगर निगम कमिश्नर गौतम जैन के निर्देश पर इस अभियान के लिए टीम गठित करने से पहले ही नशा तस्करों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया गया था।

सबसे पहले एटीपी पूजा मान ने रामामंडी के एक तस्कर का मकान ध्वस्त किया। उसके बाद जब पंजाब सरकार की ओर से सुखदेव वशिष्ठ को टीम का नेतृत्व सौंपा गया तो उन्होंने सबसे बड़े नशा तस्करों में से एक मोला के भार्गव कैंप स्थित अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला दिया। मोला इतना बड़ा नशा तस्कर बताया जाता है कि वह खुलेआम टेबल पर रखकर किलो के हिसाब से नशीले पदार्थ बेचा करता था। बताया जाता है कि मोला को विपक्ष के कुछ नेताओं का भी खुला संरक्षण प्राप्त था। इनमें से एक नेता तो विधायक भी रह चुका है। मोला के खिलाफ कार्रवाई करते ही सुखदेव वशिष्ठ नशा तस्करों के निशाने पर आ गए। पहले तो उन्हें रुपयों का लालच दिया गया लेकिन अपने स्वभाव के मुताबिक सुखदेव वशिष्ठ ने रिश्वत की पेशकश को ठुकरा दिया तो उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी गईं। इस पर भी सुखदेव वशिष्ठ पीछे नहीं हटे और उन्होंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शनिवार को मॉडल हाउस की एक और महिला तस्कर लखबीर कौर उर्फ लेखा के घर पर बुलडोजर चला दिया।
इसके बाद से सुखदेव वशिष्ठ को बदनाम करने की नई साजिश शुरू कर दी गई। इस साजिश को नशा तस्करों के उन गुर्गों ने अंजाम देना शुरू कर दिया है जिनके घरों के चूल्हे इन्हीं नशा तस्करों के दम पर चल रहे हैं। इतना ही नहीं नशा तस्करों से वसूली गई रकम से ये गुर्गे विदेशों तक की सैर कर चुके हैं। अब ऐसे भ्रष्टाचारी भगवंत मान सरकार और उनकी टीम के ईमानदार अधिकारियों को भ्रष्टाचारी बताकर सिर्फ इसलिए दुष्प्रचार कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह से नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई रोक दी जाए और इनका काला खेल बदस्तूर चलता रहे। बड़ी अजीब बात है कि जब तक मान सरकार नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही थी तब तक इन गुर्गों के लिए सरकार बहुत अच्छी और ईमानदार थी लेकिन जब नशा तस्करों के घरों पर बुलडोजर चलने लगे तो सरकार और उनके अधिकारी भ्रष्टाचारी हो गए। अगर वास्तव में यह भ्रष्टाचार है तो देश के हर राज्य में ऐसा भ्रष्टाचार जरूर होना चाहिए ताकि ये नशा तस्कर फिर किसी बेबस मां-बाप के कलेजे के टुकड़े को मौत की नींद न सुला सकें।







