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अखिलेश का बसपा प्रेम लुटिया डुबोएगा, बस दरी बिछाते और भीड़ बढ़ाते ही रह जाएंगे बरेली के समाजवादी यादव, न टिकट मिलता है न अध्यक्ष का पद, अबकी बार किसे मिलने जा रही है सपा जिलाध्यक्ष की कुर्सी?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी में बरेली जिले में बहुजन समाज पार्टी और अन्य सियासी दलों से इंपोर्टेड गैर यादव नेताओं का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले यादव नेताओं में निराशा बढ़ती जा रही है। सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के समय में बरेली के यादव नेताओं को पार्टी में जो सम्मान दिया जाता था वो अब देखने को नहीं मिलता है। मौजूदा समय में पार्टी की कमान संभाल रहे अखिलेश यादव का बसपा प्रेम बढ़ता ही जा रहा है। यही वजह है कि बसपा से इंपोर्ट किए गए नेताओं को जिला अध्यक्ष पद की कुर्सी भी दी जा रही है और विधानसभा चुनाव का टिकट भी। ऐसे में यादव नेताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि इस बार भी शिवचरण कश्यप की जगह किसी गैर यादव को ही पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी की जा चुकी है। अंतिम रूप से जिन नामों पर मंथन किया जा रहा है उनमें लोधी, पटेल, साहू और पाल समाज के नेता शामिल हैं। इनमें किसी भी यादव नेता का नाम नहीं है।

संजीव यादव

बता दें कि मुलायम सिंह यादव के समय में जब पार्टी प्रदेश में अपने पीक पर थी तो वीरपाल सिंह यादव को जिला अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई थी। पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव भी लड़वाया और राज्यसभा भी भेजा।

वीरपाल सिंह यादव

उस दौरान पार्टी के यादव नेताओं की शासन-प्रशासन में तूती बोलती थी। अरविंद यादव जैसे नेता उस दौर में बड़ी अहमियत रखते थे।

अरविंद यादव

इसी दबदबे की चाहत में यादव समाज समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ था। फिर अखिलेश यादव का दौर आया। शुरुआत में सब ठीक रहा। पार्टी की कमान बरेली में वीरपाल यादव से वापस ले ली गई तो कुछ समय बाद शुभलेश यादव के हाथों में सौंप दी गई।

शुभलेश यादव

इसके बाद अखिलेश का हृदय परिवर्तन हुआ और एक-एक करके बरेली जिले के यादव नेता किनारे लगाए जाने लगे। बहुजन समाज पार्टी से नेताओं की एक बड़ी फौज सपा में आ गई। अगम मौर्य बसपा छोड़कर सपा में आए और थोड़े ही समय बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव आया तो अगम मौर्य को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।

अगम मौर्य

उनकी जगह बसपा से ही आए शिवचरण कश्यप को कमान दे दी गई। यादव नेता खुद को ठगा सा महसूस करने लगे। वहीं फरीदपुर में बसपा से आए विजयपाल सिंह को टिकट दे दिया गया।

विजयपाल सिंह

यह जानते हुए भी कि विजयपाल सिंह को फरीदपुर के यादव बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं। इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए तो बरेली से कांग्रेस से आए प्रवीण सिंह ऐरन को टिकट दे दिया गया।

प्रवीण सिंह ऐरन

अब शिवचरण कश्यप के कार्यकाल में पार्टी की जो फजीहत हुई है उसके बाद पार्टी ने उनसे अध्यक्ष पद छीनने का निर्णय तो कथित तौर पर कर लिया है लेकिन इस बार भी जो नाम फाइनल लिस्ट में शामिल किए गए हैं उनमें किसी भी यादव नेता का नाम नहीं है।

कमल साहू

पार्टी के विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि अंतिम सूची में कमल साहू, मनोहर पटेल, महेंद्र सिंह लोधी और आरके पाल का नाम शामिल किया गया है।

महेंद्र सिंह लाेधी राजपूत

इसके बाद से ही बरेली जिले के यादव नेताओं में खलबली मची हुई है। बताया जाता है कि सपा में कई यादव नेता इस सीट के लिए दावेदारी जता रहे थे। इनमें संजीव यादव, शुभलेश यादव, सूरज यादव, आदेश यादव गुड्डू आदि शामिल थे। लेकिन पार्टी ने इनमें से किसी को भी तवज्जो नहीं दी है।

आदेश यादव, गुड्डू

सूत्र बताते हैं कि आने वाले दो सप्ताह के भीतर ही पार्टी बरेली में नए जिला अध्यक्ष की घोषणा करने जा रही है। बहरहाल, यह तय बताया जा रहा है कि यादव नेता को इस बार भी पार्टी की कमान नहीं मिलने जा रही है। यह कमान दूसरे दल से इंपोर्टेड नेता को ही दी जाएगी।

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