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सपा विधानसभा अध्यक्ष हसीब खान ने स्वतंत्रता दिवस पर दी राष्ट्रभक्ति की जीवंत सीख, झंडा फहराया, मजार पहुंचे और रक्तदान कर देशभक्ति की पेश की मिसाल, पढ़ें हसीब खान ने समाज को कैसे दिया अनोखा संदेश?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने का पर्व नहीं है। यह दिन देशभक्ति, सेवा और निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है। समाजवादी पार्टी के बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष और टिकट के प्रबल दावेदार हसीब खान ने इस स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण बना दिया। आजादी के परवानों की याद में राष्ट्रीय ध्वज फहराना, बच्चों के साथ संवाद, मजार में श्रद्धांजलि और रक्तदान, हर कदम उनके समर्पण और निस्वार्थ सेवा की भावना का प्रतीक रहा।
सुबह 9:30 बजे, हसीब खान अपनी निजी लाइब्रेरी पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। बच्चों के साथ यह पल साझा करते हुए उन्होंने उन्हें आज़ादी के महत्व, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और समाज सेवा के मूल्यों की प्रेरणा दी। हसीब खान ने न केवल झंडा फहराया, बल्कि युवाओं के मन में देशभक्ति की भावना भी जागृत की। हसीब खान ने यह दिखाया कि देशभक्ति केवल झंडा फहराने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के लिए कार्य करने और दूसरों की मदद करने में भी निहित होती है।


दोपहर 3:00 बजे, हसीब खान ने मुल्लाजी की मजार के पास से 100 डलिया फूल लेकर उर्स ए आला हजरत के लिए पैदल यात्रा शुरू की। उनकी यह पैदल यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि समाज में एकता, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक थी। मजार पर पहुंचकर हसीब खान ने अमन और सौहार्द्र की दुआ मांगी। इस दौरान उनके चेहरे पर शांति, संतोष और निस्वार्थ सेवा की झलक साफ दिखाई दी। उनकी यह सरलता और विनम्रता यह संदेश देती है कि सच्ची देशभक्ति और समाज सेवा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी दिखाई देती है।


मजार से लौटकर हसीब खान ने रक्तदान किया, जो उनकी मानव कल्याण और समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। रक्तदान केवल जीवनदान नहीं देता, बल्कि यह यह संदेश भी देता है कि सेवा का कोई बड़ा या छोटा अवसर नहीं होता। हसीब खान ने अपने इस कार्य से यह स्पष्ट किया कि देशभक्ति और समाज सेवा शब्दों से अधिक कर्मों में दिखाई देती है।


हसीब खान का यह समर्पण उनके राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है। पिछले वर्षों में उन्होंने बच्चों की शिक्षा, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान दिया है। उनके प्रयास यह दर्शाते हैं कि वे समाज में वास्तविक बदलाव लाने के लिए निरंतर सक्रिय हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर उनके कार्य यह दिखाते हैं कि सच्ची देशभक्ति और समाज सेवा कर्म और योगदान के माध्यम से ही मापी जा सकती है।

हसीब खान के ये कार्य न केवल उनके समर्थकों बल्कि पूरे बरेली और आसपास के समाज में प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने यह साबित किया कि नेता केवल राजनीतिक निर्णय लेने वाला नहीं होता, बल्कि समाज और देश के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने वाला भी होता है। उनके प्रयासों ने यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल झंडा फहराने या भाषण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे कर्म, सेवा और समाज के लिए योगदान के माध्यम से भी दर्शाना चाहिए।
हसीब खान के यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे। उनके समर्पण और सेवा की मिसाल यह दिखाती है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए हर नागरिक को छोटे-छोटे योगदान देने चाहिए। उनके कर्म यह संदेश देते हैं कि सेवा और समर्पण का कोई मौसम या समय नहीं होता; इसे हर अवसर पर अपनाना चाहिए।


स्वतंत्रता दिवस पर उनके कार्यों ने यह स्पष्ट किया कि यह पर्व केवल राष्ट्रीय उत्सव नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण और निस्वार्थ योगदान का दिन है। बच्चों के बीच शिक्षा, धार्मिक स्थलों पर श्रद्धांजलि, पैदल यात्रा और रक्तदान – इन सभी कार्यों ने उनके जीवन और कार्यों में समर्पण और निस्वार्थता की भावना को उजागर किया। उन्होंने यह साबित किया कि स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और देशभक्ति के अवसर के रूप में मनाना चाहिए। उनके कार्य यह दर्शाते हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर न केवल झंडा फहराना और भाषण देना जरूरी है, बल्कि समाज सेवा और दूसरों की मदद करना असली देशभक्ति है। हसीब खान ने यह साबित किया कि सच्चा नेता वह है जो अपने कर्मों से समाज को मार्गदर्शन और प्रेरणा देता है।

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