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नामचीन शायर, हजारों का हूजूम और मंच पर पीडीए, अनीस बेग ने बदल डाले कैंट विधानसभा सीट के सारे समीकरण, अब मुद्दों पर आई हिन्दू-मुस्लिम की लड़ाई, पढ़ें ‘एक शाम एकता के नाम’ के बाद कैंट सीट पर कैसे बदल रही है 2027 की चुनावी तस्वीर?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
‘हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ मुड़ जाएंगे रास्ता बन जाएगा।’ किसी शायर की ये पंक्तियां इन दिनों बरेली शहर के नामी बाल रोग विशेषज्ञ और समाजवादी पार्टी के बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार डॉक्टर अनीस बेग पर एकदम सटीक बैठती हैं। 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर डॉक्टर अनीस बेग ने फहम लॉन में एक मुशायरे का आयोजन किया था। इस मुशायरे को नाम दिया गया जश्न-ए-आजादी एक शाम, एकता के नाम, हम भारत के लोग। इस आयोजन में एक तरफ हजारों का हुजूम उमड़ा तो दूसरी तरफ विशिष्ट अतिथि के तौर पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के प्रतिनिधियों ने मोर्चा संभाला। क्या सपा, क्या भाजपा और क्या कांग्रेस, देश के नामचीन शायरों को सुनने हर दल के लोग उमड़े। खुद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अशफाक सकलैनी इस आयोजन के गवाह बने और अनीस बेग की इस पहल की मीडिया के समक्ष दिल की गहराइयों से तारीफ करते नजर आए।


बरेली की शान वसीम बरेलवी सहित देश के कई नामी शायरों ने अपने कलाम पढ़े तो हर कोई वाह-वाह करने से खुद को रोक नहीं पाया।


भारत के मशहूर शायर मुनव्वर राणा की पुत्री सुमैया राणा, समाजवादी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती, समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप, सपा जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप और महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी विशेष तौर पर इस आयोजन का हिस्सा बने।

इस आयोजन ने बरेली कैंट विधानसभा सीट पर हिन्दू-मुस्लिम की सियासत के ताबूत में आखिरी कील गाड़ने का काम किया। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद इतने बड़े पैमाने पर किसी समाजवादी नेता की ओर किया गया यह संभवत: पहला आयोजन था।


अनीस बेग ने पिछले कुछ वर्षों में हिन्दू-मुस्लिम समाज के बीच कैंट विधानसभा में आई दूरियों को पाटने के जो प्रयास किए उसका नतीजा इस कार्यक्रम में देखने को मिला। चाहे पीडीए सम्मेलन हो, चाहे कांवड़ियों की सेवा हो, पिछड़ों और दलितों की सेवा के कार्य हों या फिर जरूरतमंदों के साथ होली, दीपावली जैसे त्योहारों की खुशियां बांटनी हों, अनीस बेग ने बड़े पैमाने पर कैंट विधानसभा सीट के लोगों के दिलों को जीतने का काम किया है। अपने इस काम में वो इस कदर सफल हुए हैं कि कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 की चुनावी जंग अब हिन्दू-मुस्लिम के मुद्दे पर तो बिल्कुल नहीं होने वाली। अब हिन्दू -मुस्लिम की ये लड़ाई निश्चित तौर पर मुद्दों पर लड़ी जाएगी।

मौजूदा विधायक सी सफलता-असफलता, उसके प्रदर्शन और लोकप्रियता के साथ ही समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के चेहरे, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों पर लड़ी जाएगी। सुभाष नगर की पुलिया, बरेली में मेट्रो ट्रेन का वादा, एम्स बनाने का वादा, पुराने शहर के कब्रिस्तान से निकलकर बरसात के पानी में तैरती हुई लाशों और टूटी हुई सड़कों जैसे मुद्दों पर ये जंग होगी।


कैंट विधानसभा सीट पर जनता के बीच गंगा-जमुनी तहजीब को फिर से जीवंत करने का काम किया है अनीस बेग ने। अनीस बेग ने जब कुछ साल पहले कैंट के लोगों के दिलों को जीतने की जो मुहिम शुरू की थी, शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा कि सत्ताधारी पार्टी की ओर से तैयार किए गए इस नैरेटिव को बदल पाना मुमकिन हो पाएगा। लेकिन जब फहम लॉन में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच हर जुबान पर अनीस बेग के लिए शुक्रिया के शब्द आए तो वाकई में ये नैरेटिव बदलता दिखाई दिया।


इस आयोजन ने इतना तो साफ कर दिया है कि कैंट विधानसभा सीट पर इस बार धर्म की सियासत बिल्कुल भी नहीं चलने वाली। अगर चुनाव से पहले कोई अनहोनी हो जाए तो बात अलग है लेकिन मौजूदा माहौल स्पष्ट संकेत दे रहा है कि अनीस बेग जैसा चेहरा अगर मैदान में उतरता है तो चुनावी जंग सिर्फ मुद्दों पर होगी।


बहरहाल, विधानसभा चुनाव में अभी काफी वक्त शेष है और कैंट विधायक संजीव अग्रवाल इस बात पर पूरा जोर दे रहे हैं कि उन्होंने अपनी विधानसभा के लिए जो प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दिए हैं वो जल्द ही धरातल पर उतर जाएं ताकि जब मुद्दों पर चुनाव होगा तो उनके पास गिनवाने के लिए एक लंबी फोहरिस्त हो। फिलहाल, अनीस बेग आधी चुनावी जंग अपने दम पर जीतते नजर आ रहे हैं।

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